मध्यप्रदेश सरकार ने चुनावी साल में नियमित कर्मचारियों का महंगाई भत्ता चार प्रतिशत बढ़ाकर बयालीस प्रतिशत कर दिया हे लेकिन प्रदेश के पांच लाख पेंशनरों के महंगाई राहत भत्ते में कोई वृद्धि नही की गई हे .पेंशनरों को आज भी नियमित कर्मचारियों से नौ फीसदी कम तेतीस प्रतिशत महंगाई राहत भत्ता ही मिल रहा हे .आम आदमी पार्टी इस भेदभाव पूर्ण रवैये का विरोध करती हे.विदित हे कि राजस्थान उत्तरप्रदेश,गुजरात के पेंशनरों को नियमित कर्मचारियों के समान ही महंगाई राहत भत्ता मिल रहा हे लेकिन मध्यप्रदेश सरकार द्वारा पेंशनरों के साथ भेदभाव किया जा रहा हे .जिससे पांच लाख पेंशनरों और उन पर आश्रितों को महंगाई से राहत नही मिल पा रही हे.राज्य पुनर्गठन की धारा 49 के तहत महंगाई राहत भत्ता पर खर्च होने वाली राशि का 76 प्रतिशत मध्यप्रदेश सरकार और 24 प्रतिशत छत्तीसगढ़ सरकार देती है जिससे मध्यप्रदेश के पांच लाख और छत्तीसगढ़ के एक लाख पेंशनरों को महंगाई राहत भत्ता मिलता है तथा दोनो राज्यो की सहमति के बाद वृद्धि की जाती है. आप प्रदेश प्रवक्ता हेमंत जोशी ने बताया की मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार और छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार में सामंजस्य और समन्वयन नही हो पाने के कारण पेंशनरों को तकलीफ उठानी पड़ रही हे.धारा 49 के विलोपन की आड़ में पेंशनरों को गुमराह किया जा रहा हे.जबकि बढ़ती महंगाई का सबसे ज्यादा असर पेंशनरों पर पड़ता है क्योंकि उम्र के इस दौर में उन्हें दवाइयों और स्वास्थ संबंधी जरूरतों के लिए ज्यादा आवश्यकता होती है. 2017 में छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह ने धारा 49 को खत्म करने की सहमति दी थी लेकिन मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार तैयार नही हुई जिससे आज भी प्रदेश के पेंशनर दोनो राज्य सरकारों की सहमति पर निर्भर है.आम आदमी पार्टी मांग करती हे कि प्रदेश के पेंशनरों को भी नियमित कर्मचारियों के समान बयालीस प्रतिशत महंगाई राहत भत्ता दिया जाए. Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन इंदौर में कमिश्नरी लागूं होने के बाद गुंडों का बड़ा आतंक। बेख़ौफ़ गुंडों से अब पुलिस भी सुरक्षित नहीं बच पा रही, तो आमजनों का क्या होगा। आप की बदलाव यात्रा को जनसमर्थन ..