कोलकाता। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद मुख्यमंत्री Mamata Banerjee के बयान से राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि वह चुनाव नहीं हारी हैं, इसलिए इस्तीफ़ा देने का सवाल ही नहीं उठता।इस बयान के बाद यह सवाल खड़ा हो गया है कि ऐसी स्थिति में संविधान क्या कहता है और मुख्यमंत्री पद पर बने रहने के नियम क्या हैं।संविधान का क्या है प्रावधानभारतीय संविधान का अनुच्छेद 164 राज्य के मंत्रिपरिषद के गठन और राज्यपाल की शक्तियों को परिभाषित करता है। चुनाव के बाद राज्यपाल विधानसभा में दलों की स्थिति का आकलन करते हैं और बहुमत प्राप्त दल या गठबंधन को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करते हैं। इसके बाद मुख्यमंत्री और मंत्रियों का शपथ ग्रहण होता है।अनुच्छेद के अनुसार, यदि कोई मंत्री या मुख्यमंत्री विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य नहीं है, तो उसे छह महीने के भीतर सदन की सदस्यता प्राप्त करनी होती है। ऐसा न होने पर उसे पद छोड़ना पड़ता है।अनुच्छेद 164(1) में यह भी उल्लेख है कि मुख्यमंत्री “राज्यपाल की इच्छा तक” अपने पद पर बने रहते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, राज्यपाल की यह “इच्छा” वास्तव में विधानसभा में बहुमत रखने वाले विधायकों के समर्थन पर आधारित होती है।यदि मुख्यमंत्री बहुमत खो देते हैं और इस्तीफ़ा नहीं देते, तो राज्यपाल मंत्रिपरिषद को बर्खास्त करने का अधिकार रखते हैं।विधानसभा का कार्यकाल भी तयवहीं, संविधान का अनुच्छेद 172 राज्य विधानसभा के कार्यकाल से संबंधित है। इसके अनुसार विधानसभा का कार्यकाल पहली बैठक की तारीख़ से पांच वर्ष का होता है। यदि इससे पहले भंग नहीं किया जाता, तो पांच वर्ष पूरे होने पर यह स्वतः समाप्त हो जाती है।राजनीतिक स्थिति पर नजरममता बनर्जी के बयान के बाद अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या उनके पास विधानसभा में बहुमत का समर्थन है या नहीं। यही तय करेगा कि वह मुख्यमंत्री पद पर बनी रहेंगी या उन्हें संवैधानिक प्रक्रिया का सामना करना पड़ेगा। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन दक्षिण अफ्रीका में आदमखोर मगरमच्छ के पेट से मिले इंसानी अवशेष चुनावी प्रक्रिया पर राहुल गांधी का बड़ा आरोप, बीजेपी पर लगाए गंभीर सवाल