(न्यूज़ नेशनल वर्ल्ड डेस्क) देश की राजधानी दिल्ली को एक बार फिर रेखा गुप्ता के रूप में महिला मुख्यमंत्री मिल गई। इससे पहले आम आदमी पार्टी की आतिशि सीएम थीं। शालीमार बाग सीट से विधायक रेखा गुप्ता दिल्ली की चैथी और बीजेपी की पाचवीं महिला मुख्यमंत्री भी बन गई। सुषमा स्वराज, उमा भारती, वसुंधरा राजे, आनंदी बेन पटेल को भाजपा सीएम बना चुकी है। हालांकि इनमें अब तक केवल वसुंधरा राजे ही पूरे 5 साल तक मुख्यमंत्री रह पाई हैं। बीजेपी की पहली महिला मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड सुषमा स्वराज के नाम है। सुषमा ने साल 1998 में दिल्ली का मुख्यमंत्री पद संभाला था। हालांकि उनका कार्यकाल महज 52 दिन का रहा था। इसके बाद चुनाव में बीजेपी सत्ता से बाहर हो गई थी। दिल्ली में यदि गैर भाजपाई महिला सीएम की बात की जाए तो उनमें कांग्रेस की शीला दीक्षित और आप से आतिशी का नाम भी शामिल है। उमा भारती के नेतृत्व में मध्य प्रदेश में साल 2003 में हुए विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने जीत हासिल की थी। बीजेपी ने 173 सीट हासिल की थी जबकि कांग्रेस महज 38 सीट पर सिमट गई थी। इस दमदार जीत के बाद उमा भारती मुख्यमंत्री बनीं लेकिन वह अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकीं। तिरंगा मामले में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था। उमाश्री एक साल से भी कम वक्त सीएम रहीं। साल 2003 में वसुंधरा राजे के नेतृत्व में बीजेपी को राजस्थान विधानसभा चुनाव में जीत मिली। वसुंधरा ने अपन पांच साल का कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा किया। इसके बाद साल 2013 में वह एक बार फिर मुख्यमंत्री बनी। इस बार भी वह पूरे पांच साल मुख्यमंत्री रहीं। इसी तरह नरेंद्र मोदी ने जब देश का प्रधानमंत्री बनने के बाद गुजरात का मुख्यमंत्री पद छोड़ा तो आनंदी बेन पटेल को अगला सीएम बनाया गया। गुजरात सरकार के बचे हुए दो साल 77 दिन तक वही मुख्यमंत्री पद पर रहीं। मालूम हो कि दिल्ली में भाजपा को करीब ढाई दशक बाद ऐतिहासिक जीत मिली है। बीजेपी को 70 में से 48 सीट पर जीत मिली जबकि आप को 22 सीटों पर ही कामयाबी मिली। कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला। View this post on Instagram पहली बार विधायक बनीं रेखा गुप्ता को दिल्ली का सीएम बनाकर भाजपा ने एक तीर से कई निशाने साध लिए हैं। अव्वल तो रेखा गुप्ता ने जो मुकाम हासिल किया वो खुद के बूते किया, राजनीति उनको विरासत में नहीं मिली बल्कि मेहनत और काबलियत के दम पर वो सीएम पद तक पहुंचीं हैं। भारतीय जनता पार्टी शुरू से ही दूसरी पंक्ति के नेता या लीडर तैयार करती रही है और रेखा को सीएम बनाकर भाजपा ने अपनी इसी परम्परा को आगे बढ़ाया है। बीजेपी ने कार्यकर्ताओं के साथ ही देश भर में ये संदेश देने की कोशिश की है भाजपा में हमेशा समर्पित कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने का मौका दिया जाता है। रेखा गुप्ता को ही सीएम बनाए जाने की पीछे और भी कई वजह है। जब सीएम फेस की तलाश हो रही थी तब ये तय हो गया था कि किसी सांसद को सीएम नहीं बनाया जाएगा क्योंकि फिर सांसद की सीट पर चुनाव होगा और ऐसा करना ठीक नहीं है। किसी बिहारी या पूर्वाचली के सीएम बनाए जाने की चर्चा तब ठंडी पड़ गई जब पार्टी से जुड़े दिग्गजों ने ये कह दिया कि ऐसा हुआ तो नीतिश कुमार तक गलत संदेश जाएगा। लिहाजा, संघ की पसंद मानी जानी वाली रेखा गुप्ता का नाम तय कर लिया गया। हरियाणा में जन्मी और दिल्ली में पली बढ़ीं रेखा गुप्ता दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ की अध्यक्ष रह