GeM पोर्टल पर नगरीय निकायों की खरीदी में सामने आया कीमतों का बड़ा अंतर, अधिकारियों की बैठक का वीडियो चर्चा में भोपाल। प्रदीप चौधरी। मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार के कार्यकाल में नगरीय निकायों द्वारा सरकारी खरीद को लेकर वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो और अधिकारियों की बैठक में दिए गए प्रस्तुतीकरण के आधार पर विभिन्न निकायों में समान वस्तुओं की अलग-अलग कीमतों पर खरीद का मामला चर्चा में है। इस मामले में नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे की नाराजगी और खरीद प्रक्रिया की समीक्षा को लेकर उठाए गए सवाल भी सुर्खियों में हैं। समान वस्तुओं की कीमतों में भारी अंतर सामने आई जानकारी के अनुसार, सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल के माध्यम से की गई खरीद के विश्लेषण में कई वस्तुओं की कीमतों में बड़ा अंतर पाया गया। उदाहरण के तौर पर एलईडी लाइट की कीमत कहीं 306 रुपये तो कहीं 11,800 रुपये तक बताई गई है। इसके अलावा कचरा गाड़ियों, डंपरों, फिनाइल और अन्य सामग्रियों की खरीद दरों में भी अंतर होने की बात सामने आई है। हालांकि, इन कीमतों की तुलना करते समय उत्पाद की गुणवत्ता, तकनीकी विशेषताओं, क्षमता, वारंटी और अन्य शर्तों की जांच आवश्यक है, ताकि वास्तविक मूल्य अंतर का सही आकलन किया जा सके। ₹1,134 करोड़ की खरीद का विश्लेषण प्रस्तुतीकरण से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, लगभग 1,134 करोड़ रुपये की कुल खरीद के विश्लेषण में करीब 250 करोड़ रुपये की संभावित बचत का अनुमान जताया गया। इस आंकड़े ने सरकारी खरीद प्रक्रिया, मूल्य निर्धारण और निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, इस राशि को प्रमाणित वित्तीय घोटाला या सरकारी नुकसान मानने से पहले आधिकारिक जांच और विस्तृत निष्कर्ष सामने आना जरूरी है। MPSEDC ने पेश किया खरीद का विश्लेषण बैठक में मध्य प्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम (MPSEDC) के एडिशनल एमडी अंशुमान राज ने खरीद संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण प्रस्तुत किया। बताया गया कि विभिन्न नगरीय निकायों में समान या तुलनीय वस्तुओं की खरीद दरों में अंतर का आकलन किया गया। वीडियो में अपर मुख्य सचिव संजय दुबे अधिकारियों से खरीद प्रक्रिया में सामने आए अंतर को लेकर सवाल करते दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवाल इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर सरकार की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्षी कांग्रेस सहित सरकार के आलोचक इस मुद्दे को सरकारी खरीद में पारदर्शिता से जोड़कर उठा रहे हैं। वायरल पोस्ट में पिछले वर्ष कार्रवाई के लिए समय नहीं मिलने और इस वर्ष कार्रवाई किए जाने की बात भी कही गई है। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार और संबंधित विभाग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं। खरीद संबंधी आंकड़ों की स्वतंत्र जांच, जिम्मेदारी तय करने और आवश्यक सुधारों पर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही यह तय हो सकेगा कि सामने आया मूल्य अंतर प्रक्रियागत खामियों, खरीद संबंधी लापरवाही या किसी अन्य अनियमितता का परिणाम था। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन महाकालेश्वर मंदिर में NSG कमांडो की मॉक ड्रिल, 150 जवानों ने लिया हिस्सा चीन की बढ़ती ताकत और भारतीय सेना के आधुनिकीकरण पर बहस, मोदी सरकार पर कांग्रेस के गंभीर आरोप