यीशु मसीह हमारे तन, मन व वचन से किए गए गलती गुनाहों से मुक्ति दिलाने के अपना बलिदान दिया- डॉ उमेश पटेल

रीवा / गुड फ्राइडे का पर्व मानव समाज को प्रेम, ज्ञान और अहिंसा का संदेश देने के लिए मनाया जाता है। इसीलिए इस दिन ईसाई लोग काले रंग के कपड़े पहनकर प्रभु यीशु से अपने पापों के लिए क्षमा मांगते हैं और कई जगह प्रभु यीशु की पदयात्रा भी निकाली जाती है।

इस दिन चर्च में कैंडल नहीं जलाई जातीं और न ही घंटियां बजाई जाती हैं गुड फ्राइडे को लोग अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं। प्रभु ईसा मसीह लोगों को मानवता, एकता और अहिंसा का उपदेश देकर अच्छाई की राह पर चलने के लिए प्रेरित कर रहे थे।

धार्मिक अंधविश्वास करने वाले लोगों ने उन पर राजद्रोह का आरोप लगा दिया। उन्हें मौत की सजा सुनाई गई और प्रभु यीशु को सूली पर चढ़ा दिया गया। प्रभु यीशु के बलिदान की वजह से इस दिन को गुड फ्राइडे कहते हैं। जो क्रूस पर कुर्बान है वह मेरा मसीहा की भजन  के साथ बच्चे, महिलाएं व पुरुष मंत्रमुग्ध हो गए। प्रभु के क्रूस से कही गई सात वाणी है। पिता इन्हें क्षमा कर, तू आज ही मेरे साथ स्वर्गलोक में होगा। हे नारी, देख यह तेरा पुत्र है, हे परमेश्वर, तूने मुझे क्यों छोड़ दिया, मैं प्यासा हूं, पूरा हुआ व हे पिता मैं अपनी आत्मा तेरे हाथों में सौंपता हूं का स्मरण सामर्थ सिंह ने कराया।
तत्पश्चात सात अलग-अलग लोगों द्वारा यीशु मसीह की सात वाणियाँ उनके क्रूस पर चढ़ाए जाने के दौरान बोले गए अंतिम शब्द हैं को मनन किया गया।  जिसमें पहली वाणी “हे पिता, इन्हें क्षमा कर, क्योंकि ये नहीं जानते कि क्या करते हैं”। यह वाणी यीशु की क्षमा और प्रेम को दर्शाती है जो उनके हत्यारों को भी माफ करने के लिए तैयार हैं को इच्छा पटेल ने प्रदर्शित किया।
दूसरी वाणी “मैं तुम से सच सच कहता हूँ आज तुम मेरे साथ स्वर्गलोक में रहोगे”। यह वाणी यीशु की दिव्य शक्ति और उनके साथ मरने वाले अपराधी को स्वर्ग की गारंटी देती है को मुस्कान पटेल ने। तीसरी वाणी “हे नारी, यह तेरा पुत्र है यह तुम्हारी माता है”। यह वाणी यीशु की माँ मरियम की देखभाल के लिए उनके प्रिय शिष्य को सौंपने की इच्छा को दर्शाती है को रिया वर्मा ने।
चौथी वाणी “हे परमेश्वर, हे परमेश्वर, तूने मुझे क्यों छोड़ दिया?” यह वाणी यीशु के दर्द और एकांत को दर्शाती है जब उन्होंने हमारे पापों को अपने ऊपर ले लिया को कमलेश सिंह ने।
पांचवीं वाणी “मैं प्यासा हूँ” यह वाणी भजन संहिता 69:21 की पूर्ति को दर्शाती है, जहां यीशु ने अपनी प्यास को व्यक्त किया और उन्हें सिरका पिलाया गया को डॉ. उमेश पटेल ने।

छठी वाणी “पूरा हो गया है” यह वाणी यीशु के मिशन की पूर्ति और उनके बलिदान के महत्व को दर्शाती है को अमित सिंह ने एवं सातवीं वाणी “हे पिता, मैं अपनी आत्मा को तेरे हाथों में सौंपता हूँ” यह वाणी यीशु की मृत्यु के समय उनकी शांति और अपने पिता के हाथों में अपनी आत्मा को सौंपने की इच्छा को दर्शाती है को सुशीला पटेल ने विस्तार से लोगों को समझाया।

इन सात वाणियों से हमें यीशु के जीवन, शिक्षाओं और उनके बलिदान के महत्व के बारे में बहुत कुछ सीखने को मिलता है। ये वाणी हमें क्षमा, प्रेम, और आत्मसमर्पण के महत्व को समझने में मदद करती हैं।
रतहरा चर्च के पादरी कमलेश सिंह ने कहा कि प्रभु यीशु मसीह ने समस्त जाति के पाप, क्षमा, शांति व उद्धार के लिए अपने आप को बलिदान कर दिया।

  वही डॉ. उमेश पटेल ने कहा कि यीशु मसीह हमारे तन, मन व वचन से किए गए गलती गुनाहों से मुक्ति दिलाने के अपना बलिदान दिया।
कार्यक्रम का संचालन पास्टर अमित सिंह ने किया।


उस दौरान इंद्रभान सिंह, रामवती सिंह, लीलावती सिंह, प्रतिमा कौर, फूलवसी नामदेव, संगीता सिंह, सविता पटेल, सावित्री पटेल, संजय सिंह, कमला सिंह, राजेन्द्र साकेत, सियादुलारी साकेत, बृजेश पटेल, संगीता कुशवाहा, शिवदास, अमित कुशवाहा आदि सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

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By kushmendra

Journlist- NNW News(News National World)

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