इंदौर, प्रदीप चौधरी।। 07 जनवरी 2026: देश के सबसे स्वच्छ शहर के तमगे से नवाजे गए इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में नर्मदा जल सप्लाई में सीवर का गंदा पानी मिलने से उपजी त्रासदी ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। बुधवार को सप्लाई बहाल करने के बावजूद पाइपलाइन से अचानक दूषित पानी बहने लगा, जिससे आसपास की दुकानें और घर पानी से भर गए। नगर निगम के बार-बार दावों के बावजूद पाइपलाइन की मरम्मत खोखली साबित हुई, और अब तक 18 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। प्रशासन ने इन 18 परिवारों को 2-2 लाख रुपये की सहायता राशि वितरित की है, हालांकि आधिकारिक तौर पर दूषित पानी से सीधे जुड़ी मौतों की संख्या 6-7 बताई जा रही है। शेष मामलों की जांच जारी है। स्थानीय रिपोर्ट्स और निवासियों के अनुसार, मौतों का आंकड़ा 20 तक पहुंच सकता है, जिसमें हाल ही में 70 वर्षीय हरकुंवर बाई और रिटायर्ड पुलिसकर्मी ओमप्रकाश शर्मा जैसी मौतें शामिल हैं। घटना का क्रम और कारण– पाइपलाइन में लीकेज: मुख्य नर्मदा जल लाइन पुलिस चौकी के पास बने टॉयलेट/ड्रेनेज लाइन के नीचे या बगल से गुजर रही थी। लीकेज के कारण सीवर का दूषित पानी सीधे पेयजल में मिल गया।– सप्लाई बहाल करने पर हादसा: बुधवार को प्रशासन ने सावधानी बरतते हुए लोगों को पानी इस्तेमाल न करने की सलाह दी थी। नगर निगम की गाड़ियां अनाउंसमेंट कर रही थीं, लेकिन सप्लाई शुरू होते ही पाइप से गंदा पानी बहने लगा, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।– बीमारी का प्रकोप: ई. कोलाई, शिगेला और अन्य फीकल बैक्टीरिया मिलने से डायरिया, उल्टी और गंभीर संक्रमण फैला। अब तक हजारों लोग प्रभावित हुए, जिसमें 2,450 से अधिक डायरिया के मामले दर्ज हैं। सैकड़ों अस्पताल में भर्ती, कई आईसीयू में हैं। प्रशासन और राजनीतिक प्रतिक्रियानगर निगम ने कई अधिकारियों को निलंबित किया, जिसमें कार्यपालन यंत्री संजीव श्रीवास्तव शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई का ऐलान किया है। हाईकोर्ट ने मामले में मुख्य सचिव को तलब किया और शहर की छवि पर सवाल उठाए। विपक्षी कांग्रेस ने इसे “सिस्टम की विफलता” बताते हुए न्यायिक जांच की मांग की है।इलाके में टैंकरों से साफ पानी की सप्लाई जारी है। स्वास्थ्य विभाग घर-घर सर्वे कर ओआरएस, दवाइयां बांट रहा है। लोगों से अपील है कि जब तक नई पाइपलाइन और क्लोरिनेशन पूरा न हो, नल का पानी इस्तेमाल न करें। कई परिवार अब चाय-खाने तक के लिए बोतलबंद पानी पर निर्भर हैं।यह घटना इंदौर की स्वच्छता की छवि पर गहरा सवाल उठाती है। निवासी लंबे समय से पुरानी पाइपलाइनों, शिकायतों की अनदेखी और रखरखाव की कमी की शिकायत कर रहे थे। अब प्रशासन युद्धस्तर पर नई लाइन बिछाने और जांच का काम कर रहा है, लेकिन लोगों में डर और गुस्सा बना हुआ है। View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन असली चेहरा सामने आया…! इंदौर: भागीरथपुरा के बाद अब कृष्णबाग में दूषित पानी का कहर