स्वास्थ्य डेस्क।Shisham Tree के पत्तों का आयुर्वेद में विशेष महत्व माना गया है। आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार शीशम के पत्तों में सूजनरोधी, एंटीऑक्सीडेंट और एंटीसेप्टिक गुण पाए जाते हैं, जो त्वचा रोग, दर्द, सूजन और पेट संबंधी समस्याओं में लाभकारी माने जाते हैं।विशेषज्ञ बताते हैं कि शीशम के पत्तों का उपयोग खुजली, एक्जिमा, फोड़े-फुंसी और अन्य चर्म रोगों में किया जाता है। पत्तों का पेस्ट प्रभावित स्थान पर लगाने से राहत मिल सकती है। इसके अलावा पत्तों का काढ़ा जोड़ों के दर्द और शरीर की सूजन को कम करने में सहायक माना जाता है।आयुर्वेद में शीशम के पत्तों को पेट की जलन और अपच दूर करने में भी उपयोगी बताया गया है। वहीं इसके रस का उपयोग घाव भरने और संक्रमण रोकने के लिए किया जाता है। कुछ आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार यह एनीमिया और मूत्र संबंधी समस्याओं में भी सहायक हो सकता है।उपयोग के प्रमुख तरीके:ताजी पत्तियों का लेप बनाकर त्वचा पर लगाया जा सकता है।पत्तों का काढ़ा सीमित मात्रा में सेवन किया जाता है।पत्तियों का रस सूजन या चर्म रोग वाली जगह पर लगाया जा सकता है।शीशम के तेल का उपयोग मालिश और दर्द से राहत के लिए किया जाता है।सावधानी भी जरूरीआयुर्वेदिक जानकारों के अनुसार शीशम के पत्तों की तासीर ठंडी होती है। अधिक सर्दी या कफ प्रवृत्ति वाले लोगों को इसका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को इसका उपयोग करने से पहले चिकित्सक या आयुर्वेद विशेषज्ञ से सलाह लेने की सलाह दी जाती है।विशेषज्ञों ने कहा कि किसी भी घरेलू या आयुर्वेदिक उपाय को अपनाने से पहले योग्य वैद्य या डॉक्टर की राय लेना जरूरी है। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन देशभर में बदला मौसम का मिजाज, चारधाम यात्रा पर भी मंडराया संकट भोपाल में होगा इंडो-फ्रेंच इन्वेस्टमेंट कॉन्क्लेव, फ्रांस की बड़ी कंपनियां लेंगी हिस्सा