खबर से पहले कुछ महत्व आलेख…. अमित सिंह परिहार की कलम से….. मेरी भावना मध्यप्रदेश के हरदा में करणी सेना के कार्यकर्ताओं पर पुलिस द्वारा की गई बर्बरता ने पूरे राजपूत समाज को झकझोर कर रख दिया है। लोकतंत्र में जहां हर नागरिक को अपने विचार और विरोध प्रकट करने का अधिकार है, वहीं पुलिस का इस तरह अमानवीय व्यवहार न केवल निंदनीय है बल्कि कानून और संविधान की भावना के भी खिलाफ है। View this post on Instagram करणी सेना हमेशा से राजपूत समाज की अस्मिता, गौरव और संस्कृति की रक्षा के लिए संघर्ष करती रही है। चाहे फिल्मों में हमारे इतिहास के साथ छेड़छाड़ का मुद्दा हो, या समाज के सम्मान से जुड़ा कोई सवाल, करणी सेना ने कभी पीछे हटना नहीं सीखा। हरदा में भी कार्यकर्ता अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे थे। लेकिन जिस तरह पुलिस ने लाठियों से पीटकर, उन्हें घसीटकर और अपमानित करके आवाज दबाने की कोशिश की, उसने राजपूत समाज के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाई है। यह घटना केवल करणी सेना पर हमला नहीं, बल्कि पूरे राजपूत समाज की अस्मिता पर हमला है। आज जरूरत है कि सभी राजपूत एक मंच पर आकर इस अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करें। यह समय आपसी भेदभाव और छोटी-छोटी बातों को भुलाकर एकजुटता दिखाने का है। जब-जब समाज पर संकट आया है, तब-तब राजपूतों ने अपनी वीरता और एकता से हर चुनौती का सामना किया है।हमारे पूर्वजों ने सदियों तक अपने प्राणों की आहुति देकर संस्कृति और सम्मान की रक्षा की है। आज जब हमारे समाज के लोग ही अपने अधिकारों के लिए सड़क पर उतर रहे हैं, और उन पर अत्याचार हो रहा है, तब हमारा मौन रहना हमारे पूर्वजों के बलिदान का अपमान होगा। View this post on Instagram हरदा की घटना के विरोध में पूरे देश के राजपूतों को संगठित होकर लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से आवाज उठानी चाहिए। सरकार और प्रशासन को यह संदेश देना होगा कि राजपूत समाज अन्याय सहन नहीं करेगा। यह लड़ाई केवल करणी सेना की नहीं, बल्कि हर राजपूत की है। अब समय है कि हम सब मिलकर एक बार फिर साबित करें कि जब बात सम्मान की हो, तो राजपूत समाज एक दीवार बनकर खड़ा हो जाता है। View this post on Instagram अमित सिंह परिहारपत्रकार इन्दौर📱8319252181 हरदा—जिले मे करणी सेना परिवार संगठन के प्रमुख जीवन सिंह शेरपुर को रिहा किया,साथ में 3 अन्य कृष्णा,अजय और राहुल सिंह को भी रिहा किया,पुलिस ने गुपचुप तरीके से सशर्त की रिहाई,जिले की सीमा से तत्काल बाहर जाने,किसी भी प्रकार से प्रदेश में कहीं भी प्रदर्शन नहीं करने की शर्त पर रिहाई,लगभग 8 बजे के आसपास गुपचुप तरीके से की रिहाई,समर्थक इकट्ठे नहीं हो इसलिए पुलिस ने जिले से बाहर किया View this post on Instagram पुलिस से न्याय की उम्मीद क्या गलत है, क्या पुलिस से न्याय मांगने वालों के साथ इस तरह से अत्याचार करने का अधिकार हैं…. प्रदर्शन करना अपने हक के लिए तो संविधान अधिकार देता है…. जो कि आज की घटना में उन अधिकारों को छीनने की कोशिश की गई. राजपूत समाज में पुलिस प्रशासन , शासन के प्रति रोष जताया…. प्रदेश के मुख्यमंत्री से न्याय की उम्मीद… https://www.instagram.com/reel/DMDc6lAhubn/?igsh=b2d2OHZuM3Vwd3Fw https://www.instagram.com/reel/DMCt–XsPn8/?igsh=cmV0bTJkbWZjcGky View this post on Instagram https://www.instagram.com/reel/DMCvFuYtVZB/?igsh=d3JjNXd1Z3ByZ3g= पूरा मामला:मध्य प्रदेश के हरदा में 13 जुलाई 2025 को राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीवन सिंह शेरपुर और उनके समर्थकों के साथ पुलिस की हिंसक झड़प की खबरें सामने आईं। यह विवाद करणी सेना के प्रदर्शन से शुरू हुआ, जो एक धोखाधड़ी के मामले को लेकर था। करणी सेना के पदाधिकारी आशीष राजपूत ने विकास लोधी, मोहित वर्मा, और उमेश तपानिया पर 18 लाख रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया था। इस मामले में न्याय की मांग को लेकर करणी सेना और राजपूत समाज ने हरदा में प्रदर्शन किया। पुलिस ने प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठाए, जिसमें लाठीचार्ज, आंसू गैस, और वाटर कैनन का उपयोग किया गया। सोशल मीडिया पोस्ट्स के अनुसार, पुलिस ने जीवन सिंह शेरपुर को घसीटकर गिरफ्तार किया और राजपूत छात्रावास में घुसकर महिलाओं और छात्रों पर भी