इंदौर। सामाजिक चिंतक डॉ. जेम्स पाल। शहरों में लगातार बढ़ते ट्रैफिक जाम, दुर्घटनाओं और जनदबाव के बीच फुटओवर ब्रिज (एफओबी), अंडरपास और अन्य यातायात सुविधाओं के निर्माण की योजनाएं तेज हो रही हैं। हालांकि, इस स्थिति को लेकर शहरी नियोजन और प्रशासनिक दूरदर्शिता पर भी सवाल उठने लगे हैं।सामाजिक चिंतक डॉ. जेम्स पाल ने कहा है कि आज जिस खतरनाक ट्रैफिक जाम और बढ़ते जनदबाव से निपटने के लिए प्रशासन विभिन्न अधोसंरचनात्मक परियोजनाओं पर काम कर रहा है, उसके लिए यह भी विचार किया जाना चाहिए कि 10 से 15 वर्ष पूर्व शहर नियोजन से जुड़े जिम्मेदार अधिकारी, नगर नियोजक और जनप्रतिनिधि भविष्य की आवश्यकताओं को लेकर कितने तैयार थे।उन्होंने कहा कि शहरों की बढ़ती आबादी, वाहनों की संख्या और यातायात का दबाव कोई अचानक उत्पन्न हुई स्थिति नहीं है। यदि समय रहते दूरदर्शी शहरी नियोजन किया गया होता, तो फुटओवर ब्रिज, अंडरपास, सड़क चौड़ीकरण, पार्किंग व्यवस्था और बेहतर सार्वजनिक परिवहन जैसी सुविधाएं पहले ही विकसित की जा सकती थीं।डॉ. पाल का कहना है कि अधिकांश योजनाएं समस्या उत्पन्न होने के बाद बनाई जाती हैं, जबकि सुशासन का मूल सिद्धांत संभावित संकट का पूर्वानुमान लगाकर पहले से तैयारी करना है। उन्होंने प्रश्न उठाया कि यदि मास्टर प्लानिंग का उद्देश्य भविष्य की आवश्यकताओं का आकलन करना है, तो समय पर आवश्यक अधोसंरचना विकसित क्यों नहीं हो पाती।उन्होंने कहा कि शहरों का विकास केवल वर्तमान जरूरतों को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि आने वाले 10 से 20 वर्षों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। अन्यथा, जनता को बार-बार ट्रैफिक जाम, दुर्घटनाओं और अव्यवस्था का सामना करना पड़ता रहेगा।डॉ. पाल ने भविष्य के लिए योजनाबद्ध, जवाबदेह और दूरदर्शी शहरी विकास की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि शहरी विकास परियोजनाओं में जवाबदेही सुनिश्चित की जाए, ताकि आने वाले वर्षों में नागरिकों को बेहतर यातायात और बुनियादी सुविधाएं मिल सकें। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन क्या बढ़ती सरकारी फीस से जनता पर बढ़ रहा है आर्थिक बोझ? सेफ क्लिक-2.0 अभियान के तहत स्कूलों और चौराहों पर साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित