भोपाल। विशेष संवाददाता -प्रवीण कुमार पाण्डेय -9303816202। प्रदेश के 97 हजार 135 आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को सप्ताह में एक या दो दिन मोटे अनाज से बनी चीजें देने की तैयारी है। साथ ही हर अंचल में वहां की प्रसिद्ध और बच्चों के लिए रुचिकर चीजें दी जाएंगी। आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए उस अंचल में प्रसिद्ध खाने की चीजों के आधार पर पूरे एक सप्ताह के भोजन का खाका तैयार किया जाएगा। मोटे अनाज काफी पोषक तत्व दरअसल, केंद्र और प्रदेश सरकार मोटे अनाज के उत्पादन और उपभाेग को बढ़ावा दे रही है। इसका, बड़ा कारण इनमें प्रचुर मात्रा में उपलब्ध पोषक तत्व हैं। कुपोषण और बीमारियों के कारण शून्य से छह वर्ष के उम्र के बच्चों में से 40 प्रतिशत ठिगनापन और 27 प्रतिशत कम वजन के हैं। इनमें कुछ बच्चे ठिगनापन और कम वजन दोनों के शिकार हैं। इस कारण पोषण आहार में बदलाव की तैयारी है। आंगनबाड़ी सहायिका बनाएगी भोजन दूसरा परिवर्तन यह किया जा रहा है कि आंगनबाड़ी में बच्चों के लिए भोजन बनाने का काम स्व-सहायता समूह की जगह आंगनबाड़ी सहायिका को देने पर विचार चल रहा है। पहले भी सहायिका के पास यह जिम्मेदारी थी। कुछ वर्षों से यह काम स्व-सहायता समूहों को दे दिया गया था।सहायिका आंगनबाड़ी की ही कर्मचारी हैं, इसलिए विभाग के अधिकारियों का मानना है कि वह भोजन बनाने की जिम्मेदारी और अच्छे से संभाल सकती है। हालांकि, स्व-सहायता समूह इसका विरोध कर रहे हैं। मोटे अनाज से बनी चीजों को आंगनबाड़ी केंद्रों के भोजन में शामिल करेंगे। यह भी प्रयास किया जा रहा है जिस अंचल में खाने की जो चीज ज्यादा प्रसिद्ध है, बच्चे अपने घरों में उन्हें खाते हैं। उन्हें आंगनबाड़ी केंद्रों में भी दिया जाएगा। – निर्मला भूरिया मंत्री, महिला एवं बाल विकास विभाग। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन सिंगरौली में “एक पेड़ मां के नाम” वृक्षारोपण महाअभियान। मध्य प्रदेश में 20685 करोड़ की राशि का हिसाब गड़बड़, CAG रिपोर्ट में बड़ा खुलासा