भोपाल – मुस्ताअली बोहरा
 

अक्सर ऐसा कहा और सुना जाता है कि किसी भी सफल सरकार अथवा सरकारी योजना के पीछे अफसर का हाथ होता है। भले ही मुख्यमंत्री या विभागीय मंत्री अपनी घोषणा अथवा पार्टी के मेन्युफेस्टो के आधार पर कोई योजना बनाते हो लेकिन इन घोषणाओं को पूरा करने के लिए पूरा खाका अधिकारी ही बनाते हैं। ये न सिर्फ कार्ययोजना बनाते हैं बल्कि उन्हें जमीनी स्तर पर पूरा करवाने का जिम्मा भी इन अफसरों के कांधों पर होता है। पूर्ववर्ती सरकारों में सुधि रंजन मोहंती और इकबाल सिंह बैस जैसे अफसरों की तूती बोलती थी। यही वजह है कि ऐसे अफसरों का कार्यकाल भी बढ़ता रहा है। कोई भी सीएम या मंत्री हो वो यही चाहता है कि सरकारी योजनाओं को कामयाबी और बिना किसी विवाद के साथ हितग्राहियों तक पहुंचाया जा सके। लिहाजा, ये जनप्रतिनिधि चाहते हैं कि उन्हें अनुभवी और कार्यकुशल अफसरों का साथ मिले। यहीं वजह भी है कि मंत्री भी अपने निज सहायक और स्टाॅफ में अनुभवी अफसरों और कर्मचारियों को तरजीह देते हैं। हाल ही में जब डाॅ मोहन यादव ने सीएम पद की शपथ ली तो इसके बाद नए मुख्य सचिव के नाम को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया था। जो नाम डाॅ यादव के पसंदीदा थे उनमें एक नाम डाॅ राजेश राजौरा का भी था। 13 मई 1967 को जन्में डाॅ राजेश राजौरा वर्तमान में एसीएस चीफ मिनिस्टर हैं। वे नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष, जल संसाधन और नर्मदा घाटी विभाग के अपर मुख्य सचिव भी हैं। जिस तरह एक चिकित्सक नब्ज देखकर बीमारी का पता लगा लेता है उसी तरह की कार्यशैली राजौरा की भी। वैसे भी वो एमबीबीएस हैं तो उनके लिए नब्ज देखकर बीमारी का अंदाजा लगाना आसान ही है फिर चाहे वो नब्ज किसी मातहत अधिकारी की हो या जनप्रतिनिधि की। जो भी बीमार नजर आएगा राजौरा उसे कड़वी दवा देने में गुरेज नहीं करेंगे।
कुछ अधिकारी ऐसे होते हैं जो अपनी कार्यकुशलता, प्रशासनिक दक्षता की वजह से सबके चहेते बने रहते हैं फिर चाहे सरकार किसी की भी हो या सीएम कोई भी हो। राजौरा जैसे अफसर बिरले ही होते हैं जो एक नहीं बल्कि तीन-तीन मुख्यमंत्रियों के चहेते रहे हो। जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी और कमलनाथ ने मुख्यमंत्री बनते है जिस पहली फाईल पर दस्तखत किए थे वो राजौरा ने सामने रखी थी। इसी तरह वे शिवराज सरकार में भी प्रभवशाली अधिकारियों में शामिल रहे। और अब डाॅ मोहन यादव के राज मंे भी वो प्रशासनिक लाॅबी के किंग मेकर बने हुए हैं। डाॅ यादव की प्रशासनिक सर्जरी में राजौरा की छाप देखी जा सकती है। कौन अफसर कितना काबिल है, किस विभाग में फिट बैठेगा उसके काम करने का तरीका क्या है ये सब डाॅ राजौरा जानते हैं और यही वजह है कि जब प्रदेश भर के प्रशासनिक अधिकारियों को इधर से उधर किया गया तो डाॅ राजौरा ने सीएम मोहन यादव को भरोसे में लेते हुए जमावट करवाई। जब मोहन यादव सीएम बने और उन्होंने जो पहली फाइल पर दस्तख्त किए वो राजेश राजौरा ने उनके सामने रखी थी जिसमें धर्मस्थलों से लाउड स्पीकर निकाले जाने संबंधी आदेश था। इससे पहले जब 2018 में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार बनी तब भी बतौर सीएम उन्होंने सबसे पहले किसानों की कर्जमाफी संबंधित जो आदेश जारी किया वो फाईल भी राजेश राजौरा ने ही उनके सामने रखी थी। डेढ़ दशक से ज्यादा समय तक सीएम रहे शिवराज सिंह चैहान के भी वे चहेते रहे हैं।
