इंदौर । प्रदीप चौधरी। वर्ष 2024 में क्राइम ब्रांच इंदौर में प्राप्त ऑनलाइन फ्रॉड की शिकायतों में 02 करोड़ 13 लाख से अधिक रुपए सकुशल आवेदकों को करवाए रिफंड।

सायबर पाठशाला अभियान के तहत् हजारों लोगों को सायबर अपराध से बचने के तरीके बताते हुए जागरूक किया।

इंदौर कमिश्नरेट में लोगों से छलकपट कर अवैध लाभ अर्जित करते हुये आर्थिक ठगी करने वाले की पहचान कर विधिसंगत कार्यवाही करते हुये उनकी धरपकड़ करने हेतु प्रभावी कार्यवाही के निर्देश वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दिए गए हैं। उक्त निर्देशों के अनुक्रम में ऑनलाइन ठगी की शिकायतों में क्राइम ब्रांच इंदौर की फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन टीमों को लगाया गया है  ।

  इसी कड़ी में क्राइम ब्रांच इंदौर पुलिस द्वारा संचालित cyber helpline, citizen cop, NCRP पोर्टल आदि विभिन्न माध्यमों से प्राप्त ऑनलाइन फ्रॉड की शिकायतों पर क्राइम ब्रांच इंदौर की फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन सेल द्वारा आवेदकों से फ्रॉड की सम्पूर्ण जानकारी लेकर त्वरित कार्यवाही कर आवेदकों के पैसे ठग से वापस कराने का कार्य निरंतर कर रही है।
     
क्राइम ब्रांच टीम द्वारा ऑनलाइन फ्रॉड की शिकायतों में वर्ष 2021 में 01 करोड़ 37 लाख  रुपए आवेदकों को वापस कराए गए थे, जबकि पुलिस कमिश्नरेट लागू होने के बाद वर्ष 2022 में 03 करोड 92 लाख रुपए रिफंड कराए, जो बढकर वर्ष 2023 में यह रिफंड राशि 4 करोड़ 32 लाख रुपए आवेदकों के खाते में सकुशल वापस कराए गए थे।
इसी अनुक्रम में वर्ष 2024 (जनवरी से अप्रैल) के शुरू के केवल चार माह में आवेदकों के 02 करोड़ 13 लाख से अधिक राशि सकुशल वापस कराई गई एवं आवेदकों को ऑनलाइन फ्रॉड से बचाव के लिए साइबर पाठशाला जैसे अभियान के माध्यम से लाखों लोगों को जागरूक किया गया,और ये अभियान निरंतर जारी है।



👉 निम्नलिखित तरीको का उपयोग कर ठग द्वारा ऑनलाइन ठगी की घटना को अंजाम दिया गया :–

(1). लोगो को ठग द्वारा कॉल कर स्वयं को बैंक अधिकारी बताकर क्रेडिट/डेबिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने, गिफ्ट वाउचर रिडीम करने एवं एनुअल चार्जेस कम करने का बोलकर की जाने वाली ठगी।

(2).लोगो के द्वारा जल्दबाजी एवं विश्वसनीयता की जांच किए बिना ईकॉमर्स वेबसाइट, कोरियर, बैंक एवं वालेट्स कंपनी आदि के फर्जी Customer Care नंबर Google पर सर्च करने पर ठग से संपर्क होने पर की गई ठगी।

(3).ठग द्वारा परिचित बनकर झूठी निजी परेशानी बताकर तत्काल मदद ले नाम से फर्जी कॉल एवं सोशल मीडिया के माध्यम से संपर्क करके पैसे की मांग कर करते है ठगी।

(4).ठग द्वारा बैंकिंग व बिजली विभाग के अधिकारी या अन्य किसी भी प्रकार का झूठ बोलकर संपर्क करके लोगो के मोबाइल रिमोटली एसेस हेतु Any desk, TeamViewer, quicksuport आदि ऐप डाउनलोड करवाकर करते है ठगी।

(5).फर्जी वेबसाइट, Google फॉर्म,सोशल मीडिया आदि के माध्यम से लोगो की व्यक्तिगत जानकारी प्राप्त कर संपर्क करके उनका OTP, Link, UPI पिन दर्ज करवाकर की जाने वाली ठगी।

(6)ठग द्वार सोशल मीडिया पर फर्जी विज्ञापन एवं वीडियो के माध्यम से Work From Home का प्रचार कर लोगो से संपर्क करके उन्हें पेंसिल/पेन पैकिंग, डाटा एंट्री या टाइपिंग वर्क जैसी फर्जी job दिलाने के नाम से करते है ठगी।

