भोपाल, मप्र। भोपाल। मुस्ताअली बोहरा। अधिवक्ता एवं लेखक इतना भी गुमान न कर अपनी जीत पर ऐ बेखबर,तेरी जीत से ज्यादा चर्चे मेरी हार के हैं….ये शेर भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा पर फिट बैठता है। एक वक्त था जब नरोत्तम को प्रदेश की शिवराज सरकार में नंबर 2 नेता माना जाता था। वे सीएम पद की रेस में शामिल रहे लेकिन पिछला विधानसभा चुनाव हार जाने के बाद मिश्रा सत्ता से बाहर हो गए। भले ही वो वर्तमान में विधायक ना हों और मोहन सरकार में शामिल ना हो लेकिन भाजपाई गलियारों में अब भी उनकी तूती बोलती है। केन्द्रीय नेतृत्व से करीबी और संगठन के प्रति सर्मपण के कारण मिश्रा का दबदबा अभी भी बना हुआ है। मिश्रा को अमित शाह का करीबी माना जाता है। नरोत्तम मिश्रा मध्यप्रदेश की सियासत में भाजपा का ब्राम्हण चेहरा माने जाते हैं। कभी टोपी पहनने और रोजा अफतार करवाने वाले और फिर ज्यादातर माथे पर तिलक लगाने वाले मिश्रा यूं ही नहीं धाकड़ राजनीतिज्ञ कहलाते हैं। साफगोई से हर बात कहने वाले नरोत्तम दतिया से चुनाव हारने की बात खुले मन से स्वीकारते हैं। उनका ये भी कहना है कि अति आत्मविश्वास पराजय की वजह बनी। लोकसभा चुनाव 2024 से पहले और अब तक प्रदेश में जो कांग्रेस में सेंधमारी के साथ कांग्रेस प्रत्याशी के नामांकन वापस लेने और भाजपा में जाने का खेल चल रहा है उसकी बुनियाद नरोत्तम मिश्रा ने ही रखी थी। सूबे में जब कमलनाथ सरकार थी तब उसे गिराने में मिश्रा की महती भूमिका रही है। जिस तरह से उन्होंने भाजपा में लोगों को जोड़ने का अभियान चला रखा है उससे कांग्रेस में भगदड़ मची हुई है। कुछ दिनों पहले ही नरोत्तम मिश्रा ने दावा किया था कि पिछले तीन महीनों में ही ढाई लाख से ज्यादा लोगों ने भाजपा की सदस्यता ली है। इन लोगों में ज्यादातर कांग्रेसी हैं। बीजेपी ज्वाइन करने वालों में सरपंच से लेकर पूर्व सांसद और लोस के घोषित कांग्रेस प्रत्याशी तक हैं। 15 अप्रैल 1960 को ग्वालियर में जन्में नरोत्तम मिश्रा 6 बार विधायक चुने जा चुके हैं। हालांकि, पिछला चुनाव वे हार गए। सन 2008 के विधानसभा चुनाव में चुनाव खर्च के गलत खाते दायर करने और अपने चुनाव अभियान में पेड न्यूज का उपयोग करने और चुनाव खर्च के उचित खातों को प्रस्तुत नहीं करने के लिए भी चर्चा मे रहे। मध्य प्रदेश सरकार में गृह मामलों, कानून और विधायी मामलों, जेल और संसदीय मामलों के मंत्री रह चुके नरोत्तम मिश्रा इन दिनों कांग्रेस की जड़ों में मठा डालने में लगे हैं। वे दतिया निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं। इस निर्वाचन क्षेत्र से वह लगातार तीन बार चुने गए हैं, इससे पहले वह डबरा का भी प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। डबरा सीट आरक्षित हो जाने के बाद उन्होंने दतिया से चुनाव लड़ा। बीजेपी नेता नरोत्तम मिश्रा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा संत कवर राम हायर सेकेंडरी स्कूल, ग्वालियर से पूरी की। इसके बाद कॉमर्स से ग्रेजुएशन किया। उन्होंने हिंदी विषय में मास्टर डिग्री ली और इसी विषय से पीएचडी भी की। वह 1977 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े और फिर भारतीय जन युवा मोर्चा से अपना राजनीतिक सफर शुरू किया। 