भोपाल, मप्र -मुस्ताअली बोहरा अधिवक्ता एवं लेखक 4 लाख करोड़ से ज्यादा से कर्ज में डूबे मध्यप्रदेश में अब इसका असर नज़र आने लगा है। वोटों की राजनीति और सियासी फायदे के लिए मुफ्त योजनाओं ने अनाथ बच्चों की पेंशन भी छीन ली है। इन मासूम बच्चों की परवरिश की इकलौता सहारा भी नहीं रहा। राज्य में कोविड 19 के दौरान माता-पिता को खोने वाले बच्चों के लिए शिवराज सरकार ने सीएम बाल आशीर्वाद योजना शुरू की थी। इसके तहत हर महीने पेंशन दी जाती थी लेकिन नौ महीने से ये बंद है। अनाथ बच्चों के पक्ष में अब कांग्रेस भी आकर खड़ी हो गई है। कांग्रेस ने कहा है कि राज्य सरकार ने कोरोना काल में मृत हुए माता-पिता के बच्चों को मिलने वाली पेंशन रोक दी है। संबंधित विभागीय अधिकारियों की मानें तो केन्द्र सरकार से फंड ना आने के कारण ये योजनाएं रोकीं गई हैं। मतलब, अफसरों ने जाने-अनजाने में ठीकरा केन्द्र सरकार के सिर फोड़ दिया है। मध्य प्रदेश के 9041 बच्चों को मिलने वाली पेंशन अब बंद हो गई है। मुख्यमंत्री बाल आशीर्वाद योजना और स्पॉन्सरशिप योजना के तहत इन बच्चों को 5 हजार रुपये दिए जाते थे। इन 9041 बच्चों में 1041 बच्चे वो हैं, जिनके माता-पिता दोनों की ही कोरोना काल यानी मार्च 2020 से से जून 2021 के दौरान मृत्यु हो गई जबकि, 8 हजार बच्चे वो हैं, जिनके माता-पिता में से किसी एक की जान चली गई। इसके बाद सरकार ने ये दोनों योजनाएं चलाकर उनका लालन-पालन करने की बात कही लेकिन, अब इस साल जनवरी से लेकर इस महीने तक यह आर्थिक मदद बच्चों को नहीं मिली है। संबंधित विभागीय अधिकारियों का कहना है कि केन्द्र से ही फंड नहीं आ रहा है। राजधानी भोपाल में इस योजना का लाभ ले रहे बच्चों की संख्या 1662 है। भोपाल में स्पॉन्सरशिप योजना के तहत इसका लाभ लेने वाले बच्चों की संख्या 962 है। जबकि, 700 बच्चों को मुख्यमंत्री कोविड बाल कल्याण योजना के तहत आर्थिक मदद दी जा रही थी, जो बीते 9 महीने से रुकी हुई है। राशि जनवरी माह से नहीं आई है। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान ने बच्चों के लालन पालन के लिए मुख्यमंत्री कोविड-19 बाल आशीर्वाद योजना शुरू की थी। मई 2021 में शिवराज सिंह चैहान ने ऐलान किया था कि जिन बच्चों ने कोरोना की वजह से अपने माता-पिता या अभिभावकों को खोया है उन्हें हर महीने 5 हजार रुपए पेंशन दी जाएगी। चैहान ने कहा था कि मुफ्त राशन की भी व्यवस्था की जाएगी। पहली से 12वीं तक सरकारी स्कूलों में निशुल्क पढ़ाई और निजी स्कूल में पढ़ाई के लिए सरकार 10 हजार रुपये सालाना देगी। कॉलेज की पढ़ाई का खर्च भी सरकार उठाएगी। इस योजना की शुरुआत 30 मई 2021 को हुई थी। योजना में शिक्षा-आश्रय-आहार और जीवन योजना की संपूर्ण व्यवस्था किया जाना था। यह योजना 1 मार्च 2021 से 30 जून 2021 तक की अवधि में कोविड-19 के कारण हुई मौत के मामलों पर लागू थी।