दमा यानी अस्थमा एक गंभीर श्वास संबंधी रोग है, जिसमें फेफड़ों की श्वास नलिकाओं की छोटी-छोटी पेशियों में संकुचन और अकड़न पैदा हो जाती है। इससे मरीज को सांस लेने में परेशानी होती है और पूरी हवा अंदर खींच पाना मुश्किल हो जाता है। रोग बढ़ने पर सांस फूलना, सीने में जकड़न और खांसी जैसी समस्याएं सामने आती हैं।आयुर्वेद में दमा के लिए कई पारंपरिक औषधियों और उपचारों का उल्लेख मिलता है, जिनका सही चिकित्सकीय सलाह के साथ उपयोग लाभकारी माना जाता है।आयुर्वेदिक उपाय:चन्द्रिका भस्म को शहद और पीपल चूर्ण के साथ सेवन करने से दमा में राहत मिलती है।समीर पन्नग रस को मिश्री या अदरक रस के साथ देने से श्वास नलिकाओं में जमा कफ बाहर निकलता है और सांस लेने में आराम मिलता है।अश्वकंचुकी रस शहद और वासा स्वरस के साथ लेने से दमा के लक्षणों में लाभ बताया गया है।श्रृंगराभ्र रस अदरक रस और शहद के साथ लेने से खांसी और सांस की तकलीफ में आराम मिलता है।श्वास कुठार रस को पिपल चूर्ण और शहद के साथ देने से श्वास रोग और हृदय संबंधी सांस की समस्या में फायदा होता है।श्वास कास चिंतामणि रस बहेड़े की मिंगी और शहद के साथ सेवन करने से फेफड़ों को मजबूती मिलती है और दमा में राहत मिलती है।विशेषज्ञों के अनुसार दमा के मरीजों को धूल, धुआं, ठंडी चीजों और प्रदूषण से बचना चाहिए। किसी भी आयुर्वेदिक औषधि का सेवन चिकित्सक की सलाह के बाद ही करें। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन CBSE 12वीं बोर्ड परीक्षा परिणाम जारी, 85.20 प्रतिशत छात्र सफल मप्र TET विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बिना पात्रता परीक्षा शिक्षक नियुक्ति नहीं