घोंचुओं की, घोंचुओं द्वारा बनाई गई, घोंचू सरकार : विष्णु नागर

क्या नरेन्द्र मोदी मेरे प्रधानमंत्री हैं? पिछले बुधवार की दोपहर तक तकनीकी रूप से वे थे, मगर उस दिन शाम को पता चला कि मैं और आप भारतीय नागरिक नहीं हैं, तो वे मेरे और आपके प्रधानमंत्री भी नहीं रहे! इसी तरह अमित शाह भी हमारे गृहमंत्री नहीं रहे! जिस दिल्ली में रहता हूं, वहां की मुख्यमंत्री भी मेरी मुख्यमंत्री नहीं रहीं। इनमें से किसी ने अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया है और मर जाएंगे तो भी त्यागपत्र नहीं देंगे, लेकिन हमारे और उनके बीच अब कोई संबंध नहीं रहा, क्योंकि आप और मैं यह किसी भी तरह साबित नहीं कर सकते कि हम भारतीय नागरिक हैं। अगर हम भारतीय नागरिक नहीं हैं, तो ये हमारे प्रधानमंत्री भी नहीं हैं! अमित शाह हमारे गृहमंत्री भी नहीं हैं। कोई मंत्री, कोई मुख्यमंत्री मेरे लिए कुछ नहीं है। वैसे भी ये मेरे लिए कागज का  टुकड़ा थे, और क्या थे! अब वे भी नहीं रहे!

मैंने तो नरेन्द्र मोदी और उनकी पार्टी को कभी वोट नहीं देने की गलती नहीं की और करूंगा भी नहीं। मगर जिन्होंने उन्हें वोट दिया, उन्हें प्रधानमंत्री बनाने में मदद की, उनकी पार्टी को लोकसभा में 240 सीटें दिलाईं, इनकी डबल और ट्रिपल इंजन सरकारें बनवाईं, वे भी आज यह सिद्ध नहीं कर सकते कि वे भारतीय नागरिक हैं। ऐसा एक भी दस्तावेज किसी भारतीय के पास नहीं है, जिसे दिखाकर वह कह सके कि मैं भारतीय नागरिक हूं। हर दस्तावेज चीख-चीखकर कह रहा है कि भारत के 140 करोड़ लोगों तुम भारत में भले ही रहते हो, जनगणना में तुम्हारी गिनती भी होने वाली है, मगर तुम भारतीय नागरिक नहीं हो!

बुधवार की शाम को विदेश मंत्रालय ने हम सबका भारतीय नागरिक होने का रहा-सहा भ्रम भी मिटा दिया। उसने साफ़ कह दिया कि भारतीय पासपोर्ट किसी के भारतीय नागरिक होने का प्रमाण नहीं, वह यात्रा में काम आने वाला महज़ एक दस्तावेज है। इसके आधार पर कोई बंदा अपने को भारतीय नागरिक मानने की गलती नहीं कर सकता। उस पर यह लिखा होगा कि इस पासपोर्टधारी की राष्ट्रीयता भारतीय है, मगर उससे कोई अंतर नहीं पड़ता। वह भारतीय नागरिक नहीं है।जब तक उसकी खैर से है, ठीक है, जिस दिन चाहा, कान पकड़कर उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा!

हम किसी भी दस्तावेज से अपने को भारतीय नागरिक साबित नहीं कर सकते। जब हम संदिग्ध हैं, तो नरेन्द्र मोदी का हमारा प्रधानमंत्री होना भी संदिग्ध है! अभी तक तो हम इस मुगालते में जी रहे थे कि हम यहां जन्मे हैं, पले हैं, पढ़े-लिखे हैं, यहां की धूप, हवा, पानी का असर हमारे  खून और नसों में है, तो हम भारतीय हैं और भारतीय हैं, तो भारतीय नागरिक भी हैं। मगर भारतीय होना और भारतीय नागरिक होना दो अलग बातें बना दी गई हैं। विदेश मंत्रालय ने साफ़ कह दिया है कि पासपोर्टधारियों, तुम किसी गलतफहमी में मत रहो, पासपोर्ट कुछ भी कहता हो, तुम भारतीय नागरिक नहीं हो। तुम और कुछ भी हो सकते हो, भारतीय नागरिक नहीं। तुममें और चींटी में कोई बुनियादी फर्क नहीं है। वह भारत में रहती है, मगर भारत की नागरिक नहीं है, तुम भी भारत में रहते हो, भारत के नागरिक नहीं हो! चींटी कहना बुरा लगे, तो तुम अपने को गाय, भैंस, बैल आदि मान सकते हो। हाथी,शेर या ऊंट भी मान सकते हो। चाहो तो तोता, चिड़िया, मोर मान लो। जिस तरह वे भारतीय नागरिक नहीं, तुम‌ भी नहीं!

