बर्बाद होने की कगार पर पहुंची फसले,उत्पादन में 30 से 40% की कमी।

खाद के लिए रात्रि 9 बजे से लाडली बहने एवं किसान लगाते है लाइन।

सरकार के वादे कागजों तक सीमित, अधिकारियों में अफ़सरशाही हॉबी।

जवा रीवा।  प्रदेश से लेकर सभी जिलो में खाद की किल्लत मची हुई है। इसके बावजूद भाजपा सरकार के मंत्री, सांसद और विधायक हर मंच से विकास की गाथा गाते रहते है जबकि धरातल में कुछ भी नही है जो भी योजनाएं और सरकार के वादे है वो कागजों तक मे सीमित है और किसान खाद के लिए भटक रहा है.

बता दे कि धान की फसल में रोपाई के बाद यूरिया खाद डालना अतिआवश्यक है लेकिन किसानों को खाद नहीं मिलने से खेतों में लगी फसलें मुरझाने लगी और धान ग्रोथ नही कर रही हैं। यह समस्या किसी एक तहसील की नहीं बल्कि पूरे प्रदेश और सभी जिलों सहित देश भर में देखने को मिल रही है। लेकिन सरकार को किसानों की समस्या से कोई लेना देना नही है।

किसानों का आरोप है कि सरकार पर्याप्त यूरिया उपलब्ध कराने की बड़ी-बड़ी बातें तो करती है परन्तु जमीनी स्तर पर हालात कुछ और ही हैं। जिसके लिए किसान समृद्धि केंद्रों सहित समितियो का महीनों से चक्कर काट रहे है फिर भी उन्हें यूरिया खाद नहीं मिल पा रही है।

    इसी कड़ी में रीवा जिले के जवा तहसील अंतर्गत किसान समृद्धि केंद्र जवा ममेड़ी में हजारों की संख्या में लाडली बहनों सहित किसानों की भीड़ प्रतिदिन देखने को मिल रही है जो रात्रि 9 बजे से खाद के लिए किसान समृद्धि केंद्र में बैठ जाते है इसके बाबजूद किसानों को खाद नही मिल पा रही है।

कई किसानों का आरोप है हम लोग रात्रि 9 बजे से किसान समृद्धि केंद्र जवा ममेड़ी में बैठे थे रजिस्टर में सभी का नाम लिखा गया कि इसी रजिस्टर नाम के अनुसार खाद दी जाएगी लेकिन सुवह 9 बजे दबंग लोग और खाद वितरण करने वाले के परिचित आये और सभी लाइन लगाकर खड़े हो गए कि अब लाइन से खाद मिलेगी जो रजिस्टर में नाम लिखा है उसके आधार पर खाद नही मिलेगी।
जिसमे पुलिस भी उन्ही का साथ दे रही है और पुलिस भी अपने परिचित लोगो को खाद दिलवा रही है यहा पर सिस्टम से खाद नही मिल रही है।

किसानों का आरोप है कि यही सामने घर का पुष्पराज पटेल जो चौकीदार का काम करता है लेकिन पूरे केंद्र का सर्वेसर्वा है पूरा खेल उसी के द्वारा खेला जाता है और उसी के इशारे पर खाद दी जाती है। आरोप है कि जान पहचान वालो की लिस्ट अंदर भेज दी जाती है और उन्ही की पर्ची काटी जाती है।

इस संबंध में जब चाकघाट, जवा और सिरमौर प्रभारी अवनेश मिश्रा को फोन लगाया जाता है तो उनके द्वारा फोन नही उठाया जाता है न ही कभी समृद्धि केंद्र में आते है बल्कि उनके द्वारा अपने परिचितों की पर्ची कटवा कर भेज दिया जाता है और पुष्पराज पटेल पूरे खेल का अंजाम देता है।

वही किसानों ने जवा पुलिस के कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाए है कि उनके द्वारा निष्पक्षता से कार्य नही किया जाता है।

किसानों ने सरकार आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार किसान मजदूर को लेकर संवेदनशील नही है अधिकारी खाद की कालाबाजारी कराते है प्राइवेट दुकानदारों के यहा दो तीन गुना कीमत पर पर्याप्त खाद मिल रही है तो उनके पास खाद कहाँ से आ रही है। कुछ किसानों का कहना है 266 की खाद ज्यादा कीमत में दी जा रही है इस पर भी कोई कुछ बोलने को तैयार नही है।

उत्पादन में कमी-
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते धान में खाद नहीं डाली गई तो 30 से 40% तक उत्पादन प्रभावित हो सकता है इससे न केवल किसानों को नुकसान होगा बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गहरा संकट छा जाएगा। आगे चलकर देश में अनाज की किल्लत और महंगाई भी बढ़ सकती है।

kushmendra's avatar

By kushmendra

Journlist- NNW News(News National World)

Leave a Reply

You missed

Discover more from NNWORLD

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading

Discover more from NNWORLD

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading