शहडोल। विनय शुक्ला।

धांधली कर कोल इंडिया, रेलवे सहित खरीददारों को लगाई जा रही लाखों की चपत।

शहडोलमध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे अनूपपुर और शहडोल जिले के मध्य अमलाई रेल्वे स्टेशन पर बनी कोल साइडिंग जोकि वास्तविक तौर पर ओरियंट पेटर मिल की है। जहां बीते लंबे समय से कोयला इकठ्ठा करने और निम्न स्तर के कोयले को उच्च स्तर के ग्रेड बदल कर मोटा मुनाफा कमाने का खेल बदस्तूर कोयला ट्रांसपोर्टर कर रहे थे।

इस खेल में हर दिन 20 से 50 लाख रुपए का वारा न्यारा किया जा रहा है। इस बात का खुलासा तब हुआ जब स्थानीय लोगों ने इस रेल साइडिंग को लेकर विरोध स्वरूप धरने पर बैठ गए। लोगों का कहना है कि, साइडिंग पर इकठ्ठा कोयला रैक पर भेजे जाने की जगह भारी भरकम चट्टे (पहाड़ खड़ा) लगाए रखा जाता है। इससे आसपास के इलाकों में बेतहाशा प्रदुषण फैला रहा है।

स्थानीय लोगों की मानें तो, आसपास इलाके में लगभग शत प्रतिशत घरों में रहने वाले लोगों को धूल के कण फांकना पड़ रहा। यही वजह है कि, इससे नाराज़ जनता ने रेल साइडिंग के खिलाफ अब मोर्चा खोल दिया है। इस दौरान यह हकीकत भी सामने आई कि, संभाग में कोयला ट्रांसपोर्टर्स दिनदहाड़े खुलीं आंखों में धूल झोंकने का काम कर रहे हैं। यहां प्रतिदिन लगने वाले रैक और उसके लोडिंग करने के बीच लाखों रुपए का वारा-न्यारा किया जा रहा है।

अब सवाल इस बात का है कि, आखिरकार इसकी भनक रेलवे प्रशासन कैसे नहीं है? अगर है, तो कार्यवाई की जगह वर्षों से मिली छूट के मायने भी तलाशने होंगे। बताया गया है, रेल कर्मियों और कोल ट्रांसपोर्ट कंपनी के कर्मचारियों की मिलीभगत के चलते एक लंबे अर्से से कोयला चोरी को प्रश्रय दिया जाता रहा है। रैक पर कोयला लोड होने के दरमियान शेष कोयले को एक निश्चित स्थान पर ले जाकर रोक दिया जाता है।

इस तरह इक्ठ्ठा कोयला रैंक पर लोडिंग करने वाली कंपनी, कोयले की गुणवत्ता परख कर तय ग्रेड पर एवं कोयले में मिलावट करके शेष बचा कोयला मनचाही कंपनी को बेच रही है। इससे कोल इंडिया कंपनी को जहां भारी नुकसान हो रहा है, तो वहीं दूसरी ओर कोल साइडिंग पर अपनी धाक जमाए लोगों को दिनों दिन मुनाफा भी हो रहा है। कुल मिलाकर यह कि, वर्षों से मुनाफाखोर ट्रांसपोर्टर कोयले का ग्रेड बदल रहे हैं।

गौरतलब है कि, कोयले का तय ग्रेड जी 1 से लेकर जी 10 है। इस ग्रेड पर कोयला सीएजी पोर्टल पर बेचा जाता है। फिर निजी कंपनियां, पावर प्लांट व अन्य संस्थानों को यह बेचते हैं। परिवहन के विकल्प रेलवे और निजी ट्रक-ट्रांसपोर्ट हैं। इसलिए बेतहाशा धांधली से कोल इंडिया, रेलवे और कोयला खरीदने वाले मूल ग्राहक (पावर व स्टील सेक्टर) तीनों को ही चपत लगाई जा रही है। पावर प्लांट को खराब कोयला भेजा जाता है। जिससे पावर प्लांट में आए दिन ब्रेकडाउन होता है, जिसमें कोल ट्रांसपोर्टर की अहम भूमिका को नकारा नहीं जा सकता।

बहरहाल, अमलाई साइडिंग पर पोती कोयले की कालिख अब जगजाहिर हो रही है और कोयले के खड़े पहाड़ से फैल रहे प्रदुषण का स्थानीय लोगों ने अब विरोध करना शुरू कर दिया है। देखना यह होगा कि, नागरिकों की स्वास्थ्य, सुविधाओं सहित प्रदुषण से कब तक निजात मिलेगी। साथ ही इस रेलवे साइडिंग पर हो रही धांधली बदस्तूर कब तक भारत सरकार के राजस्व पर पलीता लगाती रहेगी।

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