पासपोर्ट तो केवल विदेश यात्रा की सुविधा के लिए दिया है, भारतीय नागरिक साबित करने के लिए नहीं। विदेश में तुम भारतीय नागरिक हों, अपने देश में नहीं! तुम हिंदुस्तान के किसी भी बड़े से बड़े पद पर बैठ सकते हो, तो भी तुम भारतीय नागरिक नहीं। मोदी हो, तो भी भारतीय नागरिक नहीं!

पहले कहा गया था कि किसी के पास आधार कार्ड है, इसका यह मतलब नहीं कि वह भारतीय नागरिक है, जबकि आधार कार्ड को कभी इससे और कभी उससे लिंक करवाने के लिए हरेक को हैरान किया गया। वोटर कार्ड को भी भारतीय नागरिक होने का प्रमाण नहीं माना जाता। पैन कार्ड, राशन कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल प्रमाणपत्र, निवास प्रमाणपत्र कुछ भी मेरे या आपके नागरिक होने का प्रमाण नहीं। ये सब दस्तावेज लेकर आज भी पश्चिम बंगाल आदि के लोग इधर-उधर धक्के खा रहे हैं, मगर अपनी नागरिकता साबित नहीं कर पा रहे हैं। हम सब लोग दस्तावेजों के हिसाब से इस देश के नागरिक नहीं हैं। जिस दिन ये या कोई सरकार चाहे तो हमें सीमा पार ठेल सकती है,जो आज भी हो रहा है। लोगों को बांग्लादेश में ठेला जा रहा है और बांग्लादेश उन्हें भगा रहा है।इधर ये उन्हें वापस आने नहीं देते। फिर या तो नो मेन्स लैंड में मर जाओ या जेल जैसे होल्डिंग सेंटर में खप जाओ।

इसका मतलब मेरे पास जो भी दस्तावेज हैं, सब फालतू हैं। वास्तव में हम एक सौ चालीस करोड़ लोगों में से कोई भी इस देश का वैध नागरिक नहीं है। अगर ढेर सारे दस्तावेजों के बावजूद मैं अपने को भारतीय नागरिक साबित नहीं कर सकता, तो नरेन्द्र मोदी पास भी तो वही दस्तावेज हैं, बल्कि उनके पास कुछ जाली  डिग्रियां भी हैं, तो वे भी इस तर्क से भारतीय नागरिक नहीं हैं। फिर वे किस तर्क से हमारे प्रधानमंत्री हैं? पहले वे अपनी नागरिकता साबित करें, जब तक नहीं करते, वे प्रधानमंत्री नहीं हैं!

जब इस देश का कोई भी वासी भारतीय नागरिक नहीं है, तो फिर वे किसके प्रधानमंत्री हैं? कौन हैं वे भाग्यशाली जिनके पास भारतीय नागरिक होने का प्रमाणपत्र है, जिनके वे प्रधानमंत्री हैं? चंद होंगे ऐसे गैर-मुस्लिम जो आसपास के देशों से यहां शरण लेने आए होंगे और उन्हें नागरिकता दे दी गई होगी। उन्हें भारतीय नागरिक होने का प्रमाण पत्र दिया गया होगा। तो मोदी जी उन चंद भारतीयों के  प्रधानमंत्री हैं, बल्कि उनके भी नहीं हैं, क्योंकि मोदी जी के पास भारतीय नागरिक होने का कोई प्रमाण नहीं। हम भी अधर में हैं, मोदी जी और उनकी सरकार भी अधर में है। सब आकाश में लटके हुए गुब्बारे हैं, कब हमारी हवा निकल जाए और हम नीचे टपक जाएं, कोई नहीं जानता। जो जानता है, वो भी हो सकता है, हमारे साथ नीचे टपका पड़ा हो!

