एक दशक बाद मोदी और भागवत बैठेंगे आमने सामने.!

पार्टी का नया अध्यक्ष अप्रैल के पहले सप्ताह में लेगा शपथ.!!

प्रदीप चौधरी।। “आज उनसे पहली मुलाक़ात होगी,फिर आमने सामने बात होगी,फिर होगा क्या..! क्या पता क्या ख़बर.!” जी हाँ सही पहचाना आपने ये किसी हिंदी फ़िल्म का हिट गाना ही है। यह गाना आगामी 30 मार्च को नागपुर के लिए एक दम सही बैठता है। इस दिन देश के प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी नागपुर स्थित आर एस एस के मुख्यालय जा रहे हैं। संघ के किसी नेत्र चिकित्सालय की विस्तार शाखा का शिलान्यास करने जा रहे हैं। यह कार्यक्रम महत्वपूर्ण हो सकता है मगर इसे इतना महत्वपूर्ण नहीं कहा जा सकता जितना मोदी जी की संघ प्रमुख मोहन भागवत जी से मुलाक़ात है।



भाजपा और संघ के बीच दूरियों की ख़बरों के बीच इन दोनों दिग्गज़ों का मिलना बेहद ख़ास होगा। राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा के उस बयान के बाद जिसमें कहा गया था कि भाजपा को संघ के साथ की अब कोई ज़रूरत नहीं यह आमने सामने की मुलाक़ात बड़ी दिलचस्प होगी। इस मुलाक़ात का पूरे देशवासियों को बेसब्री से इंतज़ार है।

संघ के मुखिया भागवत जी ने नड्डा जी के बयान पर यद्यपि किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं दी लेकिन उनके अन्य बयानों से यह साफ़ लगता रहा कि वह पार्टी के अहंकारी बयान को सिर्फ़ नड्डा जी का बयान नहीं मान रहे। उनके बयानों से मीडिया यह अंदाज़ा लगाता रहा कि भाजपा और संघ के बीच के रिश्ते पहले जैसे सामान्य नहीं। इन असमान्य रिश्तों के बीच मोदी जी का भागवत जी से मिलना कई अर्थों में महत्वपूर्ण कहा जा सकता है।



विगत लोकसभा चुनावों में “इस बार..चार सौ पार.!” के नारे का जो हश्र हुआ उससे मोदी जी की टीम हत्थोसाहित हुई । अकेले पार्टी के दम पर सरकार नहीं बन सकी। कूटनीतिक लोग बेबाक़ होकर यह कहते रहे कि संघ ने खुल कर साथ नहीं दिया वरना परिणाम कुछ और होते।

संघ प्रमुख तो सर्वोच्च पद है इससे कमतर पोस्ट पर बैठे लोग और आम कार्यकर्ता भी यह मान कर चल रहे हैं कि यदि आर एस एस ने साथ छोड़ दिया तो भाजपा अपना अस्तित्व भी नहीं बचा पाएगी।

दिल्ली के विधानसभा चुनावों में फिर एक बार आर एस एस ने अपना वज़ूद सिद्ध करते हुए आम पार्टी के वट वृक्ष को समूल उखाड़ फेंका। इस बार मोदी जी और शाह के अश्वमेघ यज्ञ पर ब्रेक लग गया। यदि यह ब्रेक पूरी तरह नहीं लगा होता तो नड्डा जी की जगह अब तक कोई और नया अध्यक्ष घोषित कर दिया गया होता।

संघ ने चुनावों के बाद यह साफ़ कर दिया कि संघ का साथ नहीं लिया गया तो भाजपा साफ़ हो जाएगी। न चाहते हुए भी अब मोदी जी एंड कंपनी समझ चुकी है कि संघ के शरणागत हुए बिना कुछ नहीं होगा। दवाब तो इतना है कि प्रधानमंत्री पद पर भी संघ नज़रिया बदल सकता है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 2014 में प्रधान मंत्री बनाए गए मगर 2025 तक उन्होने कभी वन टू वन संघ प्रमुख से न तो कोई सलाह ली न बात की।

अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के समय गर्भ गृह में दोनों साथ अवश्य रहे मगर मोदी जी की भाव भंगिमाओं से किसी को उनकी आपसी नज़दीकियों का अहसास नहीं हुआ। उनके बीच सामान्य शिष्टाचार के तहत रामा श्यामा तो हुई मगर किसी मुद्दे पर बात नहीं हो पाई। यही संवाद हीनता बर्फ बनकर पार्टी और संघ के बीच पैर पसारे रही।

पर्दे के पीछे जरूर पार्टी के संगठन मंत्री बी एल संतोष बीच की कड़ी बने रहे ! और भी संघ के कई पदाधिकारी प्रधानमंत्री के टच में रहे मगर दो मुखियाओं के बीच कभी कोई सीधी सार्थक वार्ता नहीं हो पाई।

यहाँ तक कि विधानसभा चुनावों के बाद  राज्यों के मुख्यमंत्री भी बिना संघ की सलाह के बना दिये गए। यह बात अब खाई के रूप में सामने आ चुकी है ।

इस बार जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संघ प्रमुख मोहन भागवत की मुलाकात होगी तो कई मुद्दों पर स्पष्ट फैसले हो जाएंगे । ख़ास तौर पर संगठन के अध्यक्ष पद पर किसको काबिज करना है इस बात का निर्णय हर हाल में होगा। 💯

अब तक जितने भी नाम अध्यक्ष पद के लिए मीडिया में उछाले जा रहे हैं वे सब न तो मोदी की सहमति के बाद सामने आए हैं ना ही मोहन भागवत जी के सहमति के बाद। सारे नाम कयासों और अफ़वाहों की ही पैदाईश हैं।

नागपुर में मोदी और भागवत की आमने सामने की मुलाक़ात में क्या होगा..? कौन नया अध्यक्ष बनाया जाएगा..? क्या वह अब तक के कयासों के बीच का कोई नाम होगा..? या एक दम नया और चौंकाने वाला नाम होगा..? यह बात फ़िलहाल 30 मार्च तक के लिए एक अनुत्तरित सवाल ही है।

यहाँ आपको बता दूं कि सम्मानीय भागवत जी का स्पष्ट मानना है कि सत्ता को पार्टी अपने मन मुताबिक़ चलाए लेकिन संगठन आर एस एस को चलाने दे। उधर मोदी जी का मानना है कि संगठन और सत्ता के बीच समन्वय नहीं रहा या कोई पैरलल बड़ा शक्तिशाली नेता अध्यक्ष बना दिया गया तो सत्ता सामान्य रूप से काम नहीं कर पाएगी।

ऐसे में साफ़ बात है कि मोदी और भागवत जी के बीच कोई ऐसा नाम सहमति के लिए आगे आएगा जो दोनों को मान्य हो। ऐसा किसका नाम होगा..? आप सोचने को स्वतंत्र हैं। मेरा मानना है कि किसी महिला के लिए संघ दांव चलेगा और मोदी जी को वह मंज़ूर हो जाएगा।

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