जो आपने स्वाद लिया है उत्तपम, मैं भी कविता गढ़ता रहा अनुपम।हा,आपका रहा खाने में पूरा ध्यान,अच्छा रहा नहीं था कोई व्यवधान!गजब का पहना था आपने परिधान।जो आपने स्वाद लिया है उत्तपम, मैं भी कविता गढ़ता रहा अनुपम।सच, क्या करूं तारीफ खाने की,कहीं जाने और साथ निभाने की!तेरी अदा प्यारी है मुझे मनाने की।जो आपने स्वाद लिया है उत्तपम, मैं भी कविता गढ़ता रहा अनुपम।पूछ ही लिया और कुछ खाना है,बंदा पानी-पूरी का नहीं दीवाना है!तुझे खिलाकर, मुझे मजा आना है।जो आपने स्वाद लिया है उत्तपम, मैं भी कविता गढ़ता रहा अनुपम।क्या? लिखू तू खुद एक कविता है,तेरी बर्तनवाली का नाम सविता है!धनंजय तेरे ख्वाबों में ही जीता है।संजय एम. तराणेकर(कवि, लेखक व समीक्षक)इन्दौर-452011 (मध्यप्रदेश)98260-25986 Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन इंदौर पुलिस की देर रात्रि में गुंडे, बदमाशों एवं असमाजिक तत्वों पर लगातार की जा रही प्रभावी कार्यवाही में, शराब पीकर वाहन चलाने वालों के विरुद्ध किया कड़ा प्रहार नगर निगम में नोटिस देने के बाद व्यापारियों ने बड़वाली चौकी के द्वारा बताएं राशि का चेक दे दिया गया आज