(7).ऑनलाइन लॉटरी, KBC, Gift, कैशबैक, Loan, बीमा एवं फेस्टिवल ऑफर्स में ऑनलाइन शॉपिंग आदि के प्रलोभन देकर ठगी।

(8). सेंट्रल फोर्स(BSF, Army, CISF आदि) के नाम से ठग द्वारा लोगो से उनके प्रोफेशन के हिसाब से झूठ बोलकर की पेमेंट करने के नाम से फर्जी लिंक या QR code भेजकर पेमेंट प्रोसेस करवाते हुए की जाने वाली ठगी।
(जैसे– डॉक्टर्स को कॉल कर फोर्स के स्टाफ का हेल्थ चेकअप के नाम से झूठ बोलकर आदि)।

(9).olx के माध्यम से समान बेचने एवं खरीदने के नाम पर पेमेंट भेजने का झूठ बोलकर OTP एवं UPI पिन दर्ज करवाकर लोगो के साथ की जाने वाली ठगी।

(10). कनेक्शन काटने का बोलकर तत्काल बिजली बिल भुगतान करने के नाम से फर्जी लिंक भेजकर की जाने वाली ऑनलाइन ठगी।

(11). ठग द्वारा सोशल मीडिया पर अनजान आकर्षक प्रोफाइल बनाते हुए लोगो से दोस्ती कर उनका न्यूड वीडियो कॉलिंग का वीडियो रिकॉर्ड कर सेक्सटोर्शन ठगी ।

(12). टेलीग्राम एवं व्हाट्सप ग्रुप के माध्यम से लोगो को Task बेस काम देना, जिसमे शुरू में छोटा इन्वेस्टमेंट में प्रॉफिट देते हुए, बाद में लोगो से बड़ा इन्वेस्टमेंट करवाते हुए की जाती है ठगी।

आमजन को सूचित किया जाता है  आपके साथ किसी भी प्रकार की ऑनलाइन की धोखा–धडी होने पर तत्काल क्राइम ब्रांच इंदौर पुलिस द्वारा संचालित सायबर हेल्पलाइन नं. 704912-4445, NCRP पोर्टल, Citizen Cop एप्लीकेशन आदि माध्यमों से शिकायत करे।


साइबर अपराधियों द्वारा पुलिस, NCB, CBI, RBI और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों का रूप धारण कर साइबर अपराधियों द्वारा ‘ब्लैकमेल’ और ‘डिजिटल अरेस्ट’ की घटनाओं के खिलाफ अलर्ट
ये धोखेबाज आमतौर पर संभावित पीड़ित को कॉल करते हैं और कहते हैं कि पीड़ित ने कोई पार्सल भेजा है या प्राप्त किया है जिसमें अवैध सामान, ड्रग्स, नकली पासपोर्ट या कोई अन्य प्रतिबंधित वस्तु है। कभी-कभी, वे यह भी सूचित करते हैं कि पीड़ित का कोई करीबी या प्रिय व्यक्ति किसी अपराध या दुर्घटना में शामिल पाया गया है और उनकी हिरासत में है। ऐसे कथित “केस” में समझौता करने के लिए पैसे की मांग की जाती है। कुछ मामलों में, पीड़ितों को “डिजिटल अरेस्ट” का सामना करना पड़ता है और उनकी मांग पूरी न होने तक पीड़ित को स्काइप या अन्य वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्लेटफॉर्म पर धोखेबाजों के लिए उपलब्ध रहने पर मजबूर किया जाता है। ये जालसाज़ पुलिस स्टेशनों और सरकारी कार्यालयों की तर्ज पर बनाए गए स्टूडियो का उपयोग करने में माहिर होते हैं और असली दिखने के लिए वर्दी पहनते हैं। देशभर में कई पीड़ितों ने ऐसे अपराधियों के जाल में फंस कर बड़ी मात्रा में धन गंवाया है। यह एक संगठित ऑनलाइन आर्थिक अपराध है और ऐसा माना जाता है कि इसे सीमापार आपराधिक सिंडिकेट द्वारा संचालित किया जाता है। नागरिकों को इस प्रकार की जालसाज़ी से सावधान रहने और इनके बारे में जागरुकता फैलाने की सलाह दी जाती है। ऐसी कॉल आने पर नागरिकों को तत्काल साइबरक्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 या http://www.cybercrime.gov.in पर सहायता के लिए इसे रिपोर्ट करना चाहिए।

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