*बेबाक कलम के साथ अंकुल प्रताप सिंह* अब हम क्या कहे जो राम को लाए उसे पुण्य बहुमत से हिंदू ही नही ला पाया आप भले राम को लाए हों,पर राम आपको लाने में इंटरेस्टेड नहीं दिखे! सालों तक इवेंट पर इन्वेस्ट करते रहे थे, कि वक्त आने पर वसूला जाएगा। पर जिनके नाम का सहारा लिया उनका चरित्र, व जीवन तो “त्याग” के लिए जाना जाता है, अब उनके भक्त होने का दावा करते हो तो “त्याग” करने को भी तैयार रहना था । और आप उनके नाम पर उनके सिद्धांतों के उलट सत्ता प्राप्ति के सपने संजो रहे थे। प्रदेश तो फिर ठीक,पर राम ने अपनी नगरी तक में आपको नकार दिया! डूबी वहां कश्ती जहां पानी कम था। कांग्रेसी दावा कर रहे हैं कि,द्वार खुलवाने से ले कर मूर्ति हमने स्थापित करवाई,तो राम पर पहला हक़ तो हमारा बनता था,शायद इसीलिए राम ने मृत्य प्रायः दल को 7 सीटों के रूप में प्राण वायु से नवाज़ दिया। अजीब इत्तेफ़ाक़ है,सफ़ाया कांग्रेसी गांधी का करने का मंसूबा था,और सुल्तानपुर में अपने ही ख़ेमे की गांधी को गवां बैठे!लगता है साहेब का भरोसा भी राम से उठ गया,शायद इसीलिए एनडीए को 290 मिलने की ख़ुशी के पहले संबोधन में जय श्री राम की जगह “जय जगन्नाथ” का नारा बुलंद किया। हो सकता है ओडिशा में मिली जीत का हक़ अदा कर रहे हों। ये 4 सौ का जुमला ख़ुद पर तो भारी पड़ा ही,हाथी को भी बैठा दिया! नतीजा एक नया “रावण” पैदा हो गया।बहरहाल 36 घंटे बड़े ही उलझन भरे हैं। वर्तमान परिस्थितियों में पलटू राम,और नायडू दोनों के शेयर आसमान छू रहे हैं,और इन दोनों का इतिहास भी रंग बदलने वाला रहा है। पर इतना तो तय है कि,अगर साहेब हैट्रिक मारने में क़ामयाब हो जाते हैं,तो भी अब वो बात नहीं रहेगी कि,अनाथालय से ले कर शौचालय तक का उद्घाटन करने का अधिकार केवल एक ही व्यक्ति के पास रहे। और अगर कहीं व्यापारी जोड़े ने नोटों वाले दो-चार टेम्पो और रिलीज़ कर दिए तो इन हालातों में भी बाज़ी पलट सकती है। वैसे राजनाथ,और गडकरी भी छीका टूटने के इंतेज़ार में बैठे हैं,अगर नीतीश और नायडू ने “मोदी के अलावा” का राग अलापा,तो बिना टिकट खरीदे भी लाटरी निकल सकती है।वैसे एक बात और विचारणीय है, कि जिस व्यक्ति का डंका पूरे विश्व मे सुनाई पड़ता है,वो तो केवल डेढ़ लाख की जीत हासिल करता है,और जिस व्यक्ति को मुख्यमंत्री के क़ाबिल भी नहीं समझा वो सात लाख वोटों से जीत हासिल करता है!और इधर, काउंटिंग के दौरान कमलनाथ वार रूम से पूरे प्रदेश पर नज़र रखने में मशगूल थे,और उधर उनके क़िले में ही सेंध लग गई। जबकि इंदौर में भाजपा प्रत्याशी का निकटम प्रतिद्वंदी “नोटा” रहा,जिसे 2 लाख,11 हज़ार से अधिक मत प्राप्त हुए। जाते जाते आखरी बात जिन क्षेत्रों में नोटा को महत्व दिया गया उसी क्षेत्र की आवाम सबसे ज्यादा बीजेपी द्वारा दी जारी योजनाओ का लाभ उठाते है यानी खाते किसी का है और बजाते किसी का है अबकी बार भी फिरोज गांधी के पोते के आरमान पूरे नही हो सके इंदौर के खजराना में नोटा को सबसे ज्यादा वोट मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में नोटा को बंपर वोट मिले हैं। पूर्व मंत्री और बीजेपी विधायक महेंद्र हार्डिया की सीट इंदौर-5 में सबसे ज्यादा 53 हजार 133 वोट मिले हैं। खजराना और आजाद नगर मुस्लिम बहुत क्षेत्र आते हैं। इसके बाद सबसे ज्यादा वोट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की सीट इंदौर 1 में 31 हजार 835 आए हैं। यहां चंदन नगर मुस्लिम क्षेत्र है। इसके अलावा रमेश मेंदोला की सीट इंदौर 2 में 21 हजार 330 वोट, इंदौर 3 में 23 हजार 618, इंदौर 4 में 22 हजार 956, राऊ में 28 हजार 626, देपालपुर में 17 हजार 771, सांवेर में 19 हजार 086 वोट नोटा को गए हैं। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन “नया सवेरा-एक नई शुरूआत” नशे के खिलाफ़ पुलिस ने छेड़ा अभियान . खजराना थाना पुलिस ने शातिर लुटेरे को गिरफ्तार किया।