नई दिल्ली। छात्र प्रदर्शन के दौरान घायल हुए 19 वर्षीय साहिल लोचब से जुड़े मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में करीब साढ़े छह घंटे तक धरना दिया। उनके साथ कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और पार्टी के अन्य नेता भी मौजूद रहे। देर रात पुलिस द्वारा मामला दर्ज किए जाने के बाद धरना समाप्त हुआ। मामला 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान साहिल लोचब को पैलेट गन से लगी चोटों से जुड़ा बताया जा रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान छात्र घायल हुआ, लेकिन शिकायत के बावजूद पुलिस ने तत्काल प्राथमिकी दर्ज नहीं की। पीड़ित छात्र और उसकी मां को लेकर थाने पहुंचे राहुल बताया गया कि राहुल गांधी घायल छात्र साहिल लोचब और उसकी मां के साथ पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने पहुंचे थे। यहां उन्होंने छात्र को लगी चोटों के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की। कांग्रेस नेताओं के अनुसार, शुरुआत में पुलिस अधिकारियों ने मामला दर्ज करने में असमर्थता जताई और उच्च स्तर से निर्देश मिलने की बात कही। इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और कांग्रेस के अन्य नेताओं ने थाने के भीतर ही धरना शुरू कर दिया। कई घंटे तक चले इस घटनाक्रम के दौरान कांग्रेस नेताओं ने पुलिस की कार्यप्रणाली और कार्रवाई में देरी को लेकर सवाल उठाए। राहुल गांधी ने गृह मंत्री पर साधा निशाना धरने के दौरान राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली पुलिस पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान एक छात्र की आंख में पैलेट लगने के मामले में प्राथमिकी दर्ज नहीं करना गंभीर विषय है। राहुल गांधी ने कहा कि यदि किसी छात्र को प्रदर्शन के दौरान चोट लगी है तो उसकी शिकायत पर कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने इसे संविधान और नागरिकों के अधिकारों से जोड़ते हुए पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए। देर रात दर्ज हुई प्राथमिकी कई घंटे तक चले धरने और राजनीतिक गतिविधियों के बाद दिल्ली पुलिस ने देर रात मामले में प्राथमिकी दर्ज की। प्राथमिकी की प्रति मिलने के बाद राहुल गांधी ने अपना धरना समाप्त किया। कांग्रेस ने इसे पीड़ित छात्र को न्याय दिलाने की दिशा में पहला कदम बताया है। हालांकि, पूरे मामले में पुलिस की ओर से कार्रवाई, प्राथमिकी में दर्ज धाराओं और पैलेट गन से चोट लगने की परिस्थितियों को लेकर आधिकारिक जांच के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी। इस घटनाक्रम ने दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली और छात्र प्रदर्शनों के दौरान बल प्रयोग को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस छेड़ दी है। अब निगाह इस बात पर है कि प्राथमिकी के बाद जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और घायल छात्र को न्याय कब मिलता है। View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन महंगाई पर फिर घिरती सरकार: चीनी से लेकर खाद्य तेल और ईंधन तक बढ़ा दबाव, आखिर आम आदमी को राहत कब? करोड़ों की नकदी मामला: अलमारी के बारकोड ने खोला राज, रिटायर्ड इंजीनियर समेत 4 पर FIR