इंदौर। बेबाक कलम/ अंकुल प्रताप सिंह। प्रदीप चौधरी। इंदौर की राजनीति इस वक्त एक अलग ही अंदाज में देखी जा सकती है। इंदौर में जिस प्रकार से लोकतंत्र का हनन हुआ उससे अलग तरह की पहचान बन गई इंदौर की, इस बात की तो विदेशों में भी हो रही है चर्चा। इंदौर से कांग्रेस प्रत्याशी को जिस प्रकार से बीजेपी में शामिल किया गया, एन वक्त चुनाव के समय… लोकतंत्र के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा हुआ ..?आज अगर खड़ा हुआ प्रत्याशी बिक सकता है तो कल जीता हुआ नेता हमें बेच सकता है,,, बेघर कर सकता है रोजगार, शिक्षा,स्वास्थ्य हर चीज से वंचित कर सकते है। मन में सवाल जनता के उठने लगे हैं कि क्या इसके पहले विधानसभा चुनाव में जीते हुए को हराया गया था ..! या हारे हुए को जीताया गया था..! यह जादू सिर्फ एक व्यक्ति ही कर सकता है क्योंकि नगर निगम चुनाव में भी इस व्यक्ति का जादू चला था। जादू की वजह से जीती हुई सीट कांग्रेस की चली गई थी। और इस बार जिस प्रकार से यह कृत्य हुआ है,,, जिससे कहीं न कहीं कांग्रेस के समर्थन में जनता भी आ गई है, कि लोकतंत्र की इस प्रकार की हत्या नहीं होनी चाहिए। इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया नया इतिहास…देखा जाए तो आज तक इतिहास में इस प्रकार की राजनीति नहीं हुई है की खड़े हुए कैंडिडेट को डरा धमका कर अपने पाले में लिया गया हो और बिना प्रतिद्वंदी के चुनाव हुआ हों। बिना प्रतिद्वंदी के चुनाव जितने की मंशा करना अशोभनीय इंदौर के लिए। राजनीति का गढ़ माना जानें वाल इंदौर शहर….अपके अपनो का भविष्य अपके हाथ…. आज तो संसद के चुनाव में इस प्रकार का हुआ है । कल हमारे देश में अन्य चुनाव में भी इसी प्रकार का माहौल देखने को मिल सकता है.! अगर यही होता रहा तो आने वाले समय में चुनाव की आवश्यकता ही नही होगी। आप खुद ही चुन लीजिए कि मैं राजा, मंत्री, चोर, सिपाही। क्यों जनता के पैसों पर आग लगाना… पूरे भारतवर्ष में चुनाव होता हैं,,,, लोकतंत्र मजबूत करने के लिए , एक अच्छा प्रत्याशी चुनने के लिए जनता अपने बहु मूल्य कीमती वोटो को दान करती है । आने वाले भविष्य में उनके बच्चों का जीवन उज्ज्वल होगा पर इस प्रकार से खरीद फरोक्त से सरकार बनाई जाए ,, जनता को यह बात रास नहीं आएगी।। यह घिनोनी राजनीति बंद करनी होगी इससे आने वाले युवाओं में अलग ही संदेश जाएगा। कल को हमारे देश के नौजवान शिक्षा की ओर अग्रेषित ना होते हुए डिग्री खरीदने का कार्य शुरू कर देंगे। हर पद खरीदे जाएंगे चाहे वह शिक्षा से जुड़े हो या शासकीय कार्यों से या फिर सिविल सर्विस से ,,,, कल कोई एग्जाम ना देते हुए हमारे देश के युवा अपने पैसे के दम पर या डरा धमका कर उस पद को हासिल करने की कोशिश करेंगे तब यह देश उज्जवल भविष्य की ओर नहीं एक अलग ही दिशा पकड़ लेगा। जो की अंधकार की ओर इशारा करता है….!आज कांग्रेस के पास प्रत्याशी न होने की वजह से इंदौर लोकसभा सीट के लिए नोटा का आव्हान कर रहे,,, नोटा आव्हान से बीजेपी में खलबली मची हुई है। किस बात का डर है बीजेपी को,, जब आपका पूरा जिला इंदौर बीजेपी का गढ़ है। पार्षद, विधायक, प्रदेश में काम सब बीजेपी का , फिर किस बात का डर…! फिर क्यों इस प्रकार की राजनीति की गई..! प्रदेश ही नही पूरे भारत में नाम रोशन कर दिया। देश के साथ-साथ विदेश में भी इस राजनीति की चर्चा होने लगी है। इंदौर लोकसभा सीट चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने थे पर अब न होने की वजह से बीजेपी और नोटा बटन आमने-सामने है। नोटा बटन को लेकर कांग्रेस जोरों शोर से प्रचार कर रही,,, सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक गली से लेकर मोहल्ले तक आव्हान किया जा रहा है इस बार तो नोटा बटन ही देगा जवाब… कांग्रेस शायद इस बार नोटा बटन का इतिहास बन जाए, सबसे ज्यादा नोटा ही दबाएं जाने का।