इंदौर। प्रदीप चौधरी संभाग ब्यूरो चीफ.

आज सुबह माणिकबाग ब्रिज पर चक्का जाम किया गया।
कल लॉरेंस स्कूल की बस ने एक स्कूटर सवार को मार दी थी टक्कर ,उसके बाद उसकी मौत हो गई थी उसकी बॉडी लेकर पहुंची एंबुलेंस और चक्का जाम किया।
बड़ी तादाद में पहुंचे परिवारजन और स्थानीय निवासी ने चक्का जाम किया।

तेज रफ्तार स्कूल बस हुई बेकाबू ,माणिक बाग ब्रिज के नीचे टर्न लेते समय दुकान में घुसी। दुकान संचालक की मौके पर ही मौत क्लीनर बस छोड़कर भागा, ड्राइवर को रहवासियों ने पकड़ा.
घटना के वक्त बस में सवार थे दस से ज्यादा स्कूली बच्चे.लोरेल्स लारेंश स्कूल की है बस.
क्या जाँच पड़ताल करेगा आर टी ओ की फिर लीपा पोती कर के इतिश्री कर देगा । अभी शहर की जनता डी पी एस स्कूल हादसा भूली नही, अगर यही हादसा किसी मेन रोड पर होता तो कितनी मौत होती । ट्रैफिक पुलिस भी एक हादसा बोलकर इतिश्री कर लेती है, वहीं रोज स्कूलों के बसों में ठूस ठूस कर भरे जाते है बच्चे । जांच के नाम पर बस दो पहिया वाहन हेलमेट , और कारों की सीट बेल्ट पर नजर रहेगी, और लक्ष्मी आती रहेगी । देखना है कि जिम्मेदार कितने ईमानदारी से कार्य करते है, क्या मृतक को भूल जाते है…?

अब सड़क दुर्घटना पर निष्पक्ष नज़र….
सभी नेता अधिकारियो की जुबानी जुमले बजी जारी होती है , कही भी कागजी तौर पर अमली जमला नहीं पहनाया जाता। विभागों को जिसके कारण कभी स्कूली बसे और यात्री बसे हादसों में कई निर्दोष की जान ले लेती है। अभी कुछ ही माह पूर्व गुना में यात्री बस के पलटने से 13 लोगो की हुई थी मृत्यु 14 लोग गंभीर रूप से हुए थे घायल । इसी तरह बीते वर्ष इंदौर में दिल्ली पब्लिक स्कूल की बस हादसे से दिल दहल गया था,उस गम को भुला न सके के फिर एक नया हादसा जख्मो को कुरेदने का हो गया। वह भी तब जब नए कलेक्टर आशीष सिंह ने प्रभार संभाला और सब से पहले वाहनों के प्रति आदेश जारी किया। आदेश जारी होते ही जो कलेक्टर चोरहे से कुछ ही दुरी माणिकबाग चौराहा पर मंगलवार लॉरेंस स्कूली बस ने मचाया कहर यह सब घटना घटित हुई पर नहीं पंहुचा समय पर शासन – प्रशासन जो की चौराहे पर सक्रीय नजर आता है , चालनी कार्यवाही करते हुए नही लगाता है देर लेकिन ऐसे हादसों के वक्त शासन – प्रशासन की लापरवाही अक्सर आती है नजर।
मध्य प्रदेश के सड़क हादसे सन 2021 से 2022 तक 48,956 घायल और मरने वालो की संख्या 12,057 रही है जो की 2023 के आकाड़े अभी इसमें शामिल नहीं हुए है.
इन आंकड़ों के बिच सब से चौकाने वाली बात यह रही की जो इंदौर शहर सफाई में नम्बर वन पर आता है तो वही सड़क हादसों में देश के दूसरे नम्बर पर इंदौर शहर आता है।


क्या कारण है जो इतने हादसे , हर वर्ष होते है ..?
सड़कों का ख़राब होना. ? बडी वजह हो सकती है..!
प्रशासन की लापरवाही चौराहे पर चेकिंग के नाम पर अपना शुभ लाभ देखना
आर टी ओ की अनियामित तरीको से वाहनों को चलने देना, ई रिक्शा से लेकर बड़ी बसों तक ओवरलोड चलना और नियमो को तोड़ना वाहन चालको की आदतों में सुमार हो गया है जिसकी सब से बड़ी वजह चेकिंग ना चालना


चन्द …………….खनक में छुट जाते है सारे वाहन
यहाँ सब खेल चलता है अधिकारियों खुली आखो के सामने.

ऑटो रिक्शा, ई रिक्शा, मैजिक करते हैं ओवर लोडिंग

ऑटो ई रिक्शा सुबह सुबह करते हैं स्कूली बच्चों को लाने ले जाने का कार्य ओवर लोडिंग के साथ.

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One thought on “जिम्मेदार कौन..? हादसों पर हादसे ..?”

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