हमले की निष्पक्ष जांच कर हमले के दोषियों को कड़ी से कड़ी सज़ा दिलाए केंद्र सरकार सीमा पार से यह हिंसा जम्मू कश्मीर में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को डिरेल करने और राज्य की अर्थव्यवस्था को ठप्प करने के उद्देश्य से की जा रही है कोशिश-डॉ. सुनीलम रीवा/ किसान संघर्ष समिति ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर कायराना और बर्बर आतंकी हमले की निंदा की तथा हमले में मारे गये लोगों के प्रति शोक संवेदना और पीड़ित परिवारों के प्रति सांत्वना प्रकट की है। किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष, पूर्व विधायक डॉ. सुनीलम ने कहा कि सीमा पार से यह हिंसा जम्मू कश्मीर में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को डिरेल करने और राज्य की अर्थव्यवस्था को ठप्प करने के उद्देश्य से की जा रही है।उन्होंने कहा कि यह शर्मनाक है। पूरा जम्मू कश्मीर और देश नरसंहार के खिलाफ एकजुट खड़ा है। जम्मू कश्मीर के सभी अखबारों ने पहला पन्ना काला छापा है। सभी पार्टियों ने बंद का ऐलान किया है। तब भाजपा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा संविधान के अनुच्छेद 26 और 29 को खत्म करने की मांग करना शर्मनाक है । पहलगाम की घटना के लिए मुसलमानों को दोषी ठहराना या संदेश की दृष्टि से देखना गलत है। उन्होंने कहा कि इस हमले से यह स्पष्ट है कि हमारे देश की खुफिया एजेंसी पूर्णतः असफल रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार को इसकी जिम्मेदारी लेकर इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने कहा पुलवामा के बाद से अब तक का यह सबसे बड़ा आतंकी हमला है, केन्द्र शासित जम्मू- कश्मीर में केन्द्र सरकार आतंकी हमले को रोकने में पूर्णतया असफल रही है। किसान संघर्ष समिति केन्द्र व राज्य सरकार से यह मांग करती है कि इस हमले की उच्चस्तरीय जाँच करवाए तथा इस हमले के दोषियों को कड़ी से कड़ी सज़ा दी जाये। साथ ही इस हमले में मारे गये लोगों परिवारों को एक-एक करोड़ रुपए और घायलों 50 लाख रुपए की आर्थिक सहायता भी प्रदान की जाये। डॉ. सुनीलम ने कहा कि आतंकियों ने नाम पूछ-पूछकर आम नागरिकों की हत्या की है.यह वीभत्स व घिनौना कृत्य है ।उन्होंने कहा कि देश में धर्म और जाति देखकर लोगों पर हिंसक हमले करने का ट्रेंड चल पड़ा है। मणिपुर में भी दो समुदाय मैतेई और कुकी आपस में एक दूसरे का धर्म देखकर कत्लेआम कर रहे हैं। पिछले साल की खबर है पहचान के आधार पर एक महिला का सामूहिक दुष्कर्म किया गया और नग्न परेड निकाली गयी। 31 जुलाई 2023 को मुंबई से जयपुर जा रही सुपरफास्ट एक्सप्रेस में रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के कांस्टेबल चेतन सिंह चौधरी ने चार लोगों की हत्या की थी। मारे गए लोगों में उनके वरिष्ठ अधिकारी सहायक उप निरीक्षक (ASI) टीकाराम मीना और तीन मुस्लिम यात्री शामिल थे। चेतन शर्मा ने उन तीन मुस्लिम यात्रियों को इसलिए मारा क्योंकि वो मुस्लिम थे। उनका धर्म देखकर चेतन सिंह ने कत्ल किया। टीकाराम मीना का इसलिए कत्ल किया क्योंकि टीकाराम मीना उस कत्लेआम को रोक रहे थे। पहलगाम में भी आतंकियों ने सैय्यद आदिल हुसैन शाह को भी इसलिए मारा क्योंकि आदिल उन आतंकियों द्वारा पर्यटकों के कत्लेआम को रोकने की कोशिश रहे थे। जैसे चेतन सिंह ने टीकाराम का कत्ल किया उसी तरह से आतंकियों ने सैय्यद आदिल हुसैन शाह का भी कत्ल किया। *सैयद हुसैन और टीकाराम ने गणेश शंकर विद्यार्थी की विरासत को जिंदा रखा है। देश को ऐसे इंसानियत के पहरेदारों की जरूरत है भारत में कोरोना काल में कहीं गुंडों की टोली मुस्लिम सब्जी विक्रेता की दुकान को बंद करवाई थी तो कहीं राशन दुकानदार धर्म के आधार पर राशन देने से मना कर रहा था ।इंदौर में तस्लीम चूड़ी वाले को बेरहमी से पीटा गया, इसलिए क्योंकि तस्लीम मुस्लिम था और हिंदू मोहल्ले में चूड़ी बेचने चला गया था। उसे पीटकर मरणासन्न कर दिया गया । तस्लीम छह साल बाद जेल में रहने के बाद बरी हुआ। नाम पूछकर ही ये घिनौने कुकृत्य किए जा रहे हैं। डॉ. सुनीलम ने केंद्र सरकार से मांग की है कि धार्मिक भेदभाव करने से सख्ती से निपटा जाए ।डॉ. सुनीलम ने कहा कि इस जघन्य नरसंहार का इस्तेमालमुसलमानों के खिलाफ नफरत और घृणा फैलाकर धार्मिक ध्रुवीकरण के लिए नहींपाकिस्तान पोषित आतंकवाद को खत्म करने के लिए होना चाहिये। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन भारत अमेरिकी व्यापार समझौते के विरोध की लपटें तेज,एसकेएम ने जलाए पुतले। पहलगाम कश्मीर में हुए नरसंहार के विरोध में निकाला गया कैण्डल मार्च