बच्चों को पेंशन देने के लिए केंद्र सरकार से बजट नहीं मिलने का दावा विभागीय अधिकारी कर रहे हैं। केंद्र की ओर से फंड न मिलने के लिए राज्य सरकार ने भी बच्चों को सहायता राशि देने वाली अपनी दोनों योजनाएं स्पॉन्सरशिप स्कीम और मुख्यमंत्री बाल आशीर्वाद योजना रोक दीं है। इन योजनाओं के तहत बच्चों को हर माह 5 हजार रुपये पेंशन दी जाती थी, लेकिन जनवरी 2024 से यह राशि नहीं मिल रही है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि केंद्र सरकार से राशि नहीं मिलने के कारण पेंशन बंद हो गई है। हालांकि मुख्यमंत्री बाल आशीर्वाद योजना के लिए 7.98 करोड़ रुपये की राशि का बजट में प्रावधान किया गया है किंतु पेंशन बंद है। अनाथ बच्चों की मदद करने के मामले में मध्यप्रदेश ने देश में मिसाल कायम की थी। लेकिन ये विडंबना ही है कि अब अनाथ बच्चों के मुुंह से निवाला भी छिन गया है। लोकसभा चुनाव के दौरान आचार संहिता का हवाला देकर आश्वासन दिया गया था कि चुनाव खत्म होते योजना की राशि फिर से बच्चों के खातों में भेजी जाएगी। लेकिन अब लोकसभा चुनाव खत्म होने के छह माह बाद भी बच्चों के खातों में अनुदान राशि नहीं डाली गई है। इस बारे में जब कलेक्ट्रेट जाकर जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कराई गई, तो वहां अफसरों ने बजट नहीं होने का हवाला दिया। इतने संवेदनशील मामले पर भी जब मीडिया ने उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला से पूछा तो उन्होंने इसकी जानकारी ही ना होने की बात कह दी। राज्य स्वास्थ्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल का कहना है कि ऐसा नहीं है, कोरोना काल में जो बच्चे अनाथ हुए हैं उनकी चिंता सरकार को है। इस योजना के तहत नियम से पैसे पहुंच रहे हैं। इधर, कांग्रेस प्रवक्ता आनंद जाट का कहना है कि मध्यप्रदेश कुपोषण, गरीबों, हड़तालियों का प्रदेश पहले से था और अब अनाथ बच्चों की पेंशन बंद होने से ये लगने लगा है कि मध्य प्रदेश अब दिवालिया प्रदेश होने जा रहा है। उन्होंने सीएम मोहन यादव पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री इवेंट प्रचार की यह राजनीति बंद कर देंगे तो इन बच्चों को भरण पोषण के लिए 5 हजार रुपये की राशि दी जा सकती है।बहरहाल, पहले कोरोना ने इन बच्चों के माता-पिता छीन लिए और अब सरकार ने पेंशन। प्रदेश सरकार के अधिकारियों की मानें तो केन्द्र सरकार से फंड नहीं आने के कारण इन योजनाओं पर असर पड़ा है। खबर तो ये भी है कि कर्ज में डूबे मध्यप्रदेश में चल रही और भी योजनाओं पर गाज गिर सकती है। इसमें लाडली लक्ष्मी योजना का नाम भी शामिल है। खैर, एक तो सीएम मोहन यादव धड़ाधड़ घोषणाएं कर रहें हैं और दूसरी तरफ चल रही योजनाओं को रोका जा रहा है। यदि सीएम यादव दूरंदेशी से काम करते हुए कर्ज कम कर पाए तो ये उनकी बड़ी उपलब्धि होगी। कभी मप्र को बीमारू राज्य कहा जाता था और अब कर्ज में डूबा राज्य। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन सिर्री नहीं है कंगना जी सिंगरौली पुलिस के द्वारा लगातार जारी है जागरुकता स्वयंसिद्धा, 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