इंदौर। राहुल देवड़ा। ” भारत जोड़ो यात्रा ” 2023/24 राज्यसभा और लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए कितनी प्रभावशाली रहेगी ?भारत जोड़ो यात्रा कांग्रेस द्वारा शुरू किया गया एक जन आंदोलन था जिसका उद्देश्य नई दिल्ली में भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की कथित विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ देश को एकजुट करना है। इसे कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं सांसद राहुल गांधी और तमिल नाडु के मुख्यमंत्री मुथुवेल करुणानिधि स्टालिन द्वारा 7 सितंबर, 2022 को कन्याकुमारी में शुरू किया गया था। इसे मूल्य वृद्धि, बेरोजगारी, राजनीतिक केंद्रीकरण और विशेष रूप से “भय, कट्टरता” की राजनीति और “नफरत” के खिलाफ लड़ने के लिए भारत जोड़ो यात्रा निकाली गई।।भारत एक ऐसा देश है जहां पे कई राजनीतिक विचारधारा हैं , जिसके चलते नेता अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकते हैं और कुछ अलग करते हैं बस यही चलता रहता है हमारे देश में और यह चलता भी रहेगा ।।ऐसा ही कुछ महीने पहले हुआ था जब कांग्रेस नेता एवं सांसद राहुल गांधी ने “भारत जोड़ा यात्रा” निकाली थी । यह बहुत बड़ी यात्रा थी इसमें कांग्रेस के साथ कई विपक्षी दल भी शामिल हुए, यात्रा 7 सितंबर 2022 को कन्याकुमारी से शुरू हुई और यह 30 जनवरी 2023 को कश्मीर मे समाप्त हुई । इस यात्रा मे पूरा यूपीए गठबंधन शामिल हुआ और यात्रा देश के बड़े-बड़े शहरों से होकर गुजरी थी।“भारत जोड़ा यात्रा” एक ऐसी यात्रा थी जो देश को जोड़ने के हिसाब से निकाली गई थी जिससे भ्रष्टाचार को खत्म किया जा सके तथा युवाओं को जागरूक करें । इस पूरी यात्रा का सबसे बड़ा उद्देश्य मूल्य वृद्धि, बेरोजगारी , राजनीतिक केंद्रीकरण , और विशेष रूप से “भय , कट्टरता” था इन्हीं सब बातों को लेकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस यात्रा को लेकर निकली थी और इस यात्रा की राहुल गांधी के साथ तमिल नाडु के मुख्यमंत्री मुथुवेल करुणानिधि स्टालिन ने कन्याकुमारी से शुरू किया था ।यह कोई पहली यात्रा नहीं थी…श्री चन्द्र शेखर ने 6 जनवरी 1983 से 25 जून 1983 तक दक्षिण के कन्याकुमारी से नई दिल्ली में राजघाट (महात्मा गांधी की समाधि) तक लगभग 4260 किलोमीटर की मैराथन दूरी पैदल (पदयात्रा) तय की थी। उनके इस पदयात्रा का एकमात्र लक्ष्य था लोगों से मिलना एवं उनकी महत्वपूर्ण समस्याओं को समझना।उन्होंने सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश एवं हरियाणा सहित देश के विभिन्न भागों में लगभग पंद्रह भारत यात्रा केंद्रों की स्थापना की थी ताकि वे देश के पिछड़े इलाकों में लोगों को शिक्षित करने एवं जमीनी स्तर पर कार्य कर सकें। और गांधीवादी समाजसेवी बाबा आमटे ने. साल 1984 में जब स्वर्ण मंदिर में सैन्य अभियान (ऑपरेशन ब्लू स्टार) के बाद तनाव का माहौल था उसी साल इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कई जगह हिंसा हुई थी और दिल्ली में सिखों के खिलाफ हुई हिंसा के बाद चारों तरफ तनाव और निराशा का माहौल था, तब गांधीवादी बाबा आमटे ने सांप्रदायिक सद्भाव और राष्ट्रीय अखंडता का संदेश फैलाने के लिए एक यात्रा का ऐलान किया और इसे ‘भारत जोड़ो यात्रा’ नाम दियायुवाओं पर फोकस…“ भारत जोड़ा यात्रा” इसके नाम से ही पता लगता है कि इसमें जोड़ने की बात कही जा रही है। इस यात्रा की सबसे बड़ी बात यह थी कि इसमें देश को एक सूत्र मे बांधना तथा युवाओं को एक समूह मे लाना , क्योंकि अगर आज के वर्तमान समय और परिस्थिति को देखें तो पता लगता है कि युवाओं का प्रतिशत ज्यादा है । इसलिए सभी राजनीतिक पार्टियां सदैव युवाओं को एकत्रित करने मे लगी रहती हैं।वर्तमान समय मे देखा जाए तो कई राज्यों मे विधानसभा चुनाव हैं जैसे मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान आदि ये सभी देश के महत्वपूर्ण राज्य हैं जो भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और इन चुनावों मे भी भारत जोड़ा यात्रा का बहुत ज्यादा प्रभाव पड़ने वाला है क्योंकि देश में पहली चीज तो बेरोजगारी बढ़ती जा रही है और देश मे युवाओं को रोजगार चाहिए वो कहीं बाहर नहीं जाना चाहते हैं। इसी कारण भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस एवं राहुल गांधी ने युवाओं को साथ लेकर चले और इस यात्रा मे सबसे ज्यादा युवा ही आते थे, इसलिए देख सकते हैं कि भारत जोड़ा यात्रा का विधानसभा चुनाव मे बहुत ज्यादा प्रभाव दिखने वाला है।2023/24 विधानसभा और लोकसभा चुनाव में कितना प्रभाव रहेगा।इस पूरी “भारत जोड़ा यात्रा” का सबसे बड़ा प्रभाव 2024 के लोकसभा चुनाव मे भी पड़ने वाला है , क्योंकि देश की जनता ने अभी तक विकास एवं रोजगार के नाम के नाम पर वोट किया था लेकिन वो इन सभी मुद्दों से नाखुश है। अब देश मे जो यात्रा निकाली गई उसमे सबसे ज्यादा रोजगार और विकास की बातें कही गई थी। इसलिए कहा जा सकता है कि “भारत जोड़ा यात्रा” का प्रभाव लोकसभा चुनावों मे विपक्षी दलों के पक्ष मे देखने को मिल सकता है ?भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस जिसे यूपीए भी कहते हैं इसने पूरी यात्रा मे सबसे ज्यादा सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी ( एनडीए) का विरोध किया क्योंकि बीजेपी आज के समय मे देश की सबसे बड़ी पार्टी बनकर स्थापित है और इसने देश मे कई ऐसे मुद्दों के साथ सामने आई जिसे वो नहीं कर सकी, इन्हीं सब कारणों से जनता नाखुश है और इसका सबसे ज्यादा फायदा विपक्षी दलों को हुआ तथा विपक्षी दलों ने बार-बार सत्ताधारी दल के मुद्दों को उठाया और जनता के सामने ले गई । जिसके चलते सत्ताधारी दल का काफी विरोध भी हुआ और इसका प्रभाव चुनाव मे देखने को मिलेगा ।। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन इन्दौर विजय नगर थाना परिसर में लगी आग, सीपीआर ट्रेनिंग की कार्यशाला का आयोजन।