बागपत, उत्तर प्रदेश। विवेक जैन। बागपत के प्रमुख चिकित्सकों में शुमार सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बागपत के चिकित्सा अधीक्षक डा विभाष राजपूत विश्व कैंसर दिवस पर विभिन्न माध्यमों से लोगों को कैंसर के प्रति जागरूक कर रहे है। उन्होंने बताया कि विश्व कैंसर दिवस हर वर्ष 4 फरवरी को मनाया जाता है। इसको मनाने के पीछे यह उद्देश्य है कि लोग कैंसर के प्रति जागरूक हो। कैंसर जैसी बीमारी की समय से पहचान हो और इसका उपचार हो। बताया कि सही जानकारी ना होने के कारण अधिकांश लोग कैंसर की अन्तिम स्टेज तक पहुॅंच जाते है उस समय कैंसर से लड़ाई में चिकित्सकों को काफी संघर्ष करना पड़ता है। बताया कि अगर कैंसर का शुरूआत में पता चल जाये तो इसका 100 प्रतिशत ईलाज संभव है और इस बीमारी से आसानी से जंग जीती जा सकती है। बताया कि मानव शरीर अनगिनत कोशिकाओं से बना हुआ है। इन कोशिकाओं में निरन्तर विभाजन होता रहता है। यह एक सामान्य प्रक्रिया होती है और इस प्रक्रिया पर शरीर का पूरा नियंत्रण होता है। बताया कि कभी-कभी शरीर के विशेष अंग की कोशिकाओं का नियंत्रण बिगड़ जाता है व कोशिकाएं बेहिसाब तरीके से बढ़ने लगती है और एक प्रकार की गांठ उभरने लगती है। कोशिकाओं के बेहिसाब तरीके से बढ़ने को कैंसर कहा जाता है। कहा कि इसका उपचार सही समय पर न किया जाए तो यह पूरे शरीर में फैल जाता है। बताया कि शोधकर्ता मानते है कि कैंसर 200 से भी अधिक तरह का होता है। कुछ कैसर बहुत तेजी से लोगों को अपना शिकार बना रहे है जिसमें ब्लड़ कैंसर, फेफड़ो का कैंसर, ब्रेन कैंसर, स्तन कैंसर, स्किन कैंसर आदि प्रमुख है। बताया कि वर्तमान में कैंसर के ईलाज में कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी, सर्जरी व औषधियों के साथ-साथ अनेकों प्रकार की नवीन तकनीक मौजूद है जिनसे कैंसर का सफलतापूर्वक ईलाज किया जा रहा है। कहा कि किसी भी बीमारी को हल्के में ना ले और शरीर में हो रहे किसी भी असामान्य परिवर्तन का आभास होने पर अपने नजदीकी चिकित्सकों से परामर्श ले। बीमारियों के लक्ष्णों से स्वयं भी जागरूक हो और अपने सम्पर्क में आने वाले लोगों को भी जागरूक करें। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन “अडानी इज इंडिया” के दावे पर इतना सन्नाटा क्यूँ है भाई? किसान सभा का प्रशिक्षण शिविर संपन्न : होगा ‘हर गांव में किसान सभा, किसान सभा में हर किसान’ के नारे पर अमल।