37 करोड़ रुपए के डिजिटल लेनदेन में कमी का दावा, राजबाड़ा पर 2 हजार से अधिक QR कोड-साउंड बॉक्स जमा कर जताया विरोधइंदौर। प्रदीप चौधरी। शहर में 23 सितंबर को आयोजित ‘नो यूपीआई डे’ व्यापारियों के लिए केवल एक दिन डिजिटल भुगतान से दूरी बनाने का कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि प्रस्तावित मर्चेंट शुल्क को लेकर व्यापारी समाज की सामूहिक चिंता का प्रदर्शन बन गया। व्यापारी संगठनों के अनुसार, इस दौरान सामान्य दिनों की तुलना में इंदौर में करीब 37 करोड़ रुपए के डिजिटल लेनदेन में कमी दर्ज हुई। हालांकि, इस आंकड़े की अधिकृत पुष्टि अभी अपेक्षित है।नो यूपीआई डे के दौरान शहर के कई प्रमुख बाजारों में व्यापारियों ने ग्राहकों से नकद भुगतान करने की अपील की। इस अभियान का सबसे बड़ा प्रतीकात्मक प्रदर्शन राजबाड़ा पर देखने को मिला, जहां दो हजार से अधिक यूपीआई बारकोड बॉक्स और स्कैनर एकत्र किए गए। व्यापारियों ने QR कोड और साउंड बॉक्स को काले कपड़े से ढंककर प्रस्तावित मर्चेंट शुल्क के प्रति अपनी आपत्ति दर्ज कराई।व्यापारियों का कहना है कि उनका विरोध यूपीआई या डिजिटल भुगतान व्यवस्था के खिलाफ नहीं है। वे डिजिटल भुगतान की सुविधा को स्वीकार करते हैं, लेकिन प्रस्तावित अतिरिक्त शुल्क से कारोबार की लागत बढ़ने और छोटे मार्जिन वाले व्यापारियों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंतित हैं।विरोध के दौरान कुछ ग्राहकों को नकद उपलब्ध नहीं होने के कारण खरीदारी पूरी किए बिना लौटना पड़ा। व्यापारियों के लिए भी ग्राहक को वापस भेजना आसान नहीं था, लेकिन कई कारोबारियों ने अपने मुद्दे को प्राथमिकता देते हुए अभियान में भागीदारी की।राजबाड़ा पर रखे गए हजारों QR कोड बॉक्स और शहर के बाजारों में नकद भुगतान की अपील की तस्वीरें सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में भी चर्चा का विषय बनीं। व्यापारियों के अनुसार, यह किसी एक बाजार या संगठन का मुद्दा नहीं, बल्कि डिजिटल भुगतान से जुड़े संभावित शुल्क को लेकर व्यापक कारोबारी चिंता का प्रदर्शन था।अब व्यापारियों की नजर सरकार और संबंधित नीति-निर्माताओं के साथ होने वाले संवाद पर है। व्यापारिक संगठनों की मांग है कि छोटे कारोबार, कम मार्जिन वाले व्यवसाय और ग्राहकों के व्यवहार पर प्रस्तावित शुल्क के संभावित प्रभाव को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाए।‘नो यूपीआई डे’ के जरिए व्यापारियों ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लेकर सुविधा और लागत, दोनों पहलुओं पर संवाद जरूरी है। आगे इस मुद्दे का समाधान सरकार, डिजिटल भुगतान क्षेत्र और व्यापारी संगठनों के बीच बातचीत तथा तथ्यों के आधार पर तय होने की उम्मीद है। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन राहुल गांधी की चिट्ठी पर मंत्री विश्वास सारंग का पलटवार भंवरकुआं में मारपीट के आरोपियों का पुलिस ने निकाला जुलूस