1998 में जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर से उन्होंने एमए और पीएचडी की है। उनकी पीएचडी का विषय भारतीय लोकतंत्र में विधायक की भूमिका था। उन्होंने जीवाजी यूनिवर्सिटी से एमबीपीएसडी किया। वे वर्ष 1977-78 में जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर के छात्र संघ के सचिव और 1978-80 में मप्र भारतीय जनता युवा मोर्चा की प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य रहे हैं। साल 1993 में उन्होंने डबरा विधानसभा से चुनाव लड़ा लेकिन उन्हें पराजय का मुुंह देखना पड़ा। इसके बाद साल 1998 में चुनाव लड़ा और विधायक निर्वाचित हुए। इसके बाद वर्ष 2003 में भी विधानसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। 2003 में जीत मिलने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर के काबीने में पहली बार नरोत्तम मिश्रा राज्य मंत्री बने थे। उन्होंने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग समेत जल संसाधन, कानून, शिक्षा, आवास और जनसंपर्क मंत्री रहते हुए मध्य प्रदेश की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। जब शिवराज सिंह चैहान मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने भी मिश्रा को अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया। इसके बाद में वो कई महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री रहे। साल 2005 में वह संसदीय कार्य मंत्री और कानून मंत्री बने। वह लगातार 2007 और 2008 में इसी पद पर रहें। उन्होंने 20 अप्रैल 2020 को मध्य प्रदेश सरकार के गृह मामलों और स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री के रूप में शपथ ली। कैबिनेट फेरबदल के बाद, उन्हें गृह मंत्रालय बरकरार रखते हुए कानून और विधायी मामलों, जेल और संसदीय मामलों का मंत्री नियुक्त किया गया। साल 2008 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने पेड न्यूज, चुनाव खर्च के उचित खातों को प्रस्तुत नहीं करने आदि के आरोपों की वजह से चुनाव आयोग ने उन्हें 23 जून 2017 को अयोग्य घोषित कर दिया था। राजेंद्र भारती ने इसकी शिकायत चुनाव आयोग से की थी। चुनाव आयोग ने पाया था कि खबरें पैसे देकर छपवाई गई थीं। चुनाव आयोग ने 2017 में मिश्रा को चुनाव लड़ने से तीन साल के लिये प्रतिबंधित कर दिया था। बावजूद इसके, शिवराज सरकार ने नरोत्तम मिश्रा पर कोई कार्रवाई नहीं की, ना ही उन्हें बर्खास्त किया गया। हालांकि, बाद में नरोत्तम मिश्रा को दिल्ली हाईकोर्ट से राहत मिल गई। लेकिन चुनाव आयोग ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। अदालत से राहत मिलने के बाद उन्होंने 2018 का विस चुनाव लड़ा। साल 2018 के चुनाव में हुए काफी कम वोट के अंतर से जीत पाए थे। महज 2600 वोट से उन्हें जीत मिली थी। तब प्रदेश में बनी भाजपानीत शिवराज सरकार में मिश्रा गृह मंत्री बनाए गए। मंझे हुए राजनीतिज्ञ और कूटनीतिज्ञ डाॅ नरोत्तम मिश्रा ने तत्कालीन कमलनाथ सरकार को कथित रूप से गिराने में अहम भूमिका निभाई। नाथ सरकार में शामिल मंत्रियों और कांग्रेसी विधायकों के साथ उन्होंने संपर्क बनाए रखा और ऐन मौके पर चोट कर दी। पर्दे के पीछे से मिश्रा ने भाजपा और कांग्रेसी के बागियों के बीच सेतू का काम किया। हर मुद्दे पर बेबाकी से राय रखने वाले और अपने बयानों से सुर्खियां बटोरने वाले नरोत्तम मिश्रा की मानें तो पिछले कुछ महीनों में ही ढाई लाख से ज्यादा लोग भाजपा की सदस्यता ले चुके हैं। इनमें से ज्यादातर कांग्रेसी हैं। कोई दूसरा नेता होता चुनाव हार जाने के