दरअसल यह घोंचुओं की घोंचुओं द्वारा बनाई गई,घोंचू सरकार है। दुनिया में क्या कोई ऐसा देश है, कोई ऐसी सरकार है, जो अपने मुल्क के  लोगों को अपना नागरिक नहीं मानती? खुद सरकार द्वारा जारी दस्तावेजों को भी नागरिकता का सबूत नहीं मानती? यही एक विश्व की अनोखी घोंचू सरकार है। ये आपको नागरिक तो क्या, कुछ भी नहीं मानती। ईश्वर की दया है कि सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस साहब ने हमें काक्रोच होने का सम्मान दिया है!

और हां, जो पासपोर्ट मेरी और आपकी नागरिकता का सबूत नहीं है, उसे बनवाने की फीस अब 1500 से बढ़कर 2500 हो चुकी है। मन हो रहा है कि अपने को और आपको भी इसकी बधाई देता चलूं!

(कई पुरस्कारों से सम्मानित विष्णु नागर साहित्यकार और स्वतंत्र पत्रकार हैं। जनवादी लेखक संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं।)

2. राम की चिड़िया, राम का खेत, खाओ री चिड़िया, भर-भर पेट! : राजेंद्र शर्मा

आखिर ये कौन लोग हैं, जो मंदिर में चंदा चोरी, चंदा चोरी का इतना शोर मचा रहे हैं। किसी ऐसे-वैसे मंदिर में नहीं, अयोध्या के रामलला के मंदिर में चंदा चोरी का शोर मचा रहे हैं। रामलला के उसी मंदिर में चंदा चोरी का शोर मचा रहे हैं, जो ठीक उसी जगह बनाया गया है, जहां सैकड़ों साल तक एक मस्जिद खड़ी रही थी — बाबरी मस्जिद। वैसे मस्जिद नाम की ही बाबरी थी, वर्ना थी तो छोटी-सी ही मस्जिद। जबकि मोदी जी ने मंदिर भव्य बनवाया है ; इतनी लंबी-चौड़ी जमीन में कि उसमें मस्जिद की जमीन नहीं भी जुड़ती, तब भी भव्यता की कोई कमी नहीं पड़ती। पर मस्जिद से जमीन खाली करा के उसे घेर कर मंदिर बनाने से मंदिर की भव्यता में जो चार चांद और लगे हैं, वो कहां लग पाते! और मंदिर वाले एक्स्ट्रा चार चांद चाहे लोग उतने मिस नहीं भी करते, पर मोदी जी की  दिव्यता में जो चार चांद लगे हैं, उनके बिना मोदी जी कैसे रह पाते।

मोदी जी ने चुने हुए प्रधानमंत्री के रूप में अपने राज की लंबाई के मामले में नेहरू जी को तो अब हराया है, पर बाबर को तो उन्होंने बहुत पहले ही हरा दिया था। कहां बाबर की छोटी-सी, मामूली-सी मस्जिद और वह भी गैर-कानूनी और कहां मोदी जी वाला भव्य मंदिर!

हमें मालूम है कि मोदी जी वाला मंदिर कहते ही, भाई लोग इसका मुकद्दमा लेकर बैठ जाएंगे कि मंदिर तो रामलला का है, मोदी जी वाला मंदिर कैसे कह सकते हैं? मंदिर अगर रामलला का है, तो मस्जिद में कौन-सी बाबर के नाम की नमाज पढ़ी जाती थी। फिर भी मस्जिद जब तक गिरायी नहीं गयी, कहलाती तो बाबरी मस्जिद ही थी। जब मस्जिद का नाम बादशाह के नाम पर हो सकता है, तो मंदिर का नाम पीएम के नाम पर क्यों नहीं हो सकता है?

