अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-चीन जैसे एशियाई देशों को बड़ा झटका दिया है। उन्होंने अमेरिका में 1-2 ट्रिलियन डॉलर के भारी व्यापार घाटे को कम करने के लिए राष्ट्रीय आर्थिक आपातकाल की घोषणा की है। इसके साथ ही, उन्होंने आयात शुल्क भी बढ़ा दिया है। रिसर्च संस्था बजट लैब के अनुसार, ये शुल्क 1872 के बाद सबसे ज्यादा हैं। ट्रंप ने चीन पर 34 फीसदी तो भारत पर 26 फीसदी टैरिफ लगाया है। ये वही ट्रंप हैं, जो दुनिया के कई बड़े मंचों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना अच्छा दोस्त बता चुके हैं। जानकारों का अनुमान है कि अमेरिका में औसत टैरिफ दर बढ़कर 29 प्रतिशत हो गई है। बताया जा रहा है कि 1800 के दशक के अंत में टैरिफ 30 प्रतिशत से ज्यादा था, तब से अब तक यह सबसे ज्यादा है। कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस कदम से 2025 में अमेरिका में मंदी आने की संभावना बढ़ गई है। ट्रंप ने 1977 के अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम का इस्तेमाल किया है। उन्होंने व्यापार घाटे से पैदा हुए राष्ट्रीय आपातकाल से निपटने के लिए यह कदम उठाया है। अमेरिकी सरकार का मानना है कि अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को इतिहास में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। 1997 से 2024 के बीच लगभग 50 लाख मैन्युफैक्चरिंग नौकरियां खत्म हो गईं। वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग में देश की हिस्सेदारी 2001 में 28-4 प्रतिशत से घटकर 2023 में 17-4 प्रतिशत हो गई है। बयान में कहा गया है कि ये टैरिफ तब तक लागू रहगंे जब तक राष्ट्रपति ट्रंप को यह नहीं लग जाता कि व्यापार घाटे और गैर-पारस्परिक व्यवहार से पैदा खतरा लगभग खत्म हो गया है। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार पहले से ही कई मुद्दों को लेकर तनाव में रहा है। यह टैरिफ भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिका में व्यापार करना महंगा बना सकता है। भारतीय उत्पादों पर अधिक शुल्क लगाने से अमेरिकी उपभोक्ताओं को महंगे सामान खरीदने पड़ सकते हैं। कई अमेरिकी कंपनियां, जो भारत से कच्चा माल या तैयार उत्पाद आयात करती हैं उनकी लागत भी बढ़ सकती है। ट्रंप ने भारत पर 26 फीसदी डिस्काउंटेड रेसिप्रोकल टैरिफ की घोष.ाा की है। व्हाइट हाउस के मुताबिक, भारत अमेरिका पर 52 फीसदी टैरिफ लगाता है। टैरिफ की घोषणा करते हुए अमेरिका राष्ट्रपति ने कहा-प्रधानमंत्री कुछ ही दिन पहले ही यहां से गए हैं और वो मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं, पर मैंने उनसे कहा कि आप मेरे दोस्त हैं लेकिन आप हमारे साथ सही नहीं कर रहे हैं। ट्रंप ने कहा-वे हमें 52 फीसदी चार्ज कर रहे हैं। इस लिहाज से हम उनसे लगभग ना के बराबर चार्ज कर रहे हैं सालों और दशकों से।मालूम हो कि हाउडी मोदी 22 सितंबर 2019 को अमेरिका के टेक्सास के ह्यूस्टन में एनआरजी स्टेडियम में आयोजित सामुदायिक शिखर सम्मेलन और मेगा इवेंट था। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संयुक्त संबोधन के लिए जाना जाता था। इससे भारत-अमेरिका के बीच मजबूत संबंधों और रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा मिला था। माना जा रहा है कि भारत और अन्य प्रभावित देश जवाबी कदम उठा सकते हैं और अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ बढ़ा सकते हैं। इससे वैश्विक व्यापार युद्ध की स्थिति बन सकती है। हालांकि, ट्रंप का दावा है कि यह टैरिफ अमेरिकी अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करेगा। उनका कहना है कि यह टैरिफ नीतियां वास्तव में काफी अच्छी हैं। भारत को दोस्त बताकर ट्रंप ने पीठ में छुरा घोंपने का काम किया है। दरअसल, ट्रंप भारत पर लगभग 26 फीसदी टैरिफ को डिस्काउंटेड बता रहे हैं, क्योंकि उनका मानना है कि भारत उनके उत्पादों पर औसतन 52 फीसदी टैरिफ लगाता है। मगर, हकीकत यह है कि अमेरिका से भारत आने वाले महज 0-3 फीसदी उत्पादों पर ही 50 फीसदी या उससे ज्यादा टैरिफ लगता है। 