दिल्ली ।। दिल्ली की अदालत ने 35 वर्षीय सीरियल किलर रविंद्र कुमार को 2014 के एक मामले में दोषी ठहराया है, जिसमें उसने ढाई साल की मासूम बच्ची का अपहरण, बलात्कार और हत्या की थी। अभियोजन पक्ष ने पुख्ता सबूत पेश किए, जबकि रविंद्र की सफाई को अदालत ने खारिज कर दिया। अब 28 अगस्त 2025 को उसे सजा सुनाई जाएगी। खौफनाक अपराधों का कबूलनामापुलिस जांच में रविंद्र ने स्वीकार किया कि उसने 2008 से 2015 के बीच 30 से अधिक बच्चियों को निशाना बनाया, जिनमें 2 से 12 साल की मासूम बच्चियां शामिल थीं। उसने बच्चों का अपहरण, बलात्कार और हत्या की, और कई मामलों में शवों के साथ भी अपनी हवस मिटाई। उसका कबूलनामा, “मुझे उसमें मजा आता था,” सुनकर पुलिस भी सन्न रह गई। कैसे बना हैवान?उत्तर प्रदेश के कासगंज से ताल्लुक रखने वाला रविंद्र एक मजदूर परिवार से था। 2008 में दिल्ली आने के बाद नशे और पोर्न फिल्मों की लत ने उसे दरिंदे में बदल दिया। उसने पहली बार 19 साल की उम्र में अपराध किया। वह शाम को नशे में धुत होकर बच्चियों को टॉफी या पैसे का लालच देकर सुनसान जगहों पर ले जाता और अपनी हैवानियत को अंजाम देता। पुलिस और अदालत की कार्रवाई2014 में पहली गिरफ्तारी के बाद सबूतों की कमी से रविंद्र रिहा हो गया, लेकिन 2015 में रोहिणी में 6 साल की बच्ची के अपहरण और हत्या के मामले में उसे फिर पकड़ा गया। इस बार ठोस सबूतों और मजबूत चार्जशीट के आधार पर मई 2023 में उसे आजीवन कारावास की सजा मिली। 2014 के एक अन्य मामले में 23 अगस्त 2025 को अदालत ने उसे दोषी ठहराया, जिसमें पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने सिर पर चोट, दांतों के निशान और दम घुटने से मौत की पुष्टि की। अदालत ने इसे “अमानवीय और निर्मम” अपराध करार देते हुए कहा कि समाज और कानून में ऐसी दरिंदगी के लिए कोई नरमी नहीं हो सकती। सामाजिक चेतावनीरविंद्र कुमार की यह कहानी सिर्फ एक अपराधी की नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी है। उसकी हैवानियत ने दिल्ली की गलियों को खून से रंग दिया और इंसानियत को शर्मसार किया। रविंद्र कुमार केस के मुख्य प्वाइंट: सीरियल किलर की पहचान: रविंद्र कुमार, 35 वर्षीय, उत्तर प्रदेश के कासगंज का रहने वाला, जिसने 2008 से 2015 तक 30 मासूम बच्चियों (2-12 साल) को अपहरण, बलात्कार और हत्या का शिकार बनाया। खौफनाक कबूलनामा: रविंद्र ने पुलिस पूछताछ में स्वीकार किया कि उसने बच्चियों को मारने के बाद उनकी लाशों के साथ भी बलात्कार किया। उसने कहा, “मुझे उसमें मजा आता था।” अपराध का तरीका: नशे (शराब/ड्रग्स) और पोर्न की लत में डूबा रविंद्र बच्चियों को टॉफी/पैसे का लालच देकर सुनसान जगहों पर ले जाता और दरिंदगी करता। पुलिस और अदालत: 2014 में पहली गिरफ्तारी, लेकिन सबूतों की कमी से रिहा। 2015 में रोहिणी, दिल्ली से 6 साल की बच्ची के अपहरण-हत्या केस में गिरफ्तार। 23 अगस्त 2025 को 2014 के एक अन्य केस में दोषी ठहराया गया; 28 अगस्त 2025 को सजा सुनाई जाएगी। अदालत का फैसला: पोस्टमॉर्टम में सिर पर चोट, दांतों के निशान और दम घुटने से मौत की पुष्टि। अदालत ने अपराध को “अमानवीय और निर्मम” करार दिया। सामाजिक पृष्ठभूमि: मजदूर परिवार से ताल्लुक, 2008 में दिल्ली आया, नशे और पोर्न की लत ने उसे हैवान बनाया। सजा का इतिहास: मई 2023 में एक केस में आजीवन कारावास की सजा मिली। सामाजिक प्रभाव: इस मामले ने दिल्ली में सुरक्षा और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन मनीषा केस: भिवानी में शिक्षिका की हत्या पर नवीनतम अपडेट्स यादव समाज संस्कार समिति, मीनाक्षी सेवा समिति इ़ंदौर संयुक्त आव्हान पर स्कूली बच्चों ने बनाए मिट्टी के गणेशजी