गले में स्थित छोटी-सी ग्रंथि बिगाड़ सकती है पूरे शरीर का संतुलन, समय पर जांच और उपचार है जरूरीस्वास्थ्य डेस्क। थायरॉइड आज के समय में तेजी से बढ़ने वाली आम स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। गले के सामने वाले हिस्से में स्थित तितली के आकार की थायरॉइड ग्रंथि शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करती है। जब यह ग्रंथि सामान्य से कम या अधिक मात्रा में हार्मोन बनाने लगती है, तो शरीर की कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं प्रभावित होने लगती हैं।विशेषज्ञों के अनुसार थायरॉइड ग्रंथि एंडोक्राइन सिस्टम का हिस्सा है, जो शरीर में हार्मोन का निर्माण और नियंत्रण करती है। थायरॉइड हार्मोन शरीर की ऊर्जा, तापमान, पाचन क्रिया, हृदय गति और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाते हैं।थायरॉइड के प्रमुख लक्षणथायरॉइड की समस्या होने पर व्यक्ति को लगातार थकान, वजन में अचानक बदलाव, कब्ज या दस्त, नींद की समस्या, बाल झड़ना, अत्यधिक ठंड या गर्मी लगना, चिंता, अवसाद, हाथ-पैरों में दर्द, उच्च रक्तचाप और महिलाओं में मासिक धर्म की अनियमितता जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा गले में सूजन और आवाज में बदलाव भी इसके संकेत हो सकते हैं।दो प्रकार का होता है थायरॉइडथायरॉइड मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है। हाइपर थायरॉइड में शरीर में थायरॉइड हार्मोन अधिक मात्रा में बनने लगते हैं, जिससे वजन तेजी से कम होने लगता है, दिल की धड़कन बढ़ जाती है और अत्यधिक पसीना आता है।वहीं, हाइपो थायरॉइड में हार्मोन का स्तर कम हो जाता है, जिससे वजन बढ़ना, कब्ज, सुस्ती, अवसाद, शरीर में सूजन और थकान जैसी समस्याएं होने लगती हैं।क्या हैं इसके कारणविशेषज्ञों के अनुसार शरीर में आयोडीन की कमी, आनुवंशिक कारण, तनाव, हार्मोनल बदलाव, कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव, रेडिएशन थेरेपी और असंतुलित खानपान थायरॉइड की प्रमुख वजहें हो सकती हैं। महिलाओं में मेनोपॉज के दौरान भी इसका खतरा बढ़ जाता है।कैसे करें बचावस्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त आयोडीन युक्त भोजन, तनाव से बचाव और समय-समय पर चिकित्सकीय जांच थायरॉइड की समस्या से बचने में मदद कर सकते हैं। थायरॉइड की पुष्टि के लिए टी3, टी4 और टीएसएच जांच कराई जाती है।विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि थायरॉइड के लक्षण दिखाई देने पर स्वयं इलाज करने के बजाय डॉक्टर से परामर्श लेकर उचित जांच और उपचार कराना चाहिए। समय पर पहचान और इलाज से इस बीमारी को प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन आल इंडिया PMJA मीट–2026 के आयोजन पर मंथन, दिसंबर में आयोजन का प्रस्ताव स्वस्थ यकृत मिशन में उत्कृष्ट कार्य पर बालाघाट जिला राज्य स्तर पर सम्मानित