चुकी हैं। उन्होंने शालीमार बाग से आम आदमी पार्टी की उमीदवार वंदना कुमारी को 29 हजार से अधिक वोटों से मात दी थी। वह दिल्ली भाजपा की महासचिव और भाजपा के महिला मोर्चा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी हैं। रेखा गुप्ता के अलावा प्रवेश वर्मा सीएम पद के प्रबल दावेदार थे लेकिन शायद बीजेपी के बड़े नेता नहीं चाहते थे कि दिल्ली में किसी और नेता का कद बड़ा हो लिहाजा वर्मा को डिप्टी सीएम बना दिया गया। रेखा गुप्ता के मुख्यमंत्री बनते ही भाजपा ने एक तीर से कई शिकार खेले हैं। 50 वर्षीय रेखा गुप्ता के रूप में बीजेपी ने एक स्थाई महिला मुख्यमंत्री दे दिया है। बहरहाल, दिल्ली की नई मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का कार्यकाल कैसा होगा ये वक्त बताएगा। उनका कार्यकाल क्या सुषमा स्वराज की तरह होगा या फिर शीला दीक्षित की तरह या आतिशी के चंद महीनों की तरह। या फिर वो नया इतिहास रचेंगी।रेखा गुप्ता दक्षिण दिल्ली नगर निगम की मेयर भी रह चुकी हैं। उन्होंने एलएलबी की पढ़ाई की है। रेखा गुप्ता का जन्म हरियाणा के जींद जिले के जुलाना उपमंडल के नंदगढ़ गांव सन 1974 में हुआ था। रेखा गुप्ता जब दो साल की थीं तब उनका परिवार दिल्ली शिफ्ट हो गया। उनके पिता स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में मैनेजर थे। वर्ष 1976 में पूरा परिवार दिल्ली शिफ्ट हो गया। रेखा गुप्ता की पूरी पढ़ाई लिखाई दिल्ली में हुई। इसी दौरान वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ीं। इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान वह दौलत राम कॉलेज में सचिव का चुनाव जीतने में सफल रहीं। 1996-97 में उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ का चुनाव लड़ा और अध्यक्ष बनीं। रेखा ने इसके बाद एलएलबी तक की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई पूरी करने के बाद रेखा गुप्ता 2003-04 में भाजपा युवा मोर्चा की दिल्ली इकाई से जुड़ीं और यहां सचिव पद पर रहीं। इसके बाद सन 2004 से 2006 तक उन्होंने भारतीय जनता युवा मोर्चा की राष्ट्रीय सचिव के तौर पर जिम्मेदारी निभाई। सन 2007 में उत्तर पीतमपुरा से पार्षद बनीं। 2007-09 तक एमसीडी में महिला कल्याण एवं बाल विकास समिति की दो साल तक अध्यक्ष रहीं। वर्ष 2009 में दिल्ली भाजपा महिला मोर्चा की महासचिव रहीं। सन 2010 में भाजपा ने उन्हें राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य की जिम्मेदारी दी गई। 2012 में उत्तरी पीतमपुरा वार्ड 54 से फिर पार्षद बनीं। सन 2015 और 2020 के विधानसभा चुनाव में उन्हें जीत नहीं मिली। रेखा गुप्ता को 2015 और 2020 के विधानसभा चुनाव में शालीमार बाग सीट से चुनाव में उतारा गया। जहां 2015 में उन्हें आम आदमी पार्टी की वंदना कुमारी ने करीब 11 हजार वोटों से हराया तो वहीं 2020 में उनकी हार का अंतर 3400 वोट के करीब था। वर्ष 2025 में जीत कर उन्होंने अपनी पराजय का हिसाब चुकता कर लिया। 2025 के विधानसभा चुनाव में रेखा गुप्ता ने शालीमार बाग विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी की वंदना कुमारी को 29,595 वोटों से हरा दिया। उन्हें 68,200 वोट मिले थे। रेखा गुप्ता की वर्ष 1998 में मनीष गुप्ता से शादी हुई थी। चुनाव आयोग को दिए गए हलफनामे के मुताबिक रेखा के पति एक लाइफ इंश्योरेंस कंपनी में काम करते हैं। साथ ही उनका स्पेयर पार्ट्स का भी कारोबार है। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन बडनगर पुलिस नें एक बार फिर बालिका को दस्तयाब कर परिजन को लौटाई खुशियां… इंदौर कमिश्नर संतोष सिंह की अनोखी परीक्षा दे रहे जवान…