कांग्रेस के नोटा बटन से बीजेपी डरी और सहमी नजर आ रही . इसका नजारा वार्ड क्रमांक छः पार्षद का वीडियो वायरल होने के बाद समझ में आया कहीं ना कहीं अंदर घबराहट मची हुई है। जिसकी वजह से किसी की स्वतंत्रता पर इस प्रकार से वार किया जा रहा। एक ऑटो चालक मेहनत मजदूरी अपने परिवार का पेट पालने के लिए इस प्रकार के पोस्टर बैनर लगाकर घूमते हैं। पर आज तक किसी ने इस प्रकार से हटाया नहीं जिस प्रकार से पार्षद महोदय ने हटाया और जो ज्ञान दिया….!!!! बीजेपी को डरने की कोई बात तो थी ही नहीं क्युकी, आचार संहिता लगने के बावजूद भी प्रचार-प्रसार जोरों पर हैं,,सोशल मीडिया से लेकर जमीनी स्तर तक , फोन कॉल से लेकर एसएमएस तक। शहर के हर बड़े-बड़े चौराहों पर बड़े-बड़े होर्डिंग लागे हुए पर फिर भी डर। जनता के दिल और दिमाग पर बीजेपी का राज फिर भी डर…!!!!…..? (इंदौर में चल रही नोटा की लहर से बौखलाईं वार्ड क्रमांक-6 की भाजपा पार्षद संध्या यादव,, ऑटो रिक्शाओं से नोटा के बैनरों को जबरदस्ती निकलवा रही हैं। आठ लाख मतों से जीत का दावा करने वाली भाजपा में नोटा को लेकर आखिर इतनी बेचैनी और घबराहट क्यों है!) बीजेपी में घबराहट इतनी मची हुई है की जीती हुई सीट के लिए एड़ी से चोटी तक का प्रयास करती नजर आ रही..! कांग्रेस के पास प्रत्याशी न होने की वजह से नोटा का ऑप्शन ही बचा था,। नोटा बटन ही था जिसका वह प्रचार आसानी से कर सकते थे जो कि उन्होंने किया पर इंदौर शहर भाजपा का गढ़ होने के बावजूद भी नोटा बटन दबाने से घबराई नज़र आ रही है…! अगर इतने सारे नोटा बटन दबते हैं तो बहुमत की ओर ले जाएंगे अगर बहुमत मिला नोटा को तो 1 महीने बाद पुनः इंदौर सीट पर चुनाव होंगे। चलो जो भी होता है अच्छे के लिए होता है … पर एक नई सीख देकर गए हैं सभी को कि राजनीति में किसी के लिए सही नहीं ..। बीजेपी ने भी बम को लेकर के परेशानी ही खड़ी कर ली है..! अब यह बम कांग्रेस में तो फट चुका है,,, पता नहीं बीजेपी में किस प्रकार से फटेगा…!जिस दबाव में बम बीजेपी में गए थे,,, उस पर तो ऑफिशियल जांच बैठ गई, कोर्ट ने जांच के आदेश दे दिए, अब तो लगता है शायद भगवान भरोसे ही सब चल रहा है।।।।पर आने वाली पीढ़ी के लिए इस प्रकार की राजनीति बंद होनी चाहिए। आपको दल बदलने है तो आप हार जीत करने के बाद बदलें, पर जनता की उम्मीद के साथ खिलवाड़ ना करें क्योंकि जनता बड़ी उम्मीद के साथ एक प्रत्याशी चुनती है,, अपना भविष्य चुनती है। अगर उसके भविष्य के साथ इस प्रकार का खिलवाड़ हो जाए तो स्वाभाविक है डर लगना..! वरिष्ठ पत्रकार अशोक ने जताया “शोक”..मेरे शहर में हुई लोकतंत्र की हत्या..श्रद्धांजलि देने आना पड़ालोकतंत्र बचाओ समिति के आयोजन में पहुंचे अशोक वानखेडे बोले इंदौर में जो लोकतंत्र की हत्या हुआ,उसे श्रद्धांजलि देने आया हूं.. इस शहर में बीजेपी को खूब दिया.लेकिन बीजेपी ने शहर पर कालिमा थोपी..डरा धमका कर जीत हासिल करना,तानाशाही के समान..मेरे अपने शहर में मुझे लोकतंत्र की हत्या पर श्रद्धांजलि देने आना पड़ा,ये दुखद रहा वानखेड़े इंदौर के ही कॉलेज में पढ़े और बड़े हुऐ–अशोक वानखेडे,वरिष्ठ पत्रकार मानो या ना मानो पर राजनीति तो गंदी है,,, पर इतनी गंदी नहीं होनी चाहिए। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन कचरा प्लांट में भीषण आग कुख्यात जिलाबदर बदमाश लखन उर्फ़ लक्की गिरफ़्तार….