छत्तीसगढ़ कोरबा। अखिल भारतीय किसान सभा से संबद्ध छत्तीसगढ़ किसान सभा ने एसईसीएल गेवरा क्षेत्र के लक्ष्मण प्रोजेक्ट के पास रेल विस्तार कार्य से प्रभावित होने वाले आदिवासी परिवारों के लिए बुनियादी मानवीय सुविधाएं और आम रास्ता उपलब्ध करने की मांग को लेकर गेवरा-भैंसमाखार के ग्रामीणों के साथ मिलकर पूर्व चेतावनी अनुसार रेल विस्तार और नए साइलो निर्माण के कार्य को रोक दिया। दीपका तहसीलदार द्वारा किसानों को आम रास्ता दिलाने के लिए पहल करने के आश्वाशन के बाद आंदोलन समाप्त हुआ।उल्लेखनीय है कि मनगांव के नजदीक लक्ष्मण प्रोजेक्ट के पास नए साइलो निर्माण के साथ रेल विस्तार का काम तेजी से हो रहा है, लेकिन रेल लाईन पार करने के लिए आम रास्ता नहीं छोड़ा जा रहा है। इस संबंध में जिला प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन के अधिकारियों को ज्ञापन दिया गया था, लेकिन किसी ने इस समस्या के प्रति गंभीरता नहीं दिखाया, जिससे किसानों में काफी आक्रोश था। इसलिए प्रभावितों ने किसान सभा के साथ मिलकर काम को बंद कराया।5 घंटे कार्य बंद होने से एसईसीएल प्रबंधन के हाथ-पांव फूलने लगे थे। एसईसीएल के अधिकारी दीपका तहसीलदार के साथ आंदोलन स्थल पर पहुंचे और समस्या हल करने का आश्वासन दिया। ध्यान रहे कि गेवरा-भैसमाखार के ग्रामीण पीढ़ियों से यहां निवासरत हैं। यह क्षेत्र शहरी क्षेत्र नगर निगम अंतर्गत आता है, इसके बावजूद अभी तक इनके घरों तक सड़क, बिजली, पानी नहीं पहुंचा है। एसईसीएल के अधिकारियों ने ग्रामीणों के पेयजल समस्या को देखते हुए हैंडपंप लगाने और सोलर लाईट की व्यवस्था जल्द करने का आश्वाशन दिया है।किसान सभा के कोरबा जिला सचिव प्रशांत झा और अध्यक्ष जवाहर सिंह कंवर ने सभी ग्रामीणों को उनकी एकजुटता के बल पर संघर्ष में मिली सफलता पर बधाई दी है। आंदोलन में प्रमुख रूप से दामोदर श्याम, गणेश बिंझवार, जय कौशिक, राजकुंवर, बसंता बाई, राजकुमारी, घसनीन बाई, मीरा बाई, फूल कुंवर,गायत्री बाई, बंधन राम, गंभीर सिंह, भगत राम, प्रेमलाल, प्यारे लाल, रविन्द्र कुमार के साथ बड़ी संख्या में प्रभावित किसान उपस्थित थे। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन वन संरक्षण कानून में संशोधन विधेयक: उदारीकरण और केंद्रीकरण की दिशा में आदिवासियों पर एक और हमला। बदनाम होगा, तो भी राम का नाम होगा!(व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा)