जिम्मेदार अधिकारी अपने पद का ग़लत इस्तेमाल कर छोटे कर्मचारी को हटा किसी दूसरे को नियुक्ति कर देते हैं, इनको कलेक्टर की भी परिमीशन की जरूरत नहीं समझते। गैर जिम्मेदाराना रवैया जनता की समझ से परे। सीधी।देश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपना पदभार संभालने के साथ ही प्रदेश भर के अधिकारियों को ये निर्देशित किया था कि वो जन समस्याओं को लेकर आने वाले आम जनता एवं अन्य के फोन को रिसीव करें तथा उनकी समस्याओं का निदान करें परंतु जिले के अधिकारियों की हालत ये है कि कोई समस्या बताना चाहे तो वो फोन उठाना या फिर कॉल बैक करना उचित नहीं समझते हैं। जबकि मुख्यमंत्री द्वारा स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि जनता की समस्या से रूबरू होकर उनका निदान कराएं एवं फोन उठाएं लेकिन मुख्यमंत्री के इस आदेश की जिले के कलेक्टर सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी धज्जियां उड़ाते देखे जा रहे हैं। इस तरह की काफी शिकायतें आम जनता द्वारा सुनने को मिल रही हैं।मालूम हो कि जिले के जन प्रतिनिधियों की उदासीनता भी इस मामले में कम नहीं है। उनके द्वारा विभागीय अमले पर कसावट नहीं की जा रही है। सत्ता के नेता भले ही अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर अपना काम कराते हों लेकिन आम जनता की समस्या को लेकर कोई फोन लगाए तो प्रशासनिक अधिकारी फोन उठाना उचित नहीं समझते हैं। ये बड़ा सवाल होता है। लोग कहते हैं कि हम अपनी समस्या बताना चाहें तो उसका निदान तभी होगा जब अधिकारी फोन उठाएंगे परंतु इस तरह की स्थिति अभी भी बनी हुई है कि अधिकारी फोन उठाने से परहेज कर रहे हैं।कलेक्टर खुद फोन उठाने से करते हैं परहेज।जब जिले के मुखिया कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी खुद आम जनता का फोन उठाने से परहेज करते हैं तो उनके अधीनस्थ कर्मचारी क्यों भला फोन उठाएंगे। एक और जहां कलेक्टर सीधी आम जनता का फोन तो उठाना उचित नहीं समझते वहीं यदि मीडिया भी कोई जानकारी लेना चाहे तो कलेक्टर फोन नहीं उठाते हैं या काल बैक नहीं करते हैं। ऐसे में विभागीय अमलों एवं अन्य मामलों की जानकारी कलेक्टर सहित विभागीय अधिकारियों तक कैसे पहुंच पाएगी।राजस्व अमले की मिल रही है सर्वाधिक शिकायतेंइस मामले में देखा जाए तो कलेक्टर सहित राजस्व मामले में जिले भर के एसडीएम, तहसीलदार एवं आरआई सहित अन्य राजस्व अमले फोन उठाने से परहेज करते देखे जा रहे हैं। यहां तक कि कई हल्का पटवारी भी फोन उठाने से परहेज करते हैं। वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा एक गरीब तहसील कर्मचारी को हटा कर अच्छी रकम लेकर एक कोटवार को तहसील का सहायक बना दिया गया।वहीं तहसील सिहावल भ्रष्टाचार की स्थिति ये है वहां पूर्व में कम्प्यूटर शाखा में प्रवीण कुमार पाण्डेय की नियुक्ति की गई थी जो पूर्व में जिला कार्यालय निर्वाचन शाखा में व्यय लेखा में नियुक्त थे जिनके अच्छे कार्य को देखते हुए कलेक्टर महोदय द्वारा तहसील सिहावल में नियुक्त कर दिया गया था, लेकिन तहसील में कुछ सरहंग बाबुओं द्वारा उसको परेशान किया जा रहा था और वरिष्ठ अधिकारियों से गुमराह किया जा रहा था, वहीं एसडीएम के बाबू द्वारा बड़ी रकम की मांग की गई नहीं देने पर सिंहावल में नियुक्त कोटवार को उनकी जगह में नियुक्त कर दिया गया और प्रवीण कुमार पाण्डेय के ऊपर मनगढ़ंत आरोप लगा कर सेवा से पृथक कर दिया गया। अभी हाल में प्रवीण कुमार पाण्डेय द्वारा मान. मुख्यमंत्री महोदय के पास न्याय पाने नियुक्ति बहाल हेतु आवेदन प्रस्तुत किया गया है इसमें गुनाहगार के ऊपर कठोर कार्यवाही की मांग है।