कांग्रेस के युवा और मिलनसार उम्मीदवार राजन मंडलोई की जमीनी स्तर पर है खासी पैठविधानसभा चुनाव 2023 के उम्मीदवार चयन में बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व और संघ का स्यंभू सर्वे में बडवानी विधानसभा में मंत्री प्रेमसिंह पटेल की हालत कमजोर थी प्रेमसिंह के चहरे से यहां बीजेपी को जीत पाना संभव मुश्किल था उसके बावजूद राजनीतिक दबाव के चलते भाजपा ने युवा उम्मीदवारों को दरकिनार कर उम्र दराज प्रेमसिंह को ही अपना उम्मीदवार बनाया है, 2023 की डगर प्रेमसिंह पटेल के लिए आसान नहीं है प्रेमसिंह की कार्यशैली से नाखुश भाजपाई भी बड़े बेसब्र होकर चुनाव की तारीख का ही इंतजार कर रहे है, भाजपाई दबे जुबान खुद मंत्री के परिवारवाद को लेकर अपना आक्रोश व्यक्त करते है, भाजपा में दरी बिछाकर पार्टी को संकट के समय झंडा लेकर जनाधार का संघर्ष करने वाले तमाम नेताओं और कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर पार्टी में प्रेमसिंह का परिवारवाद खुल कर सामने आया, जिसका खुल कर विरोध भी होने लगा, मंत्री के परिवारवाद की उल्टी गिनती तब शुरू हुई जब तीन बार की नगर परिषद में अध्यक्ष उनकी बेटी पलसूद नगर परिषद में पार्षद तक का चुनाव हार गई, जबकि पानसेमल विधानसभा क्षेत्र में प्रेमसिंह की बेटी दावेदार थी। इंदौर/बडवानी (कुंवर खेमचंद प्रजापति)निमाड़ की आदिवासी बाहुल्य बड़वानी विधानसभा में बीजेपी के लिए राह अब आसान नहीं है, परिवारवाद को बढ़ावा देते देते मंत्री प्रेमसिंह ने पार्टी के लिए कई मुसीबत मोल ले रखी है। जो अब प्रेमसिंह पटेल और बीजेपी दोनों के लिए संकट के बादल लिए खड़ी है। “पारीवारवाद” और पुत्र मोह ने प्रेमसिंह के निर्वाचन क्षेत्र में बीजेपी को जीत के कोशो दूर तलक छोड़ दिया है जहा से अब जीत तो ठीक टक्कर देने तक की भी स्तिथि बनती नही दिख रही है। एका एक नाखुश कार्यकर्ताओ ने मन ही मन परिवार वाद को खत्म करने का संकल्प ले लिया है, आप को ज्ञात होगा को जब जहा भी पुत्र मोह और परीवारवाद उत्पन्न हुआ है उस राजा का पतन भी अतिशीघ्र ही हुआ है। फिर अब तो घोर कलयुग का दौर है?पुत्र मोह में पार्टी को दी तिलांजितविधानसभा में बीजेपी से चार बार के विधायक को पार्टी ने सरकार में आते ही और आदिवासी चेहरा निमाड़ में मात्र एक ही सीट जीती होने से न चाहते हुए प्रेमसिंह पटेल को राजनेतिक गणित ज्ञान लेकर मंत्री बना दिया, आपको बता दे पार्टी ने प्रेमसिंह को बोहोत कुछ दिया है! प्रेमसिह को पांचवी बार विधानसभा का टिकिट, बेटे को जिला पंचायत में अध्यक्ष, बेटी को नगर परिषद में अध्यक्ष, पत्नी को नगर पालिका में अध्यक्ष बनाया।सूत्र बताते हैं कि इतना सब कुछ देने के बावजूद प्रेमसिंह की महत्वकांक्षा ने पार्टी से बगावत तक कर दी, बेटे को पुनः जिला पंचायत के अध्यक्ष बनाने के लिए पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव लडा। पार्टी के ही सेंधवा विधानसभा का नेताओ के आरोप है की उस चुनाव में प्रेमसिंह ने मंत्री पद का खूब दुरुपयोग किया पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा था। पुत्र मोह में प्रेमसिंह ने जिस तरह पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ बेटे को उतार कर मंत्री पद का दुरुपयोग कर अधिकृत प्रत्याशी को हराया उससे पार्टी में प्रेमसिंह का कद गिरता ही गया। भीतरघात और बगावत के डर से पार्टी ने टिकिट तो दे दिया लेकिन संघ और भाजपा दोनों को ही यह पता है की बड़वानी विधानसभा में हार निश्चित है, इसी को ध्यान में रखते हुए अब तक पार्टी के बड़े नेताओं ने बड़वानी से दूरी बना कर रखी है।राजन मंडलोई कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में मजबूत प्रत्याशीआपकों ज्ञात होगा की होगा की पिछले यानी 2018 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार का कारण पार्टी का टिकिट बटवारे में गलत निर्णय था पार्टी ने 2023 में टिकिट बटवारे में पिछली गलतियों को काफी ध्यान में रखा।2018 में बडवानी में बीजेपी के प्रेमसिंह को 88151 मत मिले थे जबकि निर्दलीय राजन मंडलोई को 49964 मत मिले और कांग्रेस के रमेश पटेल को महज 34084 मत मिले यहां प्रेमसिंह पटेल 38787 मतों से जीते जबकि निर्दलीय राजन मंडलोई दूसरे और कांग्रेस के रमेश पटेल तीसरे नंबर पर रहे। गलत प्रत्याशी चयन कर कांग्रेस ने बड़वानी विधानसभा तो हारी पर अब सबक के साथ चुनाव मैदान में है। कांग्रेस ने राजन मंडलोई को उम्मीदवार घोषित किया है इलाके में राजन मंडलोई को खासी पेठ है वे हर आम जन का काम करते नजर आते है मेरे सर्वे के दौरान भी आदिवासी इलाकों में राजन मंडलोई के लिए तारीफे सुनी लोगो ने बताया केसे आधी रात को जनता के काम के लिए राजन मंडलोई हॉस्पिटल से लेकर हर जगह उपलब्ध हो जाते है, कई ने बताया कि राजन भाई हमारे सभी केस लड़ते है और उसकी फीस भी नही लेते अगर राजन मंडलोई को टिकिट मिली तो हम 50 हजार से जिताएंगे। मेरे पत्रकारिता के क्षेत्र में पहली बार किसी नेता के प्रति आम जनता के यह भाव देखें मेने देश के कोने कोने से स्टोरी की है लेकिन विधानसभा क्षेत्र बड़वानी में मुझे किसी नेता को तारीफे सुनने को मिली जबकि में बुधनी भी गया किंतु शिवराज सिंह के सीएम रहते भी जनता में वो पैठ अपनी निर्वाचन विधानसभा में भी नही देखी! बहरहाल चुनावों को तारीखों का एलान हो चुका है संभवत ही अब 17 नवंबर को वोट पड़ेंगे जिसमे कोन कहा तक बाजी मरेगा ये तो 3 दिसंबर को हो तय होगा किंतु कांग्रेस ने टिकिट बटवारे में जिस तरह के सर्वे कराए उससे कांग्रेस को आंधी सफलता तो पहले ही मिलती दिख रही है। ( लेखक स्वतंत्र खोजी पत्रकार है ) Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन अघोषित इमर्जेंसी या घोषित चुनावी तानाशाही? अवैध रेत परिवहन करते हुए ट्रेक्टर को गोरबी पुलिस ने पकड़ा।