बाद उसका मनोबल थोड़ा-बहुत टूट जाता लेकिन ये नरोत्तम मिश्रा ही हैं जो पूरे जोशो-खरोश के साथ संगठन और पार्टी को मजबूत बनाने में लगे हुए हैं। उनके पास बुंदेलखंड क्लस्टर की लोकसभा सीटों की जिम्मेदारी है। भाजपा में सदस्यता ग्रहण करवाने का काम वो कर ही रहे हैं। मालूम हो कि केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भाजपा अध्यक्ष रहते हुए मिश्रा को 2019 के लोकसभा चुनाव में कानपुर लोस सीट का प्रभारी नियुक्त किया था। डाॅ मिश्रा 1990, 1998, 2003, 2008, 2013, 2018 के विधानसभा चुनाव में निर्वाचित हो चुके हैं। मिश्रा को मप्र में भाजपा का संकटमोचक के रूप में भी देखा जाता रहा है। 2018 के चुनाव में संख्या बल में कांग्रेस से पिछड़ने के बाद विपक्ष में बैठने वाली भाजपा को सत्ता दिलाने में उनकी खासी भूमिका रही है। नरोत्तम पहली बार साल 2003 में बाबूलाल गौर सरकार में राज्यमंत्री बने और उसकी बाद वे लगातार सियासी बुलंदी हासिल करते चले गए। —– रोजा इफ्तार से लेकर फायर ब्रांड नेता तक ——ज्यादातर माथे पर तिलक लगाए रहने वाले नरोत्तम मिश्रा की छबि कटटर हिन्दुवादी नेता की है। लेकिन सन 2018 में दतिया वे रोजा इफ्तार का आयोजन कर चुके हैं। तब वो दौर था जब नरोत्तम मिश्रा हर साल इस तरह के आयोजन में क्षेत्र के मुसलमानों का स्वागत करते थे। मिश्रा की मंशा होती थी कि क्षेत्र के मुसलमान मतदाताओं के बीच एक अच्छा संदेश जाए। दरअसल दतिया विधानसभा क्षेत्र की आबादी सवा तीन लाख से कुछ ज्यादा है जिसमें चार फीसद मुस्लिम आबादी है। लेकिन समय बदला तो सियासी अंदाज भी बदल गया और मिश्रा ने अपनी छबि कटटर हिंदुवादी नेता वाली गढ़ ली। शिवराज सरकार में मत्री रहते हुए वो कई बार विवादित बयानों के कारण सुर्खियों में रहे। मसला चाहे मध्यप्रदेश का हो या फिर देश-विदेश का, धर्म का हो या फिल्म का, राजनीति का हो या संस्कृति का जो भी मिश्रा का बयान हमेशा तैयार रहा करता है। दिग्विजय सिंह से लेकर राहुल गांधी तक विपक्ष के बड़े नेताओं को वो निशाने पर लेते रहे हैं। मिश्रा ने तब ज्यादा सुर्खियां बटोरी थी जब उन्होंने शाहरूख खान की फिल्म जवान के एक गाने में दीपिका पादुकोण के कास्टयूम के कलर को लेकर आपत्ति जताई थी। इसके अलावा रामायण पर आधारित आदिपुरूष के निर्माताओं को चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा था कि हिंदु धार्मिक हस्तियों को गलत तरीके से दिखाया गया है। मिश्रा, हेमा मालिनी को लेकर भी विवादित टिप्पणी कर चुके हैं। मिश्रा ने कहा था कि दतिया ने उड़ान भरी तो हेमा मालिनी को भी नचवा दिया। सनी लियोनी के गाने मधुबन में राधिका नाचे गाने के वीडियो को लेकर आपत्ति जताई थी। इतना ही नहीं डाबर कंपनी के करवा चैथ वाले विज्ञापन को वापस लेने की चेतावनी मिश्रा ने दी थी। मप्र के मदरसों में पढ़ाए जाने वाले कंटेंट की बात हो या फिर खरगौन में हुए उपद्रव को लेकर दिए बयान की बात हो, ऐसे कई मसले हैं जब मिश्रा सुर्खियों में रहे हैं। हालांकि, मिश्रा के बोल बदलने से किसी को ज्यादा हैरत नहीं हुई क्योंकि वो पार्टी गाईड लाईन के हिसाब से ही काम कर रहे थे। शिवराज सिंह चैहान की उदारवादी छबि के उलट नरोत्तम अपनी छबि फायर ब्रांड वाली बना रहे थे। मिश्रा का विवादों से भी नाता रहा है। नरोत्तम मिश्रा और उनके रिश्तेदार बंटी के खिलाफ एक बड़ा मामला दतिया की भांडेर तहसील में दर्ज हुआ था। डबरा के एक व्यापारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए एसीजेएम कोर्ट दतिया ने मिश्रा और उनके रिश्तेदार को आरोपी बनाया। व्यापारी का आरोप था कि मंत्री और उनके रिश्तेदार उसका मकान हड़पने के लिए पुलिस से उसका टार्चर करवा रहे थे। —- जीवन परिचय —— पिता का नाम- स्व. श्री डॉ. शिवदत्त मिश्राजन्म तिथि – 15 अप्रैल,1960जन्म स्थान- ग्वालियरपत्नी – श्रीमती गायत्री देवी मिश्रासंतान- 2 पुत्र,1 पुत्रीशैक्षणिक योग्यता – एम.