इंदौर। सामाजिक चिंतक डॉ. जेम्स पाल ।। पासपोर्ट, प्रतियोगी परीक्षाओं, ड्राइविंग लाइसेंस और विभिन्न सरकारी सेवाओं की फीस में लगातार हो रही वृद्धि को लेकर आम नागरिकों के बीच चर्चा तेज हो गई है। कई लोगों का मानना है कि बढ़ती फीस का सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ रहा है, जबकि सेवाओं और सुविधाओं में उसी अनुपात में सुधार दिखाई नहीं देता।हाल ही में पासपोर्ट शुल्क में बढ़ोतरी के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है। पहले 36 पेज का सामान्य पासपोर्ट 1,500 रुपये में बनता था, जबकि अब इसके लिए 2,500 रुपये तक भुगतान करना होगा। इसी प्रकार तत्काल पासपोर्ट की फीस भी बढ़कर 5,000 रुपये तक पहुंच गई है।शिक्षा क्षेत्र में भी अभ्यर्थियों को CTET, TET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रत्येक बार लगभग 1,000 रुपये या उससे अधिक शुल्क जमा करना पड़ता है। अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा शुल्क का भुगतान करने के बावजूद रोजगार की कोई निश्चित गारंटी नहीं होती।इसी प्रकार ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन पंजीकरण, नवीनीकरण और विभिन्न सरकारी प्रमाणपत्रों एवं लाइसेंसों के लिए भी नागरिकों को निर्धारित शुल्क का भुगतान करना पड़ता है।सामाजिक चिंतक डॉ. जेम्स पाल का कहना है कि जनता शुल्क देने का विरोध नहीं करती, लेकिन जब शुल्क लगातार बढ़ते जाएं और सेवाओं, रोजगार अथवा सुविधाओं में अपेक्षित सुधार दिखाई न दे, तो सवाल उठना स्वाभाविक है। उनका कहना है कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि बढ़ी हुई फीस के बदले आम नागरिकों को कौन-कौन सी अतिरिक्त सुविधाएं प्राप्त होंगी।डॉ. पाल ने कहा कि यदि शुल्क में लगातार वृद्धि होती रहे और उसका प्रत्यक्ष लाभ लोगों को न दिखाई दे, तो आमजन के बीच यह धारणा बन सकती है कि यह केवल राजस्व बढ़ाने का माध्यम बन गया है। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन सेफ क्लिक 2.0″ अभियान के तहत जनेह पुलिस द्वारा म.प्र.ग्रामीण बैंक जनेह और चंद्रपुर में चलाया गया साइबर सुरक्षा जन जागरूकता अभियान बढ़ते ट्रैफिक संकट पर उठे सवाल, शहरी नियोजन की दूरदर्शिता पर चर्चा