इस हालत में जनता शिकायत करे तो किससे करे। इस मामले में कड़ाई से पालन होना चाहिए जिससे कि आम जनता अपनी समस्याएं फोन के माध्यम से जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों को अवगत करा सकें।डीईओ पहले उठाते थे फोन अब वो भी कर रहे परहेजजिला शिक्षा अधिकारी पहले फोन उठाते थे लेकिन कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी के आने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. प्रेमलाल मिश्रा भी फोन उठाने से परहेज करने लगे हैं। इन दिनों प्रायवेट स्कूलों की मान्यता सहित कई मामले आते हैं। डीईओ कार्यालय में भ्रष्टाचार की काफी शिकायतें भी मिल रही हैं लेकिन इस मामले में जब डीईओ से मीडिया भी बात करना चाहे तो वो फोन उठाने से परहेज करते देखे जा रहे हैं।स्वास्थ्य विभाग में डाक्टर अधिकारियों की देखी जा रही है मनमानीदेखा जाए तो स्वास्थ्य विभाग अमिलिया डाक्टर साहब श्री स्वतंत्र पटेल जी के पास आप लगाते रहो फोन कभी नहीं उठ सकता चाहे आप सीरियस हो या मरने की स्थिति में हो इनको बाहर की दुनिया से कोई लेना-देना नहीं। बस प्रदेश के मुखिया इनको अधिकारी की कुर्सी में बैठाते हैं पैसा कमाओ परिवार चलाओ, अस्पताल में कार्यरत कर्मचारी द्वारा बोल दिया जाता है अगर अच्छा इलाज कराना है तो क्लीनिक में चले जाना, वहां अच्छा ट्रीटमेंट होगा। जिले के हर विभाग में इस तरह की मानमानी का आलम बना हुआ है। यहां अधिकारी-कर्मचारी फोन उठाने से परहेज करते हैं। जिले के करीब 80 प्रतिशत से ज्यादा अधिकारी-कर्मचारी फोन उठाना उचित नहीं समझते हैं। यही हालात सीएमएचओ, सिविल सर्जन, आबकारी विभाग, महिला बाल विकास विभाग, आदिवासी सहायक आयुक्त सहित कई विभागों में इस तरह की शिकायतें सर्वाधिक सुनने को मिल रही है, मोहन यादव की सरकार का अच्छा खासा मजाक उड़ाया जा रहा। ये हालात सीधी जिले में ज्यादा ही जोर पकड़ा है। बस इनको महीने में खाते में धन का आवागमन बना रहे, जेब खर्च के लिए तो बैठे बैठे मिल जाता है, फिर इनको पब्लिक से क्या लेना देना।पुलिस विभाग की सर्विस कुछ हद तक कहीं कहीं सही दिखती है कुछ थानों में मनमानी का आलमजिले के पुलिस विभाग का पहला दायित्व होता है कि किसी अपराधी की जानकारी दी जाए या अवैध शराब सहित गांजा एवं कोरेक्स की जानकारी देना चाहे तो थाना प्रभारी फोन उठाना उचित समझना चाहिए।सिर्फ अपनी वाहवाही समाचार पत्रों में लिखवाने के बाद ये माना जा सकता है कि उनकी नाकामी ये खुद बयां करती है कि झूंठी वाहवाही करने के अलावा जमीनी स्तर पर काम करना उचित नहीं समझते हैं। उक्त थानों में शिकायत करनें वाले लोगों द्वारा बताया गया अमिलिया थाना प्रभारी व बहरी थाना प्रभारी द्वारा शिकायतो का महत्व रखते हैं और लोगों की समस्या को सुना जाता है उचित कार्यवाही की जाती है। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन इंदौर में अयोजित स्लोगन सम्मान समारोह. समाज सेविका सोहनबीरी देवी को किया गया नीरा अमृत सम्मान से सम्मानित