मुंबई/गोवा। दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। गुरुवार सुबह गोवा स्थित उनके आवास पर उनकी तबीयत बिगड़ी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। चिकित्सकों के प्रयास के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।नाना पाटेकर का निधन भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। दमदार अभिनय, प्रभावशाली संवाद अदायगी और सादगीपूर्ण व्यक्तित्व के लिए पहचाने जाने वाले नाना पाटेकर ने हिंदी और मराठी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई। ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अब तक छप्पन’, ‘वेलकम’ और ‘नटसम्राट’ जैसी फिल्मों में उनके यादगार अभिनय को लंबे समय तक याद किया जाएगा।अभिनय के साथ नाना पाटेकर सामाजिक सरोकारों से भी जुड़े रहे। वे किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर सक्रिय रहे तथा किसान परिवारों की मदद और ग्रामीण संकट के प्रति अपनी संवेदनशीलता के लिए भी चर्चा में रहे। नाम फाउंडेशन के माध्यम से किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए किए गए उनके कार्यों का भी उल्लेख किया जाता है।नाना पाटेकर की कला में संवेदना, व्यक्तित्व में सादगी और सामाजिक सरोकारों में प्रतिबद्धता दिखाई देती थी। उनके निधन से फिल्म जगत के साथ-साथ उनके प्रशंसकों और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों में भी शोक की लहर है।नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि देते हुए उनके प्रशंसकों ने कहा कि उनकी कला और सामाजिक कार्यों की विरासत लंबे समय तक याद की जाएगी। नाना पाटेकर : अभिनय से सामाजिक सरोकार तक का सफरपूरा नाम : विश्वनाथ पाटेकरजन्म : 1 जनवरी 1951जन्मस्थान : मुरुड-जंजीरा, महाराष्ट्रक्षेत्र : अभिनेता, निर्देशक और लेखकनाना पाटेकर का वास्तविक नाम विश्वनाथ पाटेकर था। उनका जन्म 1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र के मुरुड-जंजीरा में हुआ। उन्होंने मुंबई के सर जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट से शिक्षा प्राप्त की और आगे चलकर भारतीय सिनेमा के सबसे प्रभावशाली अभिनेताओं में अपनी पहचान बनाई।नाना पाटेकर ने वर्ष 1978 में फिल्म ‘गमन’ से हिंदी सिनेमा में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने हिंदी और मराठी फिल्मों में कई यादगार भूमिकाएं निभाईं। ‘सलाम बॉम्बे!’, ‘परिंदा’, ‘अंगार’, ‘तिरंगा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘खामोशी: द म्यूजिकल’, ‘अब तक छप्पन’, ‘वेलकम’ और मराठी फिल्म ‘नटसम्राट’ सहित कई फिल्मों में उनके अभिनय को दर्शकों और समीक्षकों ने सराहा।फिल्म ‘क्रांतिवीर’ के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया। ‘परिंदा’ और ‘अग्निसाक्षी’ में उनके अभिनय के लिए भी उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला। उनके शानदार फिल्मी योगदान के लिए वर्ष 2013 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया।नाना पाटेकर केवल अभिनय तक सीमित रहने वाले कलाकार नहीं थे। वे सामाजिक सरोकारों और ग्रामीण समस्याओं को लेकर भी सक्रिय रहे। वर्ष 2015 में अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ उन्होंने नाम फाउंडेशन (NAAM Foundation) की शुरुआत की। संस्था का उद्देश्य सूखा प्रभावित क्षेत्रों, किसानों, जल संकट और ग्रामीण विकास से जुड़े मुद्दों पर काम करना रहा है।नाम फाउंडेशन के माध्यम से किसानों और ग्रामीण परिवारों को आर्थिक सहायता देने, जल संरक्षण, गांवों के विकास तथा कृषि से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए विभिन्न स्तरों पर काम किया गया। संस्था के अनुसार, किसानों के संकट और महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति ने नाना पाटेकर और मकरंद अनासपुरे को इस दिशा में काम करने के लिए प्रेरित किया।नाना पाटेकर की पहचान उनकी दमदार संवाद अदायगी, सहज अभिनय और अलग अंदाज के लिए रही। उन्होंने गंभीर, सामाजिक, नकारात्मक और हास्य भूमिकाओं में अपनी अलग छाप छोड़ी। पर्दे पर उनके अभिनय के साथ-साथ किसानों और ग्रामीण समाज से जुड़े मुद्दों के प्रति उनकी सक्रियता ने उनके व्यक्तित्व को एक अलग पहचान दी।नाना पाटेकर का फिल्मी सफर अभिनय, संघर्ष, सादगी और सामाजिक सरोकारों की ऐसी कहानी है, जिसे भारतीय सिनेमा लंबे समय तक याद रखेगा। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन छात्रों के साथ कथित पुलिस बर्बरता को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन, मुख्यमंत्री का पुतला फूंका इंदौर की स्वच्छता व्यवस्था को लेकर कर्मचारी संगठनों और वाल्मीकि समाज की पंचायतों ने दिया सहयोग का आश्वासन