भोपाल- मुस्ताअली बोहरा मध्यप्रदेश कांग्रेस में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। हाल ही में पूर्व सीएम और पार्टी के कद्दावर नेता कमलनाथ ने अपना दर्द बयां किया। उनकी टीस थी कि उन्हें पार्टी की बैठक की जानकारी नहीं दी जाती। नियुक्तियों तक में उनसे रायमशविरा नहीं किया जाता। वैसे, कमलनाथ वही काट रहे हैं जो उन्होंने बोया था। एक वक्त था जब नाथ की सत्ता और संगठन दोनों में तूती बोलती थी, तब भी होता वही था जो नाथ चाहते थे। यही हाल दिग्विजय सिंह के सीएम रहते था। तब दिग्विजय गुट था उनके बाद जब नाथ के हाथ संगठन और सत्ता आई तब नाथ गुट हो गया और ये सिलसिला चलता आ रहा है। अब चाहे दिग्विजय सिंह हो या फिर कमलनाथ और कोई और बड़ा नेता सभी गुटबाजी में पिस रहे हैं। बड़े नेता चाहते हैं कि पटवारी हर काम उनसे पूछ कर करें और पटवारी ऐसा कर नहीं रहे हैं, ये भी एक वजह है नाथ-दिग्विजय की टीस की। कांग्रेस की गुटबाजी किसी छिपी नहीं है लेकिन जिस तरह से जीतू पटवारी अलग-थलग पड़ गए हैं उससे यही लगता है। वैसे पार्टी के ही एक खेमे का कहना है कि पटवारी खुद ही सीनियर्स को किनारे करके एकला चलो वाली नीति के तहत काम कर रहे हैं। मध्यप्रदेश कांग्रेस उस वक्त से लगातार कमजोर हो रही है जब ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थामा था। इसके बाद कमलनाथ सरकार गिर गई थी। बाद में तो कमलनाथ के अपने पुत्र के साथ कांग्रेस छोड़ भाजपा में जाने की अटकलें हवा में तैरते रहीं थी, ये और बात है कि वे गए नहीं या फिर लिए नहीं गए।वैसे एक वक्त था जब कमलनाथ ही सर्वेसर्वा हुआ करते थे। मुख्यमंत्री रहते हुए भी पीसीसी चीफ पद नहीं छोड़ा था। अब, कमलनाथ हो या फिर दिग्विजय सिंह सभी हासिये पर आ गए हैं। कांग्रेस के भीतर क्या चल रह रहा है इसकी बानगी हाल ही में नजर आई। दरअसल, कांग्रेस 26 जनवरी को महू में जय भीम, जय बापू, जय संविधान रैली का आयोजन करने जा रही है। इसी की तैयारियों को लेकर मध्यप्रदेश कांग्रेस की पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी की वर्चुअल मीटिंग हाल ही में हुई। इस मीटिंग में पीसीसी चीफ जीतू पटवारी, पूर्व सीएम कमलनाथ, पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार समेत कमेटी के तमाम सदस्य जुड़े थे। वर्चुअल मीटिंग में पूर्व सीएम कमलनाथ ने अपना दर्द बयां किया। उनका कहना था कि आजकल ऐसा चल रहा है कि नियुक्तियों में मुझसे पूछा तक नहीं जाता। चाहे नियुक्ति किसी के कहने से हो न हो लेकिन सीनियर्स से रायमशविरा करनी चाहिए। नाथ का कहना था कि बैठकों की मुझे कोई सूचना नहीं दी जाती। अखबारों से पता चलता है कि कांग्रेस की बैठक थी। इसी तरह दिग्विजय सिंह ने भी कहा कि मैं भी कमलनाथ जी की बात से सहमत हूं। बिना एजेंडे के बैठकें बुला ली जाती हैं। वॉट्सऐप पर भेजे एजेंडा पर उन्होंने कहा कि मोबाइल से मीटिंग से जुड़े होने के कारण वाॅटसऐप पर एजेंडा भी नहीं देख सकते। पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन ने भी कमलनाथ और दिग्विजय सिंह की बात का समर्थन किया। मीटिंग में कमलनाथ सहित अन्य नेताओं ने कहा कि 26 जनवरी को सभी जगह आयोजन होते हैं। ऐसे में सभी लोगों अपने-अपने क्षेत्रों के कार्यक्रमों में शामिल होते हैं। कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी 26 जनवरी को आने में दिक्कत होगी। इस पर कहा गया कि तारीख एआईसीसी से तय की गई है। ऐसे में बदलाव को लेकर निर्णय राष्ट्रीय स्तर से ही हो सकता है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि इस साल का यह पहला सबसे बड़ा आयोजन है। लिहाजा, राष्ट्रीय नेताओं के साथ कांग्रेस के देशभर के नेता बाबा साहेब की जन्मस्थली पर महू आएंगे। सिंघार का कहना था कि इस आयोजन में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए और इसके लिए व्यापक बंदोबस्त करने चाहिए। जिले से लेकर गांव-गांव तक प्रचार-प्रसार होना चाहिए। दिलचस्प बात ये भी है कि इस मीटिंग में बड़े नेता अपनी-अपनी बात कहकर लेफ्ट होते रहे।कुल मिलाकर, ये कहा जा सकता है कि जीतू पटवारी जैसे तेज तर्रार नेता के साथ सीनियर्स की पटरी नहीं बैठ रही है। पटवारी को पार्टी की कमान इसलिए दी गई थी कि वे युवा है उन्हें सड़क से लेकर विधानसभा तक का खासा अनुभव है। लेकिन जिस तरह से सीनियर्स ने पल्ला झाड़ लिया या सीनियर्स को किनारे कर दिया गया उससे कांग्रेस की और ज्यादा फजीहत ही हो रही है। सन 2023 में विधानसभा में पराजय और इसके बाद वर्ष 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में सभी 29 सीटें हारने के बाद भी पार्टी नेताओं का इगो खत्म नहीं हुआ। हालात ये हैं कि पूर्व अध्यक्ष अरूण यादव, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह सहित ऐसे ही कई नेताओं ने पार्टी से दूरी बनाए रखी हुई है। महिला कांग्रेस, युवा कांग्रेस, एनएसयूआई, कर्मचारी कांग्रेस, अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति प्रकोष्ठ सहित पार्टी के अन्य अनुशांगिक संगठनों का कोई अता-पता नहीं है। कांग्रेस के बेपटरी होने का सारा ठीकरा जीतू पटवारी पर फोड़ा जा रहा है लेकिन क्या वो अकेले ही जिम्मेदार हैं ? Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन केके गुप्ता बनाये गए अखिल भारतीय केशरवानी वैश्य समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष केरल हाई कोर्ट ने माना,महिला की शारीरिक बनावट पर की गई टिप्पणी यौन उत्पीड़न