इंदौर। सामाजिक कार्यकर्ता एवं जनहित विषयों पर सक्रिय चिंतक डॉ. जेम्स पाल ने महंगाई पर चल रही बहस का दायरा बढ़ाने की जरूरत बताते हुए कहा है कि आज आम नागरिक पर सबसे बड़ा आर्थिक दबाव केवल पेट्रोल, डीज़ल और गैस की कीमतों से नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास जैसी बुनियादी जरूरतों की बढ़ती लागत से पड़ रहा है।डॉ. पाल ने कहा कि देश के करोड़ों मध्यम वर्गीय परिवार अपनी आय का बड़ा हिस्सा बच्चों की शिक्षा, निजी स्कूलों की फीस, कोचिंग, स्वास्थ्य सेवाओं और मकान की ईएमआई पर खर्च कर रहे हैं। उनका मानना है कि शिक्षा का बढ़ता व्यावसायीकरण सामाजिक असमानता को बढ़ा रहा है और सरकारी शिक्षा व्यवस्था मजबूत होने पर निजी संस्थानों पर निर्भरता कम हो सकती है।स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर उन्होंने कहा कि गंभीर बीमारी के बाद कई परिवार आर्थिक रूप से टूट जाते हैं। निजी अस्पतालों, जांचों और दवाइयों की बढ़ती लागत आम लोगों के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है। उन्होंने माना कि अधिकांश डॉक्टर और अस्पताल ईमानदारी से सेवा देते हैं, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और शुल्क नियंत्रण पर गंभीर चर्चा जरूरी है।आवास और रियल एस्टेट क्षेत्र पर बोलते हुए डॉ. पाल ने कहा कि घर खरीदना अब कई परिवारों के लिए 20 से 30 वर्षों की ईएमआई का बोझ बन गया है। उन्होंने कहा कि जमीन और फ्लैट की कीमतों के निर्धारण में पारदर्शिता पर भी बहस होनी चाहिए।उन्होंने कहा कि महंगाई केवल सरकारी नीतियों का परिणाम नहीं है, बल्कि बाजार, निजी संस्थान, सेवा प्रदाता और उपभोक्ता व्यवहार भी इसके लिए जिम्मेदार हैं। डॉ. पाल ने निजी स्कूलों, अस्पतालों, कोचिंग संस्थानों और रियल एस्टेट समूहों से सामाजिक जिम्मेदारी के तहत शुल्क संरचना की समीक्षा करने की अपील की।उन्होंने कहा कि देशभक्ति केवल नारों से नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाने से साबित होती है जिसमें आम नागरिक सम्मानपूर्वक जीवन जी सके। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन आपराधिक मामलों को ‘सिविल विवाद’ मानकर खारिज करने की प्रवृत्ति पर उठे सवाल और अब कॉरपोरेट जिहाद : आखिर नफरत की आग कब बुझेगी?