2023 के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका से भारत में आए 3,724 उत्पादों में से सिर्फ 43 प्रोडक्ट पर ही 50 फीसदी या उसे ज्यादा का टैरिफ लगा था। यह अमेरिका के 40 अरब डॉलर के कुल निर्यात का महज 11-4 करोड़ डॉलर ही पड़ता है। जाहिर है कि उन्होंने भारत पर टैरिफ लगाते समय इन बातों पर ध्यान नहीं दिया और 52 फीसदी का औसत शुल्क मानते हुए भारत पर 26 फीसदी टैरिफ लगा दिया। बहरहाल, जानकारों का मानना है कि इससे अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए लागत बढ़ेगी। इससे पहले से ही सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था और भी नीचे जा सकती है, जिससे इस साल मंदी आ सकती है। इधर, दुनिया भर से टैरिफ को लेकर प्रतिक्रिया आनी शुरू हो गई है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने ऐलान किया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए डिस्काउंटेड रेसिप्रोकल टैरिफ के खिलाफ उनका देश जवाबी कदम उठाएगा। पीएम कार्नी ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि कैबिनेट बैठक में इस पर चर्चा होगी कि अमेरिका को किस तरह से जवाब देना है। अमेरिकी टैरिफ को लेकर ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने कहा कि यह पूरी तरह से अनुचित है। उन्होंने कहा कि इस फैसले का इस बात पर असर पड़ेगा कि ऑस्ट्रेलियाई लोग इस रिश्ते को कैसे देखते हैं। उन्होंने साफ कहा कि यह किसी दोस्त का काम नहीं है। अमेरिका ने ब्रिटेन पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने का फैसला लिया है। अमेरिका के डिस्काउंटेड रेसिप्रोकल टैरिफ पर ब्रिटेन ने संयमित प्रतिक्रिया दी है। ब्रिटेन की तरफ से कहा गया है कि वो स्थिति पर नजर रख रहे हैं। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने ईयू के विरुद्ध नए 20 प्रतिशत शुल्क को ‘गलत’ बताते हुए कहा कि इससे किसी भी पक्ष को लाभ नहीं होगा। मेलोनी ने कहा कि हम अमेरिका के साथ एक समझौते की दिशा में काम करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे, जिसका उद्देश्य एक व्यापार युद्ध से बचना है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ब्राजील पर 10 फीसदी टैरिफ लगाया गया है। ब्राजील की सरकार ने कहा है कि वह अमेरिका के इस फैसले का मूल्यांकन कर रही है। उचित जवाबी कदमों पर विचार किया जा रहा है। नॉर्वे के व्यापार और उद्योग मंत्री सेसिली मायरसेथ ने कहा, ष्हम गणना कर रहे हैं और देख रहे हैं कि क्या हुआ है लेकिन यह स्पष्ट है कि यह वर्ल्ड इकनॉमी के लिए गंभीर है। यह हम पर भी असर डालेगा। स्वीडिश प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने कहा कि स्वीडन मुक्त व्यापार और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के लिए खड़ा रहेगा। दक्षिण कोरिया के व्यापार मंत्रालय ने कहा कि दक्षिण कोरिया के कार्यवाहक नेता प्रधानमंत्री हान डक-सू ने अधिकारियों से कहा है कि वो नए 25 प्रतिशत शुल्क के संभावित प्रभाव का विश्लेषण करने के लिए व्यापारिक समूहों के साथ काम करें ताकि नुकसान को कम से कम किया जा सके। चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि चीन अपने अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए दृढ़ता से जवाबी कदम उठाएगा। हालांकि चीन ने यह नहीं बताया कि वह इसके जवाब में क्या कदम उठा सकता है। चीन ने कहा, चीन अमेरिका से अपने एकतरफा शुल्क उपायों को तुरंत रद्द करने और समान बातचीत के माध्यम से अपने व्यापारिक भागीदारों के साथ मतभेदों को ठीक से हल करने का आग्रह करता है। मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शिनबाम ने कहा कि वह ट्रंप की घोषणा के मेक्सिको पर प्रभाव का आकलन करेंगी। भारत यात्रा पर आए चिली के राष्ट्रपति ग्रेब्रियल बोरिक ने भारत में एक व्यापार मंच से चेतावनी दी कि इस तरह के कदम अनिश्चितता पैदा करने के अलावा, पारस्परिक रूप से सहमत नियमों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नियंत्रित करने वाले सिद्धांतों को भी चुनौती देते हैं। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन औरंगज़ेब, ‘छावा’ और चयनित इतिहास लेखन वक्फ (संशोधन) विधेयक: आधी रात के बाद पारित किया गया बिल