मुसलमान बादशाह, बादशाह और हिंदू मोदी-शाह क्या… दरबारी! खैर, मंदिर भले ही रामलला का ही कहलाए, इससे तो कोई इंकार नहीं कर सकता है कि मंदिर बनवाया तो मोदी जी ने ही है। मस्जिद वाली जमीन दी चाहे अदालत ने, पर उससे दिलायी तो मोदी जी ने ही। मंदिर बनवाने के लिए ट्रस्ट बनाया मोदी जी ने। शिला पूजन से लेकर, अधूरे मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा से लेकर, करीब-करीब पूरे मंदिर में ध्वजारोहण तक, हरेक जिम्मा उठाया मोदी जी ने। और तो और रामलला को उंगली पकडक़र उनके घर वापस लेकर आए मोदी जी। फिर भी मोदी मंदिर कहने में हिचक — यहीं तो हिंदू मात खा गए।

खैर! चंदा चोरी पर लौटें। सबसे पहली बात तो यह कि क्या किसी मंदिर के सिलसिले में, ‘‘चंदा चोरी’’ की संज्ञा का प्रयोग किया जा सकता है? बेशक, चोरी शब्द के प्रयोग की भी अपनी समस्याएं हैं, पर ‘‘चंदा’’ शब्द का उपयोग तो एकदम ही अनुपयुक्त है। चंदा शब्द का प्रयोग वास्तव में धर्म के मामलों में राजनीति की भोंडी घुसपैठ का सबूत है। चंदा वह होता है, जो राजनीतिक पार्टियां जमा करती हैं और पब्लिक, राजनीतिक पार्टियों को देती है। वैसे मोदी जी की पार्टी ने जब से चुनावी बांड का सिस्टम चालू किया था, तब से पुराने टाइप का पब्लिक वाला चंदा तो करीब-करीब आउट आफ फैशन ही हो चुका है। बाद में चुनावी बांड का सिस्टम तो नहीं रहा, पर पुराना फैशन भी लौटकर नहीं आया। हां, उगाही के नये-नये सिस्टम जरूर निकाल आये। आवश्यकता को आविष्कार की जननी यूं ही थोड़े ही कहा गया है।

खैर! मंदिर के चढ़ावे में जो दिव्यता होती है, चंदे की पार्थिवता से उसकी क्या तुलना? वैसे भी चंदा देने वाला, सिर्फ देता नहीं है, बदले में कुछ चाहता भी है। जितना बड़ा चंदा, उतनी ही बड़ी मांग। चोरी हो या डकैती, मंदिर के चढ़ावे को मोदी जी के विरोध के चक्कर में ऐसे लेन-देन के साथ एक ही पलड़े पर तोलना तो भक्त और भगवान, दोनों का अपमान है।

रही बात चोरी की, तो जैसी खबरें आ रही हैं, उन्हें देखते हुए लगता नहीं है कि इसे चोरी का मामला कहा जा सकता है। पहले खबर आई कि 6-7 करोड़ रुपये का घपला हुआ। फिर खबर आई कि भाई लोगों ने रामलला के चढ़ावे में से 12-13 करोड़ रुपये उड़ा लिए। फिर खबर आयी कि मामला 200 करोड़ रुपये तक जा सकता है। फिर 4,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा आ गया। यानी चोरी बढ़ती ही गयी, ज्यों-ज्यों रौशनी डाली खबर देने वालों ने। गोबर में नोटों की गड्डियां मिलने लगीं। साइकिल पर चलने वालों की बड़ी-बड़ी एसयूवियां दौड़ने लगीं। कच्चे-पक्के घरों में रहने वालों की कोठियां खड़ी होने लगीं, हॉस्टल चलने लगे।

फिर पता चला कि मंदिर बनने से पहले, मंदिर के लिए जमीनों की खरीद में करोड़ों के वारे-न्यारे हुए थे। फिर खबर आई कि मंदिर की पहली ईंट रखे जाने से पहले से, मंदिर के नाम पर चंदे में सैकड़ों करोड़ के वारे न्यारे हुए। फिर बताया जाने लगा कि ‘मंदिर वहीं बनाएंगे’ के नारे के जमाने से चंदे की लूट चल रही थी। इस सब को चोरी कहना, क्या इतने अलग-अलग प्रयोग करने वालों के उद्यम का निरादर ही नहीं होगा।

वैसे भी मंदिर की भव्यता के साथ, चोरी की बात मैच नहीं करती है। डकैती नहीं भी सही, कम से कम लूट तो इसे कहना ही चाहिए। आखिरकार, मोदी जी और रामलला, दोनों की प्रतिष्ठा का सवाल है!

और आखिर में एक बार फिर वही सवाल कि ये लोग हैं, कौन जो चोरी, डकैती वगैरह का शोर मचा रहे हैं? क्या ये रामलला के बुलावे पर, उनके नये घर का जब मोदी जी ने उद्घाटन किया था, तब मोदी जी के दर्शन करने गए थे? क्या इन्होंने कभी अयोध्या के मंदिर में चढ़ावा चढ़ाया था? क्या इन्होंने कभी मंदिर वहीं बनाएंगे का नारा लगाया था? क्या ये अपने हिंदू होने का प्रमाण दे सकते हैं? मंदिर में चोरी हो तो, फिर और डकैती हो तो, मोदी जी के विरोधी किस मुंह से इसकी शिकायत कर रहे हैं? मंदिर रामलला का। बनवाने वाले मोदी जी। रखवाली करने वाले योगी जी। चंपत जी, मिश्रा जी, सब ट्रस्टी, मोदी जी के। नोट गिनने वाले, गिनवाने वाले, सभी रामलला, मोदी जी और योगी जी के भक्त। यानी चोरी कहो तो, डकैती कहो तो और कमीशन काटना कहो तो, मामला पूरी तरह से परिवार के अंदर का है? राम-भक्तों का चढ़ावा, राम-भक्तों ने उड़ाया, इसमें जब खुद रामलला कोई रोक-टोक नहीं कर रहे हैं, तो दूसरे कौन होते हैं टांग अड़ाने वाले।

रामलला ही नहीं, मोदी जी भी इसी सिद्धांत पर चलते हैं। मोदी जी ने न खाऊंगा और न खाने दूंगा तो कहा था, पर न खिलाऊंगा, तो कभी नहीं कहा। फिर मोदी जी के मंदिर के ट्रस्टियों ने खिलाया, तो विरोधियों के पेट में क्यों मरोड़ उठ रही है। राम की चिड़िया, राम का खेत, खाओ री चिड़िया, भर-भर पेट! 

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और ‘लोकलहर’ के संपादक हैं।)

NEWS NATIONAL WORLD समाचार राष्ट्रीय दुनिया's avatar

By NEWS NATIONAL WORLD समाचार राष्ट्रीय दुनिया

NEWS NATIONAL WORLD (NNW NEWS) / NNW TV NEWS NATIONAL WORLD (NNW NEWS) is a trusted digital media group and online Hindi news portal providing the latest breaking news and updates from India and around the world. Our coverage includes Politics, Crime, Public Issues, Sports, Entertainment, Bollywood, Business, Lifestyle, Art & Culture, Tourism, Social Affairs, and more. Our mission is to deliver accurate, reliable, and impactful journalism while keeping our audience informed about important developments at local, national, and international levels. "NEWS NATIONAL WORLD – Trusted Digital Media for Accurate News & Meaningful Stories." -- Management & Editorial Team -- Managing Director (MD) Ankul Pratap Singh Baghel Mobile: +91 85168 70370 // Editor Gaurav Jain (Indore) Mobile: +91 98276 74717 // Associate Editor Aamir Khan Mobile: +91 90099 11100 // Divisional Bureau Chief (Indore) Pradeep Chaudhary Mobile: +91 94250 52518 // Rewa Editor Kushmendra Singh Mobile: +91 94247 01399 // Join NEWS NATIONAL WORLD Share local news, public issues, social activities, events, sports updates, and important information from your area with us. For News Coverage, Advertising & Business Inquiries: Mobile: +91 85168 70370 Email: allindiamedia12340@gmail.com Follow and join the NEWS NATIONAL WORLD (PVT. LTD.) WhatsApp Channel for fast, reliable, and authentic news updates. NNW TV | NNW NEWS

Leave a Reply

You missed

Discover more from NNWORLD

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading

Discover more from NNWORLD

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading