महज 4 हजार रुपये में बैंक खाता, सिम और बैंकिंग किट दूसरे व्यक्ति को सौंपी, खाताधारक सहित दो पर एफआईआर दर्ज इंदौर। साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान ‘ऑपरेशन मैट्रिक्स-2’ के तहत इंदौर क्राइम ब्रांच ने अंतरराज्यीय साइबर ठगी में इस्तेमाल किए जा रहे एक म्यूल बैंक खाते का खुलासा किया है। जांच में सामने आया कि बैंक ऑफ महाराष्ट्र के एक खाते का उपयोग देश के पांच राज्यों में दर्ज साइबर धोखाधड़ी की शिकायतों से जुड़ा हुआ है। मामले में पुलिस ने खाताधारक आनंद चौरसिया और खाते के वास्तविक संचालक विशाल शेखावत के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है। चार हजार रुपये के लालच में सौंप दिया बैंक खाता क्राइम ब्रांच से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुलिस आयुक्त नगरीय इंदौर के निर्देशन एवं पुलिस उपायुक्त अपराध के मार्गदर्शन में साइबर अपराधों में इस्तेमाल होने वाले म्यूल बैंक खातों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में राज्य साइबर पुलिस मुख्यालय से 25 अगस्त 2026 को प्राप्त पत्र तथा गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C), राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) और साइबर क्राइम पोर्टल से मिले इनपुट के आधार पर बैंक ऑफ महाराष्ट्र के एक संदिग्ध खाते की जांच शुरू की गई। जांच में खाते का धारक आनंद चौरसिया निवासी नंदा नगर, इंदौर पाया गया। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आनंद ने बताया कि उसने विशाल शेखावत के कहने पर बैंक खाता खुलवाया था। खाते में रजिस्टर्ड करने के लिए सिम कार्ड भी विशाल ने ही उपलब्ध कराया था। इसके बाद आनंद ने महज चार हजार रुपये लेकर बैंक खाते की रजिस्टर्ड सिम, बैंकिंग किट और खाते के संचालन का अधिकार विशाल शेखावत को सौंप दिया था। पुलिस जांच में सामने आया कि बैंक खाते का वास्तविक उपयोग और संचालन विशाल शेखावत द्वारा किया जा रहा था। तमिलनाडु से तेलंगाना तक साइबर ठगी की शिकायतें क्राइम ब्रांच द्वारा साइबर क्राइम पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी की जांच करने पर संबंधित म्यूल खाते के खिलाफ देश के पांच राज्यों में साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें दर्ज होने की जानकारी सामने आई। इनमें तमिलनाडु के मदुरै सिटी स्थित के. पुदुर थाना, दिल्ली के साउथ साइबर पुलिस स्टेशन, गुजरात के सुरेंद्रनगर स्थित वाधवान थाना, महाराष्ट्र के मुंबई स्थित नेहरू नगर थाना और तेलंगाना के हैदराबाद स्थित बोराबांडा थाना क्षेत्र से संबंधित शिकायतें शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, इन शिकायतों से संकेत मिले हैं कि संबंधित बैंक खाते का इस्तेमाल विभिन्न राज्यों में साइबर धोखाधड़ी से जुड़े वित्तीय लेन-देन में किया गया था। अब पुलिस इन शिकायतों और बैंक खाते में हुए संदिग्ध लेन-देन की विस्तृत जांच कर रही है। दो आरोपियों के खिलाफ एफआईआर, नेटवर्क की तलाश तेज जांच में खाताधारक आनंद चौरसिया और वास्तविक संचालक विशाल शेखावत की भूमिका प्रथम दृष्टया संदिग्ध पाए जाने पर क्राइम ब्रांच इंदौर ने अपराध क्रमांक 0179/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) और 3(5) में प्रकरण दर्ज किया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि संबंधित बैंक खाते के माध्यम से कितनी राशि का लेन-देन हुआ और साइबर ठगी से प्राप्त रकम किन-किन खातों में स्थानांतरित की गई। साथ ही इस नेटवर्क में शामिल अन्य व्यक्तियों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। म्यूल बैंक खातों के जरिए साइबर ठगी का खेल साइबर अपराधों में म्यूल बैंक खाते ऐसे खातों को कहा जाता है, जिनका इस्तेमाल अपराध से प्राप्त रकम को जमा करने, स्थानांतरित करने या आगे दूसरे खातों में भेजने के लिए किया जाता है। कई मामलों में साइबर अपराधी पैसों का लालच देकर दूसरे व्यक्तियों के बैंक खाते, एटीएम कार्ड, सिम और बैंकिंग किट अपने नियंत्रण में ले लेते हैं। इंदौर क्राइम ब्रांच के अनुसार, ऑपरेशन मैट्रिक्स-2 के तहत ऐसे संदिग्ध खातों की पहचान कर उनके खाताधारकों और वास्तविक संचालकों की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि साइबर अपराध नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों के खिलाफ भी साक्ष्यों के आधार पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। News National World | इंदौर Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन इंदौर क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाई, 1.40 लाख की ब्राउन शुगर के साथ शातिर आरोपी गिरफ्तार नशे के सौदागरों पर नारकोटिक्स विंग का बड़ा प्रहार, 66 लाख के मादक पदार्थ जब्त, पांच आरोपी गिरफ्तार