भोपाल।  मुस्ताअली बोहरा

वन नेशन वन टैक्स का नारा देने वाली मोदी सरकार अब पॉपकॉर्न पर उलझ गई है। फ्लेवर्स के हिसाब से पाॅपकाॅर्न पर तीन तरह के टैक्स हैं। स्थिति ये है कि सरकार की तरफ से सफाई तक देनी पड़ रही है। सोशल मीडिया में पुरानी और यूज्ड गाड़ियों के बेचने पर जीएसटी लगाने को लेकर सरकार की फजीहत हो रही है। हाल ही में हुई जीएसटी काउंसिल में पुरानी और उपयोग की हुई गाड़ियों के बेचने पर जीएसटी लगाने को लेकर फैसला लिया गया। इसमें इलेक्ट्रिक व्हीकल्स भी शामिल है। आलोचना और सोशल मीडिया पर किरकिरी के बाद पुरानी गाड़ियों के बेचने पर जीएसटी लगाने को लेकर फैले भम्र को दूर करने की कोशिश की गई है। सरकार ने साफ किया है कि अगर पुरानी गाड़ियों के बेचने पर मार्जिन नेगेटिव में है और कोई मुनाफा नहीं हो रहा है तो उसपर जीएसटी नहीं देना होगा।
सरकार ने पुरानी और यूज्ड गाड़ियां जिसमें ईवी भी शामिल है उसे बेचे जाने पर जीएसटी को लेकर उपजी भम्र की स्थिति को दूर करने की कोशिश की है। ईवी के अलावा पुरानी और यूज्ड गाड़ियों के सेल को लेकर सरलीकरण किया गया है। जीएसटी काउंसिल ने सभी पुरानी और इस्तेमाल की गई गाड़ियां जिसमें ईवी भी शामिल है उस पर 18 फईसदी जीएसटी लगाने का फैसला लिया है, पहले अलग-अलग दरें लगाई जाती थी। जीएसटी काउंसिल ने कोई भी नया टैक्स लगाने की सिफारिश नहीं की है। ये भी कहा गया है कि केवल रजिस्टर्ड व्यक्ति जो पुरानी और यूज्ड गाड़ियों के सेल से जुड़े कारोबार करते हैं उन्हें ही जीएसटी का भुगतान करना है। कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को पुरानी और यूज्ड कार बेचता है तो ऐसे मामले में जीएसटी लागू नहीं होगा। पुरानी और उपयोग की गई गाड़ियों के सेल वैल्यू पर जीएसटी दिए जाने के सवाल पर कहा गया है कि जीएसटी में रजिस्टर्ड व्यक्ति ने इनकम टैक्स एक्ट 1961 के सेक्शन 32 के तहत डेप्रीसिएशन क्लेम किया है, जीएसटी केवल सप्लायर के मार्जिन वैल्यू पर देना होगा। यानि पैसेंजर गाड़ियों के सेल वैल्यू और डेप्रीसिएटेड वैल्यू के बीच जो अंतर होगा उसपर जीएसटी का भुगतान करना होगा लेकिन ऐसे मामलों में जब मार्जिन नेगेटिव में रहेगा तब कोई जीएसटी नहीं लगेगा।  
इसी तरह जीएसटी काउंसिल की मीटिंग में ये तय किया गया है कि सिनेमा हॉल में खुले में ब‍िकने वाले पॉपकॉर्न पर रेस्तरां की तरह 5 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगेगा। पॉपकॉर्न पर लगने वाले जीएसटी को लेकर कन्‍फ्यूजन की स्थिति बन गई थी। इसके बाद बताया गया है कि यदि पॉपकॉर्न को फिल्म टिकट के साथ बेचा जाता है तो इसे टोटल सप्‍लाई के रूप में माना जाएगा। चूंकि इस मामले में खास सप्‍लाई टिकट की है, इसलिए उसकी लागू दर के अनुसार टैक्‍स लगाया जाएगा। पॉपकॉर्न पर लगने वाली जीएसटी में किसी तरह का इजाफा नहीं किया गया है। सूत्रों के अनुसार पॉपकॉर्न को सिनेमा हॉल में खुले रूप में बेचा जाता है यही कारण है कि इस पर रेस्तरां सर्विस की तरह 5 प्रतिशत की दर से जीएसटी लागू रहेगी। जीएसटी के तहत नमक और मसालों वाले पॉपकॉर्न को नमकीन के रूप में कैटेगराइज किया जाता है और इसपर 5 प्रतिशत टैक्‍स लगता है। जब इसे पैक्‍ड और लेबल के साथ बेचा जाता है तो दर 12 प्रतिशत होती है। कुछ वस्तुओं को छोड़कर सभी चीनी कन्फेक्शनरी पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगता है. इसलिए कारमेलाइज चीनी वाले पॉपकॉर्न पर 18 प्रतिशत की दर से जीएसटी की दर लागू होगी। सीधे शब्दों में कहा जाए तो पाॅपकाॅर्न में भी तीन तरह के टैक्स लग रहे हैं।
जीएसटी काउंसिल की बैठक में सरकार की ओर से कई फैसले लिए गए हैं। सरकार ने पुरानी गाड़ियों से लेकर पॉपकॉर्न तक पर जीएसटी लगाने की घोषणा कर डाली। सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा बहस छिड़ी पॉपकॉर्न पर लगे जीएसटी को लेकर है। पाॅपकाॅर्न को लेकर तीन तरह के टैक्स के कारण लोगों ने मुखर होकर हमला बोला है। एक वर्ग का कहना है कि अब तो बच्चों को पाॅपकाॅर्न खिलाना तक मंहगा हो गया है। लोगों का कहना है कि कि पॉपकॉर्न खरीदने से पहले जीएसटी स्लैब देखना पड़ेगा। बहरहाल, अभी तक पाकिस्तान को लेकर उलझी केन्द्र सरकार अब पाॅपकाॅर्न में उलझती दिख रही है। इसके अलावा वन नेशन वन टैक्स का केन्द्र सरकार का दावा खोखला होता दिख रहा है। वैसे भी इनकम टैक्स, सेल्स टैक्स, जीएसटी और जीएसटी में भी केन्द्र और राज्य सरकार के अलग-अलग टैक्स, फिर टीसीएस, टीडीएस सहित करीब तीन दर्जन टैक्स हैं। केन्द्र और राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के टैक्स इतने ज्यादा हैं और इतने उलझे हुए हैं कि व्यापारी से लेकर आम करदाता की समझ से परे होते हैं। उम्मीद है सरकार इस ओर ध्यान देकर माकूल कदम उठाएगी।  

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