मुख्यमंत्री के एडिशनल चीफ सेके्रटरी के रूप में सेवाएं देने वाले डाॅ राजेश राजौरा उन अफसरों में से हैं जो हर परिस्थिति में काम कर सकते हैं। सरकारी काम काज में यदि कभी कोई समस्या आई तो भी राजौरा इसका समाधान निकाल लेते हैं। किसी भी काम में समस्या की बजाए समाधान ढूंढने वाले राजौरा पूर्ववर्ती सरकारों में भी अपनी काबलियत का लोहा मनवा चुके हैं। उज्जैन कलेक्टर के रूप में डाॅ राजौरा ने कई ऐसे काम कराए जिन्होंने विकास की गति तेज की। इसी तरह झाबुआ में जिला पंचायत के सीईओ रहते हुए आदिवासियों के हितों की योजनाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाया। धार कलेक्टर के रूप में उन्होंने बेहतर काम किया। राजौरा जब नक्सलप्रभावित बालाघाट जिले में पदस्थ रहे तब भी उन्होंने अपनी अलग छाप छोड़ी। इंदौर में काम करते हुए उन्होंने कई अहम फैसले लिए। बालाघाट और इंदौर में डाॅ राजौरा को राजनीतिक दबाव भी झेलना पड़ा बावजूद इसके उन्होंने अपनी कार्यप्रणाली से प्रशासनिक कार्यों को अंजाम दिया। कृषि विभाग में काम करते हुए उन्होंने मध्यप्रदेश को कृषि कर्मण अवार्ड दिलवाया।  
सन 2004 में उज्जैन में सिंहस्थ के दौरान डाॅ राजौरा कलेक्टर थे। सिंहस्थ समिति में डाॅ मोहन यादव भी थे और उस समय ही राजौरा और यादव के बीच संबंधों की शुरूआत हुई। डाॅ यादव और डाॅ राजौरा दोनों ही एक दूसरे की कार्यशैली से वाकिफ हैं। ये भी दिलचस्प है कि डाॅ राजौरा उन चुनिंदा अफसरों में शामिल हैं जो अपने ही गृह प्रदेश में अहम ओहदे पर पहुंचे। केएस शर्मा के बाद डाॅ राजौरा भी मूलत मध्यप्रदेश के ही रहने वाले हैं। शर्मा होशंगाबाद के रहने वाले थे जिन्होंने 1997 से 2001 तक बतौर मुख्य सचिव अपनी सेवाएं दीं। कमलनाथ, शिवराज सिंह चैहान और अब डाॅ मोहन यादव यानि सीएम के साथ काम करने वाले डाॅ राजौरा के लिए भी अहम उपलिब्ध है।
    डॉ. राजेश राजौरा नीमच के रहने वाले हैं। बता दें कि डॉ. राजेश राजौरा 1990 बैच के आईएएस अफसर हैं। राजेश राजौरा ने दिल्ली एम्स से एमबीबीएस किया है। वर्तमान में मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर मुख्य सचिव, जल संसाधन व एनवीडीए के प्रमुख सचिव हैं। इसके साथ ही वह नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष भी हैं। राजेश राजौरा कृषि, गृह, उद्योग, उद्यानिकी और परिवहन विभाग संभाल चुके हैं. इसके अलावा झाबुआ जिले के एडिशनल कलेक्टर, जबकि धार, बालाघाट, उज्जैन और इंदौर जिले के कलेक्टर रह चुके हैं। उज्जैन में 2028 में होने वाले सिंस्थ की तैयारियों का जिम्मा भी राजौरा को सौंपा गया है। राजौरा साल 2027 में सेवानिवृत्त होंगे। मुख्यमंत्री डाॅ मोहन यादव ने उन्हें अपना एसीएस बनाकर उन पर भरोसा जताया है। अब राजौरा के कांधों पर उज्जैन में महाकुंभ को सफल बनाने और मप्र सरकार सहित मोहन यादव की छबि को देश भर में स्थापित करने का दायित्व है। बहरहाल, डाॅ राजेश राजौरा बीमारी दूर करना जानते हैं और शायद ये बात मोहन यादव भी भली भांति जानते हैं यही वजह है कि यादव ने राजौरा को अपने करीब रखा है। आखिर में ये कहा जा सकता है कि पर्दे के पीछे से सरकार तो अफसर ही चलाते हैं।  

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