लाठीचार्ज किया। कुछ अपुष्ट खबरों में दावा किया गया कि थाने में कार्यकर्ताओं को “मुर्गा” बनाया गया। यह कार्रवाई दो दिनों में तीन बार दोहराई गई, जिससे तनाव और बढ़ गया। मध्य प्रदेश के अन्य शहरों में भी इस घटना के विरोध में करणी सेना ने प्रदर्शन किए। पुलिस की आलोचना और निंदा: कांग्रेस नेता जीतू पटवारी: उन्होंने सोशल मीडिया पर पुलिस की कार्रवाई को “बर्बर” और “निंदनीय” करार दिया। उन्होंने कहा, “मोहन सरकार में न्याय और अधिकार की बात करना अपराध बन गया है!” साथ ही, कलेक्टर और एसपी की बर्खास्तगी की मांग की। सोशल मीडिया पर निंदा: कई एक्स पोस्ट्स में पुलिस की कार्रवाई को “कायरतापूर्ण” और “असंवैधानिक” बताया गया। @Rajputs_Unity ने इसे “राजपूत स्वाभिमान पर हमला” करार देते हुए सरकार को चेतावनी दी कि “जनआक्रोश ज्वालामुखी बनकर फटेगा।” @prakashgoudssm ने छात्रावास में लाठीचार्ज को असंवैधानिक ठहराया। सामाजिक संगठनों का रुख: करणी सेना और राजपूत समाज ने पुलिस की कार्रवाई को अत्याचार और दमन का प्रतीक बताया। @Suryabh46130735 ने कहा कि पुलिस करणी सैनिकों की आवाज दबाने के लिए लाठियां और आंसू गैस का सहारा ले रही है। हरदा पुलिस की कार्रवाई को लेकर राजपूत समाज और करणी सेना में भारी आक्रोश है। पुलिस के बल प्रयोग को व्यापक रूप से निंदनीय माना जा रहा है, और इसे लोकतांत्रिक अधिकार- का हनन. View this post on Instagram Harda Police Controversy: Brutal Action on Jeewan Singh Sherpur and Karni Sena Full Case Details:On July 13, 2025, in Harda, Madhya Pradesh, a violent clash occurred between the police and Rajput Karni Sena’s national president, Jeewan Singh Sherpur, along with his supporters. The controversy erupted during a Karni Sena protest over a fraud case. Karni Sena official Ashish Rajput had filed a case against Vikas Lodhi, Mohit Verma, and Umesh Tapania, accusing them of defrauding Rs 18 lakh. The Rajput community and Karni Sena staged a protest in Harda demanding justice in this matter. The police responded with stringent measures to control the demonstration, including lathi-charge, tear gas, and water cannons. According to social media posts, Jeewan Singh Sherpur was dragged and arrested, and police allegedly entered a Rajput hostel, attacking women and students with batons. Unverified reports claim that activists were humiliated in the police station by being forced to “act like roosters.” This crackdown reportedly occurred three times over two days, escalating tensions. Protests by Karni Sena also spread to other cities in Madhya Pradesh in response to the incident. Criticism and Condemnation of Police: Congress Leader Jitu Patwari: He condemned the police action as “barbaric” and “deplorable” on social media, stating, “In Mohan Yadav’s government, demanding justice and rights has become a crime!” He demanded the dismissal of the Harda Collector and SP. Social Media Outrage: Several X posts labeled the police action as “cowardly” and “unconstitutional.” @Rajputs_Unity called it an “attack on Rajput pride” and warned that “public anger will erupt like a volcano.” @prakashgoudssm criticized the lathi-charge in the hostel as unconstitutional. Social Organizations: Karni Sena and the Rajput community condemned the police action as oppressive and tyrannical. @Suryabh46130735 stated that the police were using batons and tear gas to suppress the voice of Karni Sena activists. The Harda police’s actions have sparked widespread outrage among the Rajput community and Karni Sena. The use of force has been broadly condemned as an attack on democratic rights, fueling further protests and demands for accountability. View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन तमिलनाडु ब्रेकिंग: तिरुवल्लूर रेलवे स्टेशन के पास डीजल से लदी मालगाड़ी में भीषण आग, धुएं का गुबार और लपटों से हड़कंप नंद बाग में वाइन शॉप पर महिलाओं का धावा, रहवासियों ने की तोड़फोड़,पत्रकार पर हमला और धमकी