इंदौर, 4 जनवरी 2026: मध्य प्रदेश के सबसे स्वच्छ शहर कहे जाने वाले इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में नर्मदा जल आपूर्ति पाइपलाइन में सीवरेज के मिलने से दूषित पानी का संकट गहरा गया है। इस घटना ने पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा दिया है, जहां दूषित पानी पीने से अब तक 10 से 15 लोगों की मौत हो चुकी है (आधिकारिक आंकड़ों में 10 की पुष्टि, जबकि स्थानीय निवासी और कुछ रिपोर्टों में 15 तक का दावा)। मृतकों में एक 6 महीने का नवजात शिशु और कई महिलाएं शामिल हैं। संकट की शुरुआत और लक्षणदिसंबर 2025 के मध्य से ही इलाके के निवासियों ने नल के पानी में बदबू, कड़वाहट और गंदा रंग देखना शुरू किया था। शिकायतों के बावजूद नगर निगम ने तत्काल कार्रवाई नहीं की। जल्द ही उल्टी-दस्त, डायरिया, निर्जलीकरण और बुखार जैसे लक्षण सामने आए। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, अब तक 2,800 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं, जिनमें से 272 से ज्यादा अस्पताल में भर्ती हुए। एमवाय अस्पताल, महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज और अन्य निजी अस्पतालों में मरीजों का इलाज चल रहा है। लैब रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासेमहात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट और अन्य जांचों में पानी के नमूनों से फीकल कोलीफॉर्म, ई-कोलाई (E. coli), क्लेब्सिएला और विब्रियो कोलेरा जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए हैं। पानी में सीवर बैक्टीरिया की मौजूदगी की पुष्टि हुई है, जिससे हैजा जैसी बीमारी की आशंका भी जताई गई है। पाइपलाइन में लीकेज के कारण सीवर का पानी पीने के पानी में मिल गया। प्रशासनिक प्रतिक्रिया और केंद्रीय टीमों का दौरामुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्वयं अस्पतालों का दौरा किया, मरीजों से मिले और मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपए मुआवजे का ऐलान किया। मरीजों का मुफ्त इलाज सुनिश्चित किया गया है। नगर निगम ने कुछ अधिकारियों को निलंबित और बर्खास्त किया है। जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है।केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने गंभीरता से संज्ञान लेते हुए ICMR कोलकाता, AIIMS भोपाल और अन्य विशेषज्ञ टीमों को जांच के लिए भेजा है। क्षेत्र को महामारी प्रभावित घोषित कर दिया गया है। फिलहाल टैंकरों से साफ पानी की सप्लाई की जा रही है और लोगों को पानी उबालकर पीने की सलाह दी गई है।स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल पर सवाल..? विपक्ष और स्थानीय लोगों में इस बात पर रोष है कि स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल (जो उप-मुख्यमंत्री भी हैं) इस गंभीर संकट में सार्वजनिक रूप से कम नजर आए। हालांकि, उन्होंने बयान जारी कर कहा है कि सरकार स्थिति पर नजर रख रही है, मुख्यमंत्री स्वयं अस्पतालों में मरीजों से मिल रहे हैं और प्रभावितों को बेहतर इलाज सुनिश्चित किया जा रहा है। प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं, और यह घटना उसकी नाकामी को उजागर करती है।राजनीतिक बयानबाजीपूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने सरकार पर तीखा हमला बोला, कहा कि “साल 2025 के अंत में इंदौर में गंदे पानी से हुई मौतें प्रदेश, सरकार और व्यवस्था के लिए शर्मिंदगी हैं।” कांग्रेस ने भी सरकार को घेरा और जवाबदेही की मांग की। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है।यह संकट इंदौर की स्वच्छता की छवि पर बड़ा धब्बा है। प्रशासन अब स्थिति नियंत्रित करने के लिए हर स्तर पर सक्रिय है, लेकिन सवाल यह है कि बार-बार की शिकायतों के बावजूद इतनी बड़ी त्रासदी क्यों होने दी गई? View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन लखनऊ: “मैं जांच में सहयोग करने आई थी, मुझे गिरफ्तार नहीं किया गया” – नेहा सिंह राठौर राजनैतिक व्यंग्य-समागम