पुलिस की कार्यशैली पर लोग लगा रहे प्रश्नचिन्ह..?शहडोल। विनय शुक्ला। “देशभक्ति और जन सेवा” को शिरोधार करने वाली पुलिस, जिले में कई मामलों पर कार्रवाई किए जाने को लेकर सवालों के घेरे में नजर आती है। फिलहाल, हम उन दो मामलों को आप सभी के समक्ष प्रमुखता के साथ रख रहे हैं। जिनमें आज लगभग साल भर की मियाद बीत जाने के बाद भी आरोपियों पर उचित कार्रवाई, जांच की धीमी आंच पर ही चढ़ी हुई है।जनचर्चा की माने, तो इन दोनों मामलों को पुलिस ने सांठगांठ कर ठंड़े बस्ते में कैद कर दिया है। स्थानीय जागरूक जनों ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मामले में उचित कानूनी कार्रवाई कराये जाने की मांग की है। उनका कहना है कि, ऐसे मामलों में कोई ठोस और उचित कार्रवाई नहीं किए जाने से न केवल जहां समाज में गलत संदेश जाता है, तो वहीं पुलिस की छवि भी दागदार होती है।केस नंबर एक….गौरतलब है, बुढ़ार थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम जरवाही निवासी एक युवक ने बीते वर्ष 2022 के माह जुलाई में आत्महत्या कर लिया था। दरअसल, दुर्गा मंदिर के पास रहने वाले मृतक युवक रामस्वरूप पिता मनइया यादव (35 वर्ष) ने फांसी के फंदे पर झूलने से पूर्व अपने गले में एक पेंसिल से लिखा सुसाइड नोट भी अपने हाथों लिख छोड़ा था, जो पुलिस को प्राप्त भी हुआ।मृतक ने बदसलूकी और धमकी से तंग आकर आत्महत्या करने की बात लिखी थी। सुसाइड नोट में ग्राम पकरिया में रहने वाले सास, ससुर, पत्नी और अन्नू सिंह (बुढ़ार) सहित कई अन्य लोगों पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए मृतक ने जान से मारने की धमकी भी दिए जाने की बात का उल्लेखित किया था।ग्रामीणों व परिजनों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच में तो लिया। लेकिन, उस जांच की आंच आज तलक उन उल्लेखित नाम के लोगों पर न पहुंच सकी है? जबकि, घटना दिनांक को घटनास्थल पर उपस्थित ग्रामीणों की भीड़ ने सुसाइड नोट में लिखे नाम के व्यक्तियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर तत्काल गिरफ्तार किए जाने की मांग की थी।केस नंबर दो….यह मामला सोहागपुर थाना क्षेत्र के ग्राम जमुआ का है। जहां गरीब आदिवासी की जमीन पर जबरन अवैध कब्जा करते हुए एक सामान्य वर्ग के व्यक्ति ने विदेशी कंपनी का भारी-भरकम शोरूम, डंके की चोट पर, प्रशासन के नाक के नीचे खड़ी कर दी गई है। मामले की शिकायत पीड़ित आदिवासी सोहन बैगा पिता स्व. भोला बैगा ने जिले के राजस्व विभाग से अपने सभी वैध दस्तावेज प्रत्यक्ष रखते हुए की थी। जिसमें एसडीएम ने धारा 170(ख) के तहत स्टे तो दिया, लेकिन वह स्टे केवल कागजों तक ही सीमित रहा। धरातल पर उसकी तस्वीर कुछ और ही नजर आई।क्योंकि दूसरी ओर स्टे के बावजूद भी उक्त पूंजीपति का निर्माण कार्य जोर-शोर के साथ बेधड़क चलता रहा। परिणामस्वरूप शोरूम लगभग बनाकर तैयार हो चुका है और शुभारंभ का फीता भी संभवतः जल्द ही कटने वाला है! इतना ही नहीं जैसे ही उक्त गरीब आदिवासी सोहन को स्टे आर्डर हाथ आया पूंजीपति राजेश गुप्ता उस पर हावी हो गया और मामले में बैकफुट जाने का दबाव बनाने लगा। जब सोहन दबाव में नहीं आया, तो जातिगत गालियां देते हुए राजेश ने उसे जान से मारने की धमकी दी।जिसके बाद घबराए हुए सोहन ने पुलिस की शरण ली। अपनी लिखित शिकायत देते हुए, आजाक थाना पुलिस से न्याय की गुहार लगाई। विचारणीय है कि, उक्त बेबस और लचार व गरीब आदिवासी बैगा की न्याय की गुहार भरी पुकार हवा में ही गुंजायमान है और संभवतः उसकी पुकार जिम्मेदार पुलिस अफसर के कर्णपटल तक नहीं पहुंच सकी है। परिणामस्वरूप न्याय की आस जिंदा लिए उक्त पीड़ित आदिवासी सोहन आज आधा साल से अपनी चपलें घिसता फिर रहा है।जहां एक मध्यप्रदेश व केन्द्र की भाजपा सरकार खुद को आदिवासियों की हितैषी बताते हुए उन्हें हितलाभ पहुंचाने प्रतिबद्ध दिखलाई पड़ती है। परंतु, शहडोल जिले में सरकार का ही प्रशासनिक तंत्र मूकदर्शक की भांति गरीब आदिवासी बैगा को लचार बनाने का काम कर रही है। आलम यह है कि, सोहन बैगा अब घुट-घुटकर जीने को मजबूर है और उसके न्याय की आस आज भी जिंदा है।पीड़ित का दर्द…का करी भैया गरीब हैं ऐसे ता भोगी थे। चक्कर मा चक्कर लगाईत हे। कौउनो सुनै नहीं ता करी।सोहन बैगा पीड़ित, केस नंबर दो।जिम्मेदारों के यह हैं बोले कुमार प्रतीक एसपी, शहडोल।मामला आपके माध्यम से संज्ञान में आया है। पीड़ितों को जल्द से जल्द न्याय दिलाए जाने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगीे।मयंक तिवारी, डीएसपी अजाक थाना, शहडोल।शिकायतकर्ता का बयान न होने के चलते मामला अभी भी जांच में है।रत्नांबर शुक्ला थाना प्रभारी, बुढ़ार।मैं अभी हाल ही में यहां पदस्थ हुआ हूं। आपके बताने पर यह मामला मेरे संज्ञान में आया है। मैं दिखवाता हूं। मामले में अगर कोई दोषी पाया गया, तो आवश्यक रूप से विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन समानता का नाम, भेदभाव बढ़ाना काम! ग्राम पंचायत गाढ़ा 137 में पीसीसी निर्माण के नाम पर हो रहा जमकर भ्रष्टाचार।