(व्यंग्य : विष्णु नागर)

— मान लीजिए श्रीमान, इस बार जनता आपसे कहे कि आप कुछ महीने बाद 74 के होकर 75 वें वर्ष में प्रवेश करने वाले हैं, अब आपकी उम्र आराम करने की है, सेवा करने की नहीं, सेवा करवाने की है, तो क्या आप यह बात मान लेंगे? वैसे भी आपने पिछले दस वर्षों में एक भी दिन आराम नहीं किया है। आपका अधिकार और कर्तव्य भी है कि अब आप पूर्णरूप से आराम करें। स्वास्थ्य को खतरे में न डालें!

— मेरी ईश्वर जनता है। उसकी सेवा करना मेरा धर्म है। जनता भी कहेगी कि मैं आराम करूं, तो मैं मानूंगा नहीं। सेवा का पुण्य कमाऊंगा। सेवा है, तो मेवा है। मेरा विश्वास —  मेवा। मेरा संकल्प — मेवा। मेरी अपने लिए गारंटी —  मेवा। केंद्र में मेवा, परिधि में मुख-सेवा। विपक्ष मुझे मेवे से वंचित करना चाहता है। मैं इस षड़यंत्र को अपने जीते जी सफल नहीं होने दूंगा। मैं मेवा खाकर रहूंगा। मेवा ही सत्य है, बाकी सब असत्य है।

— पर इस उम्र में आपको फल अधिक खाने चाहिए, मेवे नहीं। मेवे भारी होते हैं। उन्हें खाकर आपको अपच हो सकता है।

— अपच तो है मुझे। मेरे भाषण इसी अपच की सच्ची और खरी अभिव्यक्ति हैं।

— अच्छा, मूल बात पर आते हैं। चुनाव में जनता आपकी अभी तक की सभी कुसेवाओं-सेवाओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहे कि अब आप अवकाश लें, तब तो कोई रास्ता बचता नहीं।

— बचता क्यों नहीं है‌? जनता की बात सुनकर हमने आज तक कौन-सा निर्णय लिया है? केवल चार घंटे का समय देकर नोटबंदी मैंने जनता से पूछकर की थी? जनता की बात सुनकर मैंने कोरोना के समय लाकडाउन घोषित किया था? जनता ने कहा था कि किसानों का नहीं, कारपोरेट दुनिया के इन रईसों  का कर्ज माफ करो? क्या जनता की मांग पर हमने अभूतपूर्व महंगाई बढ़ाई है, बेरोजगारी को  प्रोत्साहित किया है? क्या यह जनता की हार्दिक इच्छा थी कि उसे सस्ता गैस सिलेंडर और पेट्रोल-डीजल नहीं चाहिए? क्या सेना में जाने की तैयारी करने वाले युवकों से पूछकर मैंने अग्निवीर योजना लागू की थी? एक भी उदाहरण देकर बताओ कि मैंने फलां काम जनता की मर्जी से किया? क्या बुलेट ट्रेन मैं जनता से पूछकर चलवा रहा हूं? क्या जनता ने कहा कि ये बड़ा-सा बंगला आपको फबता नहीं, आप तो अपने लिए महल बनवाओ?

— ये आप क्या उल्टी-सीधी बात कर रहे हैं? आप नेता हैं।
अभी आप खुद भी जनता की सेवा की बात कर रहे थे और अब आप जनता के खिलाफ ही बोल रहे हैं!

— अरे जनता की सेवा की बात करना मेरा पेशा है। वैसे जनता कुछ होती नहीं। होती तो 15-15 लाख देने, हर साल दो करोड़ रोजगार देने, अच्छे दिन के मेरे झांसे में फंस जाती? और सुनो 2019 तक मैंने इनमें से एक भी बात पूरी नहीं की, तो क्या जनता ने  मुझे इसकी सजा दी या और अच्छा पुरस्कार दिया? 2019 में 2014 से अधिक बहुमत देकर जिताया‌ या नहीं जिताया? ये है जनता की असलियत। जनता एक भ्रम है, एक माया है।जिताता-हराता तो पैसा है। जनता तो निमित्त मात्र है।

— मतलब हार गए, तो भी हटेंगे नहीं ?

