ताजा अपडेट मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर भाजपा नेता मनोहर लाल धाकड़ का एक महिला के साथ आपत्तिजनक वीडियो वायरल होने के बाद विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। 13 मई 2025 की रात को रिकॉर्ड हुए इस वीडियो में धाकड़ एक महिला के साथ अश्लील हरकत करते नजर आए, जो हाईवे के सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गया। पुलिस ने 23 मई को भानपुरा थाने में धाकड़ और एक अन्य व्यक्ति (महिला) के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296 (सार्वजनिक स्थान पर अश्लीलता), 285 (जान-माल को खतरे में डालना), और 3(5) (सामूहिक अपराध) के तहत मामला दर्ज किया। 25 मई को धाकड़ को गिरफ्तार किया गया, लेकिन मात्र एक दिन बाद, 26 मई 2025 को तहसीलदार कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी, क्योंकि लगाई गई धाराएं जमानती थीं। जमानत के बाद धाकड़ ने दावा किया कि वीडियो फर्जी है और उन्हें बदनाम करने की साजिश रची गई। उन्होंने कहा कि उनकी कार पहले ही बिक चुकी थी और वह वीडियो में नहीं थे। कानून व्यवस्था पर सवाल..? “क्या कानून व्यवस्था है, नेता जी चौबीस घंटों में बाहर जेल के और आम जनता सालों बिना गुनाहों के काट देती….!” और “कानून ने भी बताया कि अमीरों के लिए कानून नहीं, गरीबों के लिए है….” धाकड़ को 24 घंटे के भीतर जमानत मिलना और जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज होना इस बात को रेखांकित करता है कि प्रभावशाली लोगों के लिए कानूनी प्रक्रिया अक्सर हल्की रहती है। BNS धारा 296 के तहत अधिकतम तीन महीने की सजा या 1000 रुपये जुर्माना, और धारा 285 व 3(5) के तहत भी हल्के दंड का प्रावधान है, जिसके चलते धाकड़ को तुरंत जमानत मिल गई। वहीं, वीडियो लीक करने वाले कर्मचारियों पर IT Act की धारा 67 के तहत सात साल की सजा का प्रावधान होने की बात सामने आई है, जो सामान्य नागरिकों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की ओर इशारा करता है। इस दोहरे मापदंड ने सोशल मीडिया पर व्यापक नाराजगी पैदा की है, जहां लोग कानून व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। एक X एक्स पोस्ट में लिखा गया, “कैसे रुकेगा अपराध..?” यह दर्शाता है कि लोग प्रभावशाली लोगों के लिए नरम और आम जनता के लिए सख्त कानून के रवैये से निराश हैं। View this post on Instagram View this post on Instagram ब्लैकमेलिंग का खुलासा सवाल उठता है कि यह पर नेता जी नहीं थे तो ब्लैकमेल क्यू किए जा रहे थे..? पैसे क्यू दिए जब वह नहीं थे, वीडियो AI जेनरेटेड था तो…? बड़ा सवाल .. पाठक कमेंट बॉक्स में अपना जवाब दे सकते हैं. मामले में एक नया मोड़ तब आया जब धाकड़ ने पुलिस को बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की अनुबंधित कंपनी MKC इंफ्रास्ट्रक्चर के कुछ कर्मचारियों ने वीडियो वायरल न करने के बदले एक लाख रुपये की मांग की थी। धाकड़ के मुताबिक, उन्होंने 20,000 रुपये दे दिए, लेकिन बाकी राशि न देने पर वीडियो लीक कर दिया गया। इसके बाद NHAI ने 13 मई की रात ड्यूटी पर तैनात तीन कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया। पुलिस अब इन कर्मचारियों के खिलाफ भी जांच कर रही है, और उनके खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 67 के तहत कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें सात साल तक की सजा हो सकती है। महिला की पहचान और तलाश पुलिस ने दावा किया है कि वीडियो में दिख रही महिला की पहचान हो चुकी है और वह धाकड़ की पुरानी प्रेमिका है। भानपुरा थाना प्रभारी आरसी डांगी के अनुसार, महिला की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें तलाश में जुटी हैं, लेकिन अभी तक वह पकड़ में नहीं आई है। राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया क्या… भाजपा की सफाई: भाजपा ने धाकड़ से दूरी बनाते हुए कहा कि वह पार्टी के प्राथमिक सदस्य नहीं हैं, केवल ऑनलाइन सदस्यता लेने वाले व्यक्ति हैं। उनकी पत्नी, सोहन बाई, मंदसौर जिला पंचायत की सदस्य हैं। मंदसौर भाजपा जिला अध्यक्ष राजेश दीक्षित ने कहा कि ऐसे कृत्यों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और वीडियो की सत्यता की जांच के बाद कार्रवाई होगी। कांग्रेस का हमला: मध्य प्रदेश कांग्रेस ने इस मामले को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोला। पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने कहा कि भाजपा कुर्सी बचाने के लिए ऐसे कृत्यों को नजरअंदाज कर रही है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गरोठ टोल प्लाजा पर गायत्री मंत्र जाप और गंगाजल छिड़ककर विरोध जताया। सामाजिक बहिष्कार: धाकड़ महासभा युवा संघ ने धाकड़ को राष्ट्रीय महामंत्री पद से हटा दिया। View this post on Instagram मनोहर लाल धाकड़ का मामला न केवल मनोहर लाल धाकड़ का मामला न केवल राजनीतिक और सामाजिक विवाद का विषय बना है, बल्कि यह कानून व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाता है। धाकड़ को त्वरित जमानत और ब्लैकमेलिंग के आरोपों ने मामले को और जटिल बना दिया है। पुलिस अब महिला की तलाश और वीडियो लीक के पीछे की साजिश की जांच में जुटी है। इस बीच, जनता का कानून पर भरोसा कमजोर पड़ता दिख रहा है, क्योंकि प्रभावशाली व्यक्तियों को जल्दी राहत मिलने की तुलना में आम लोग अक्सर लंबी कानूनी प्रक्रियाओं का सामना करते हैं। View this post on Instagram View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन संजीवनी क्लीनिक घोटाला एवं फर्जी नियुक्ति घोटाला की जांचकर कार्यवाही करने की कांग्रेस नेता कुँवर सिंह और विनोद शर्मा ने की मांग एक चुटकी सिन्दूर की कीमत तुम क्या जानो नरेन बाबू!!
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