ए., पी.एच.डी.रुचि – जनसेवा, लोक संगीत, वृक्षारोपण, साक्षरता, कविताएं सुननास्थायी पता – बंगला नं. डी-1, राजघाट कालोनी, दतिया, जिला-दतिया(म.प्र.) दूरदूभाष-(07524) 222270 मोबाइल-9425117366 ——— छात्र संघ से गृह मंत्री तक —–-1977-78 में जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर छात्र संघ के सचिव-1978-81 में मध्यप्रदेश भारतीय जनता युवा मोर्चा की प्रांतीय कार्यकारिणी के सदस्य– 1985-87 में मध्यप्रदेश भा.ज.पा. की प्रांतीय कार्यकारिणी के सदस्य– पहली बार 1990 में भाजपा उम्मीदवार के तौर पर डबरा सीट से चुनाव जीत कर विधानसभा पहुंचे-1990 में नौवीं विधान सभा के सदस्य निर्वाचित एवं लोक लेखा समिति के सदस्य तथा सचेतक – भा.ज.पा. जिला ग्वालियर ग्रामीण के महामंत्री– प्रदेश भा.ज.पा. के सदस्य-डबरा विधानसभा सीट से 1993, 1998 और 2003 का चुनाव भी लड़ा, 1993 को छोड़ दें तो वो हर चुनाव जीतते रहे– 1998 में ग्यारहवीं विधान सभा के सदस्य निर्वाचित एवं प्राक्कलन तथा कार्यमंत्रणा समिति के सदस्य तथा उत्कृष्ट विधायकपुरस्कार से सम्मानित– 2003 से भा.ज.पा. विधायक दल के सचेतक– लोक सभा चुनाव 2004 की प्रबंधन समिति के सदस्य-सन 2003 में बारहवीं विधान सभा के सदस्य निर्वाचित एवं राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)विधि एवं विधायी कार्य, संसदीय कार्य, सहकारिता तदनंतर मंत्री स्कूल शिक्षा, विधिऔर विधायी, संसदीय कार्य तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास, संसदीय कार्य मंत्री रहे तथाउत्कृष्ट मंत्री पुरस्कार से सम्मानित-2008 में डबरा सीट आरक्षित हो गई और इसके बाद दतिया सीट से चुनाव लड़ा– सन् 2008 में तेरहवीं विधान सभा के सदस्य निर्वाचित एवं मंत्री, लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, संसदीय कार्य, विधि औरविधायी कार्य, आवास और पर्यावरण (पर्यावरण को छोड़कर) रहे-सन 2013 में पांचवीं बार विधान सभा सदस्य निर्वाचित. तदनंतर मंत्री, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा, आयुष, भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास, संसदीय कार्य, जल संसाधन, जनसंपर्क रहे– सन 2018 में छटवीं बार विधान सभा सदस्य निर्वाचित, दिनांक 21 अप्रैल, 2020 को मंत्री पद की शपथ एवं मंत्री गृह, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग रहे– 2023 में चुनाव आयोग में दायर चुनावी हलफनामे के मुताबिक उनका पेशा है कृषि। उनकी कुल घोषित संपत्ति है 6.8 करोड़ है, जिसमें 1.4 करोड़ की चल संपत्ति और 5.4 करोड़ रूपये की अचल संपत्ति शामिल है। कुल घोषित आय 16.3 लाख है। उन पर किसी तरह की कोई देनदारी नहीं है।– भजन गायिका लक्ष्मी दुबे ने नरोत्तम मिश्रा का पूरा जीवन गीत के रूप में पेश किया है। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन पोलिंग बूथों पर इतना सन्नाटा क्यों है? धूमधाम से निकाली गईं परंपरागत संस्कार यात्रा