अंकुल प्रताप सिंह.. बेबाक कलम / प्रदीप चौधरी। इंदौर शहर मध्य प्रदेश का महानगर, जिसे स्वच्छता में सात बार नंबर वन प्राप्त हुआ पर अब लगता है कि कहीं ना कहीं इंदौर शहर प्रदेश में भी अपराध में नंबर वन होगा। इंदौर.खुलासा फर्स्ट के सम्पादक अंकुर जायसवाल पर हमला करने वालों में से तीन आरोपी पकड़े गए. अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कुछ टीम लगी हुई है. जब पुलिस पर हमला हुआ था अगले ही दिन सब आरोपी पकड़े गये । पत्रकार पर हमला होने पर ढीला रवैया अपनाने से क्या लाभ हो रहा है पुलिस को ..!! पत्रकार पर हमला करने वाले तीन धराए… गैंगस्टर भाऊ पकड़ से बाहर..! बीते दिनों शहर में ऐसी हरकते हुई है जिसे शब्दों के ज़रीये आपके सामने लाने में भी संकोच हो रहा है और इंदौर अपराध के मामले में बदनाम होता नजर आ रहा है, इन घटनाओं से शहर की छवि धूमिल होती हुई दिख रही है। शहर के कोने कोने से एक ही आवाज उठ रही है की क्यों इंदौर पुलिस गुंडे बदमाशों पर मेहरबान है,, शहर में कमिश्नरी प्रणाली लागू होने के वावजूद भी । कमिश्नरी प्रणाली लगने के बाद क्राइम का ग्राफ कम होने की जगह बढ़ता जा रहा है जहा एक ओर पुलिस अपराध और अपराधियों को कम करना चाहती है, वहीं पुलिस अधिकारी अपनी एड़ी से चोटी तक का जोर लगाने में पीछे नहीं हटते है, वही अपराध है कि कम होने का नाम नहीं ले रहा । आखिर बदमाशों को पुलिस गिरफ्तार करने मे क्यों राह जाती है बिफल आखिर गुंडे बदमाश किसके बलबूते,पर हस्ते मुस्कुराते अपराध करने के बाद पुलिस के सामने हो जाते है हाजिर आखिर कोन है इनका संरक्षण दाता,किसकी होती है यह साठगांठ इंदौर शहर में हाईकोर्ट के आदेश पर भी पुलिस के हाथ रहे खाली…बम,पुलिस के हाथ लगा नही और उसके पहले ही हो गया डिफ्यूज और उसने लेली अग्रिम जमानत, इस मुद्दे पे एक फरार आरोपी आपके मंच पर था मौजूद, न्याय पालिका के आदेश के बाद क्यू रहा पुलिस की गिरफ्त से दूर. मोहन सरकार से एक सवाल क्या अभी भी पुलिस राजनीतिक दलों के दबाव में है कमिश्नरी प्रणाली होने के बाद भी पुलिस सख्त नही पुलिस के हाथ में पावर नहीं। इंदौर शहर के शहरवासियों की जाबान पर एक ही लब्ज कि हम कहां हैं सुरक्षित,,शहर में सब बिकता हैं बस कीमत सही लगाने वाला होना चाहिए चाहे काम कैसा भी हो l शायाद आप भूल गए, जनाब यह पब्लिक है यह सब जानती है,,,,,अंदर क्या जाता है और जांच में क्या आता है शहर जानता को याद आई शिवराज सरकार क्योंकि मोहन राज में तो अपराधी और अपराध दोनो बढ़ते नजर आ रहे है कुछ समय से बढ़ते अपराधो को देखते हुए ,पुलिस के कार्यों पर भी आवाम उठा रही है प्रश्न चिन्ह शहर में खुद को महफूज अब महसूस नहीं करते इंदौर शहर में, अब हर जगह अपराधी देदे ता है अपराध को अंजाम ..!!! शहर में अपराधियों के हौसले इतने बुलंद होते जा रहे है की पहले वह अपना खोफ रोब,सीधी सादी इंदौर जानता पर दिखाते थे अब कुछ समय से पत्रकार पुलिस जज पर हमले हो रहे है,ऐसा लगता है मानो जैसे इंदौर के अपराधी एक क्षत्र अपना राज चलना चाहाते है पुलिस साए में तभी तो पुलिस के नाक के नीचे बढ़ते जा रहे अपराध..!