— क्यों हटेंगे? बेवकूफ हैं क्या? क्या गद्दी छोड़कर झोला लेकर चल देंगे? इतने सीधे हैं हम, फकीर हैं क्या? हम मन की बात करते हैं, तो मन की बात ही सुनते ही हैं।

— मन क्या ये नहीं कह सकता कि चल बेटा,अब बहुत हुआ, अब तू घर बैठ‌।

— हमारा मन ऐसी बात कभी नहीं कह सकता।

— मगर जनता कहेगी कि ….

— फिर जनता? अरे जनता-जनता करने के अलावा आपको कुछ सूझता भी है?

— दो बार तो आपको जनता ने ही इस पद पर बैठाया?

— यह भी बहुत बड़ी गलतफहमी है। जनता ने नहीं, मेरे जुमलों ने, मेरे झूठ ने, मेरे हिंदू-मुसलमान ने और बड़े-बड़े सेठों के अरबों रुपए ने मुझे इस पद पर बैठाया। जनता की क्या हैसियत, जो मुझे जिताए या हराये? मुझे वोट ने नहीं, नोट ने जिताया है। आज भी नोट मेरे पास है, इसलिए वोट भी मेरे पास हैं।

— मतलब आप हटेंगे नहीं। जनता ने हटाया, तो आपके अटल जी हट गए थे। इंदिरा गांधी से लेकर मनमोहन सिंह तक सभी हट गए थे।

— मैं किसी का अनुयायी नहीं हूं। अपना अनुयायी मैं
स्वयं हूं।

— तो किसके कहने से हटेंगे?

— किसी के कहने से नहीं,जनता के वोट से भी नहीं।

— आपके मालिक कहें। हटने को तो?

— अडानी- अंबानी कभी नहीं कहेंगे।वे जानते हैं, मैं उनका सबसे सच्चा और सबसे लाड़ला सेवक हूं।

— मान लो, मजबूर होकर उन्होंने भी कह दिया तो!

— तो मन की बात सुनूंगा।

— आपका मन क्या कह रहा है?

— हट मत। देश अभी पूरी तरह डूबा नहीं, तेरा कर्तव्य अभी पूरा हुआ नहीं। इसे इतनी अच्छी तरह डुबा, इतना गहरा डुबा कि अगले सौ साल तक यह देश उठ न सके।इतने झगड़े बढ़ा कि सब आपस में लड़ते रहें और तू मज़ा लेता रहे। गृहयुद्ध हो, तो होने दे। घबरा मत, डर मत। डुबा और डुबा। ये डुबेगा तो ही तू तैर सकेगा, किनारे लग सकेगा।

NEWS NATIONAL WORLD's avatar

By NEWS NATIONAL WORLD

NNW NEWS NATIONAL WORLD MP/CG NEWS, समाचार, क्राइम, जन समस्या, पॉलिटिक्स, बॉलीवुड, सामाजिक,इत्यादि। मीडिया समूह का ऑनलाइन हिंदी समाचार पोर्टल है, जो की राजनीति, खेल, मनोरंजन, व्यवसाय, जीवन शैली, कला संस्कृति, पर्यटन से जुड़ी खबरों को हिंदी भाषा में एक ही स्थान पर लेटेस्ट ब्रेकिंग न्यूज के साथ प्रदान करता है। अंकुल प्रताप सिंह,बघेल +91 8516870370 सब एडिटर गौरव जैन इंदौर +91 98276 74717 सह संपादक आमिर खान इंदौर +91 9009911100, प्रदीप चौधरी, संभाग ब्यूरो चीफ इंदौर +919522447447, रीवा जिला ब्यूरो चीफ कुशमेन्द्र सिंह +91 94247 01399.

Leave a Reply

You missed

Discover more from NNWORLD

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading

Discover more from NNWORLD

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading