इंदौर। अशीष सिंह। कटते पेड़ों को देखा जाए तो टेंपरेचर के मामले में इंदौर कही राजस्थान से आगे न निकल जाए और स्वच्छता के साथ हाई टेंपरेचर में भी नंबर 1 पर न आ जाए।
मेट्रो के नाम पर कई बड़े- बड़े पेड़ों को काटा गया था वही अब स्मार्ट सिटी के नाम पर भी ना जाने कितने पेड़ों को जड़ से उखाड़ कर नष्ट किया जा रहा है,लाखों पौधे लगाने के लिए,रेवती रेंज इंदौर की पहाड़ियों में पहले से लगे 10 से 15 फिट ऊंचे पेड़ों को जड़ से उखाड़ कर  तहस नहस किया जा रहा है मिली जानकारी के अनुसार सहायक उद्यान अधिकारी चेतन पाटिल और उद्यान दरोगा पवन राठौड़ द्वारा पेड़ो को कटवाने में काफी मेहनत की जा रही है।
एक समय था जब इंदौर को देश विदेश में भी हरियाली के कारण पहचाना जाता था यहां तक कि पंडित जवाहरलाल नेहरु इंदौर को बगीचों वाला शहर भी कहते थे कहां जाता था कि उस समय यहां पर कई बड़े-बड़े बगीचे हुआ करते थे जिससे क्षेत्रों के नाम भी पौधों के नाम पर रखे गए थे जैसे नौलक्खा, बड़वानी चौकी इमली बाजार, खजूरी बाजार इसके जीते जागते उदाहरण हैं। नेहरु जी के राह पर चलते हुए अब इंदौर के कई बड़े नेताओं का सपना है कि वह अपने गली मोहल्लो का नाम  पेड़ों के नाम से रखेंगे। वही इतनी बड़ी सोच रखने वाले नेता बड़े बड़े पेड़ों को कटने से क्यों नहीं रो पा रहे हैं या फिर रोकना ही नहीं चाहते। क्या काटे हुए इन स्थान पर बड़े-बड़े पौधे लगाए जाएंगे या फिर ऐसे ही छोड़ दिए जाएंगे।

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