पहले आम जनता पर होते थे हमले पर अब इतने बेखौफ हो गए हैं बदमाश की पुलिस थाना प्रभारी, पत्रकार, जज पर भी कर देते हैं हमला..! जिस तरह से बाणगंगा पुलिस अपनी वाहवाही लूट रही है, वह आपके सामने है,तीनों आरोपियों के चेहरे से दूर दूर तक यह नजर नही आया की पुलिस द्वारा उन्हें धरदबोचा गया,बल्कि उन बदमाशो के पकड़े जाने पर चेहरे पर खुशी देख पत्रकारों को मुंह चिढ़ाते नजर आए की हमने तुम्हे मारा भी और तुम हमरा कुछ नही कर पाए ,उन तीनो बदमाशो के चेहरे देख ऐसा महसूस हुआ जैसे वह गुंडे अपने ससुराल में मेहमान नवाजी करने आए हो। पिछले कुछ दिनों पूर्व अखबार के संपादक अंकुर जायसवाल पर जानलेवा हमला किया था जिसकी एफआईआर दर्ज की गई ,जिसमें सप्ताह भर बाद ही उन में से तीन अपराधियों को पकड़ कर अपने आपसे साबासी पा कर,पुलिस मुस्कुराहट अपने मुख पर लाई, इंदौर शहर को याद आए वह संजीव शमी पन्ना लाल जैसे अधिकारी जिन्होंने इंदौर शहर को अपराध मुक्त किया था। अब अगर बात की जाए इंदौर के बाद उज्जैन शहर की एक समय था। जब उज्जैन शहर बदमाशों का गढ़ था पर वहां आईपीएस सचिन अतुलकर के प्रभार समालते ही बदमाशों के छक्के छुड़ा दिए गए थे, सारे बदमाश भूमिगत हो गए थे और कुछ अपराधी तो बदमाशी ही भूल गए थे। क्या इंदौर शहर को ऐसा अधिकारी इस समय नहीं मिल सकता..क्या इंदौर की आवाम, पत्रकार,समाजसेवी,को अब डर के माहोल में जीना पड़ेगा क्या होंगा ,लोकमाता अहिल्याबाई की नगरी का अब ? पुलिस से जनता भी नाखुश नजर आती है , कार्यवाही के लिए दर दर फटकना होता है। जिनके पास पैसा और पावर है उनकी सुनवाई भी होती है,पर जिनके पास कुछ नहीं है वह आए दिन अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काटते हैं पर उनका भला कुछ भी नहीं। क्या यही है पुलिस कमिश्नर प्रणाली,जहा आम नागरिक द्वारा मेहनत से कमाई हुई पूंजी से ली हुई जमीन मकान प्लाट पर गुंडे बदमाश भूमाफिया कर लेते है कब्जा और कर लेते है अपने अधीन और तो और शासान, प्रशासन को नजरअंदाज कर, तान देते ही बड़ी बड़ी इमारतें l इंदौर शहर को जरूर है अब पवन श्रीवास्तव,सचिन अतुलक,सचिन शर्मा,अमित सांघी, हेमन्त चौहान,राकेश सिंह,शशिंद्र चौहान डाक्टर शिवदयाल आरके सिंह, भगवत सिंह बिरदे,जैसे सख्त अधिकारियों की अपराध और अपराधियों को रोकने का एक ही उपाय मुंबई की तर्ज पर मिनी मुबई कहलाने वाले इंदौर में भी हो एनकाउंट जैसी कार्यवाही Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन इंदौर लोकायुक्त की कार्यवाही नशा लेने से 3 भाइयों को एड्स:पिता नशा बेचते थे, उन्हें देख बेटे भी एडिक्ट हुए..!