अंकुल प्रताप सिंह, बघेल ✍️ इंदौर। एनडीआरएफ की टीम को सुबह बुलाया जा सकता था पर शाम को ही क्यों…?अगर नेता अभिनेता इस हादसे का होते शिकार तो समय पर प्रारंभ होता एनडीआरएफ का बचाव कार्य। हे भगवान सभी को दे सद्बुद्धि…अरे इस हादसे से भी नहीं लिया सबक नहीं खुली आला अधिकारियों की नींद या जिम्मेदार नेताओं ने नहीं ली जानकारी तो आगे और भी इस प्रकार के हो सकते हैं हादसे फिर चाहे वह जर्जर मकान हो, कुएं के ऊपर बने हुए मंदिर,मस्जिद, दरगाह,गार्डन,मकान।धर्म के नाम पर नहीं होनी चाहिए अतिक्रमण तुरंत करना चाहिए नगर निगम को कार्यवाही।अतिक्रमण में बाधा नहीं बनना चाहिए धर्म, अतिक्रमण हुआ है तो निष्पक्ष होनी चाहिए कार्यवाही।नहीं होना चाहिए हादसे का इंतजार और जिम्मेदार अधिकारियों की खुली होनी चाहिए आंखें।बालेश्वर महादेव झूलेलाल मंदिर परिसर में हुए हादसे के बाद से सवालों की लगी हुई है झड़ी..?सवाल तो बहुत हैं और पूछे भी जाएंगे इस घटना का जिम्मेदार है कौन.?आखिर सही जिम्मेदार किसे बनाया जाए किसके ऊपर जिम्मेदारी की मटकी फोड़ी जाए क्योंकि जिम्मेदार अभी भी सो रहे थे और सो रहे हैं।चलिए अच्छा है हम बात करें उस पत्र की जिसमें लिखा हुआ था कि मंदिर द्वारा अतिक्रमण किया गया है अवैध रूप से कुएं के ऊपर निर्माण किया गया है । जिस पर नगर निगम द्वारा संज्ञान नहीं लेते हुए इतना बड़ा दुखद हादसा हो गया हर घर में मातम सा छा गया इस मातम की पूर्ति शायद राहत राशि ना कर पाए । क्यों कि एक इंसान की जीवन राहत राशि से बड़ी हैं।समय रहते अगर एनडीआरएफ की टीम को बुला लिया जाता तो कई जिंदगी हमारे बीच होती पर लापरवाही में भी हमारा इंदौर नंबर वन, जिसमें 36 मौतें हुई, कौन है इसका जिम्मेदार किसे बनाया जाएगा।भवन अधिकारियों ने भी एक आवेदन मिलने के बावजूद भी उस पर कार्यवाही नही की। जिससे इतना बड़ा हादसा हो गया तब जाकर कहीं आंखें खुली। वाह हमारे इंदौर के अधिकारी वाह आप तो लगे रहे इंदौर को नंबर वन लाने में 1,2,3,4,5,6 सातवीं वार के लिए भी तैयार!आपने तो कुएं बावड़ी तक को बेहतर और स्वच्छ कर दिया था या यूं कहें कि चमन कर दिया था, आपने हमारा इंदौर वाटर में भी नंबर वन था, हिंदी में कहें तो जल संरक्षण में भी नंबर वन बना था नदी नाले बावरियों को साफ किया गया था स्वच्छता की मिसाल पेश की गई थी लाखों करोड़ों रुपए खर्च किए गए फिर भी हमारे आला अधिकारी इस प्रकार के अतिक्रमण पर ध्यान नहीं दे पाए।सोते हुए अधिकारियों के बीच इतना बड़ा हादसा होने के बाद आंखें खुली और जांच के आदेश दिए गए ।चलिए एक हादसे ने आंखे तो खोली इन अधिकारियों की जिम्मेदारी की बात पर यहां यह भी देखा गया कि हमारे बीच इतने नेता होने के बावजूद भी चंद नेताओं ने भूमिका निभाई बाकी दरकिनार रहे या यूं कहें कि शक्ल तक नहीं दिखाई जनता में भी इसको लेकर काफी रोष देखने को मिला कई वीडियो भी वायरल हुए।रोचक तो तब हो गया जब एनडीआरएफ की टीम शाम को बुलाई गई इतनी देर में क्यों क्यों बुलाई गई।अगर इस हादसे में कोई अभिनेता या नेता गिर जाते तो एनडीआरएफ की टीम समय रहते पहुंच जाती, और राहत कार्य प्रारंभ कर देती। एक अखबार की कटिंग पड़ी, जिस पर हेडिंग लिखा हुआ था की विधायक आकाश भी हो सकते थे हादसे का शिकार,,,,लेकिन मिली जानकारी के अनुसार विधायक आकाश विजयवर्गीय रात्रि 12:10 बजे घटनास्थल पर पहुंचे ।फिर इस हेडिंग का क्या मतलब है आप सभी समझदार हैं।कार्यालय आयुक्त नगर पालिका निगम को इस बावड़ी के संदर्भ में आवेदन भी दिए गए थे, जिसको देखने के लिए भवन अधिकारियों के पास समय तक नहीं था अगर समय रहते आवेदनों पर गौर कर लेते तो आज इंदौर में इतना बड़ा हादसा नहीं होता जो हृदय को झकझोर कर रख दिया है जिसने भी देखा उसकी आंखें हुई नम।वही श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना ने भी 302 की कार्यवाही की मांग, जिम्मेदार अधिकारियों पर की है। इंदौर में हुए दुःखद हादसे, वर्षों तक रहेगा याद…दर्द को किस प्रकार से बयां किया जाए उसके लिए मेरी कलम निशब्द है।चलिए कुछ जान लेते हैं क्रमशः…..पहला लेटर रहवासी संघ का , कब्जे और अवैध निर्माण को रोकने के लिए सभी विभागो , जिम्मेदारों और नेताओं , सांसद और विधायक को दिया गया पर निराकरण…….?दूसरा लेटर ….नगर निगम इंदौर का अवैध निर्माण के नोटिस और अतिक्रमण हटाने का पत्र।तीसरा लेटर…मंदिर प्रशासन द्वारा अवैध कब्जे और अवैध निर्माण को सही ठहराने का और इसे हिंदू समाज की भावना के साथ गलत ढंग से जोड़कर कब्जा यथावत रखने का। जनता को धर्मांध बनाकर बेवकूफ बनाया.. साथ ही इस लेटर की भड़काऊ भाषा पढ़िए आपको सब समझ में आएगा…इसमें इनका सपोर्ट किया राजनीतिज्ञों ने, पार्षद ने यहां पर अपना ऑफिस बनाया। देख लीजिए धर्म के नाम पर अपनी रोटियां सेकते है, कब्जे सुरक्षित कर लेते हैं और आपकी जिंदगी से खेलते हैं जिम्मेदार अधिकारी राजनेता।शहर में ऐसे सैकड़ों मंदिर, दरगाह, मस्जिद, जो चौराहों, बगीचों और सरकारी जमीन को हड़प कर बैठे हैं। बावड़ी कांड में कई सवाल अनुत्तरित छोटे अधिकारियों को दोषी बताने से कमिश्नर एवं सांसद निर्दोष नहीं हो जाते इन्हें भी इस्तीफा देना चाहिए इस बात की भी जांच होना चाहिए की सार्वजनिक बगीचे को किसने और क्यों किसी निजी ट्रस्ट को सौंप दिया, जिसमें अवैध निर्माण के कारण यह हत्याकांड हुआ।इंदौर।लोहिया विचार मंच मध्य प्रदेश के अध्यक्ष रामबाबू अग्रवाल एवं सोशलिस्ट पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रामस्वरूप मंत्री ने पटेल नगर की बावड़ी कांड में मृत 36 व्यक्तियों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके परिजनों के साथ संवेदना व्यक्त की है। साथ ही रेस्क्यू में लापरवाही तथा सार्वजनिक बगीचे की जमीन को निजी ट्रस्ट को सौपे जाने तथा उन पर किए गए अवैध निर्माण की जांच की मांग की है। श्री अग्रवाल ने आज पीड़ित परिवारों से मुलाकात के बाद कहा कि इस हादसे को लेकर कई सवाल अनुत्तरित है। जिनका प्रदेश सरकार नगर निगम एवं स्थानीय प्रशासन को उत्तर देना चाहिए। आपने बताया कि इंदौर में अब तक की सबसे दर्दनाक हादसे के कारणों को लेकर पूरे शहर के नागरिकों और क्षेत्र के लोगों में भयंकर आक्रोश और गुस्सा है । यदि रेस्क्यू में देरी नहीं होती तथा संसाधन उपलब्ध कराए जाते तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी । सेना को जल्दी नहीं बुलाना, नगर निगम प्रशासन के अधिकारियों की लापरवाही एवं मुख्यमंत्री के साथ आए कुछ लोगों के परिवार के सदस्य से बात नहीं करने देना तथा डांटना, पीड़ितों के परिजनों के गुस्से का बड़ा कारण है ।आपने कहा कि छोटे अधिकारियों को इस घटना का शिकार बनाया गया है और उन्हें निलंबित किया गया है, जबकि नगर निगम के कमिश्नर सहित बड़े अधिकारियों को बचाया जा रहा है। यह भी चर्चा है कि सांसद शंकर लालवानी के हस्तक्षेप के कारण इस अवैध निर्माण की प्रशासन को मजबूरी में इजाजत देना पड़ी थी ।तो क्या नगर निगम कमिश्नर और सांसद शंकर लालवानी का इस्तीफा भी लिया जाएगा या प्रशासन केवल मजिस्ट्रियल जांच के नाम पर लीपापोती करेगा । नेता द्वय ने पूरी घटना की न्यायिक जांच की मांग करते हुए सभी मृतकों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपया मुआवजा दिए जाने की मांग भी की है । Share this:Tweet Email a link to a 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