पुराने प्रतिबंध को धता बताते हुए कर्मचारी पहुंचे ड्यूटी पर, मचा हड़कंप इंदौर। प्रदीप चौधरी।। चूहों के काटने से दो बच्चों की मौत के बाद सफाई-सुरक्षा की नई व्यवस्था लागू करने के नाम पर एमवाई अस्पताल में एक बार फिर विवादास्पद कंपनी (BVG) बीवीजी इंडिया लिमिटेड के कर्मचारी घुस आए। सोमवार सुबह यूनिफॉर्म में बीवीजी के गार्ड और हाउसकीपिंग स्टाफ वार्डों व गेट पर ड्यूटी जॉइन करने पहुंच गए। मेडिकल एजुकेशन विभाग (डीएमई) ने पहले ही साफ कर दिया था कि बीवीजी को किसी भी सरकारी मेडिकल कॉलेज में काम करने की इजाजत नहीं है, फिर भी हाइट्स कंपनी ने सब-कॉन्ट्रैक्ट के जरिए बीवीजी को अंदर घुसा दिया। जैसे ही यह बात सामने आई, एमजीएम मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने हंगामा मचा दिया और ज्यादातर बीवीजी कर्मचारियों को बाहर कर दिया गया। डीएमई ने हाइट्स को दूसरी सख्त चेतावनी जारी करते हुए कहा है,“बीवीजी के किसी भी कर्मचारी का खर्च भुगतान नहीं किया जाएगा। अगर फिर दिखे तो पूरा ठेका रद्द कर दिया जाएगा।” View this post on Instagram डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने साफ कहा, “एमवाई अस्पताल बीवीजी को मान्यता नहीं देगा।” 2018-19 में ही ब्लैकलिस्ट हो चुकी है बीवीजी मध्यप्रदेश सरकार ने साल 2018-19 में इंदौर सहित पांच मेडिकल कॉलेजों से बीवीजी को बाहर का रास्ता दिखाया था। वजहें थीं: बिना वैध लाइसेंस काम करना बायोमेट्रिक मशीनें खराब रखना कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन न कराना स्टाफ की भारी कमी कर्मचारियों को महीनों तक सैलरी न देना इन गंभीर लापरवाहियों के बाद तत्कालीन सरकार ने बीवीजी को प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों-मेडिकल कॉलेजों में ब्लैकलिस्ट कर दिया था। अब फिर वही कंपनी, वही सवाल चूहों की घटना के बाद जिस सफाई और सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने की कसम खाई गई थी, उसी में ब्लैकलिस्टेड कंपनी की वापसी ने सबके सब्र का बांध तोड़ दिया है। डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और मरीज परिजन एक स्वर में पूछ रहे हैं:“जो कंपनी पहले निकाली गई, उसे फिर कैसे घुसने दिया जा रहा है?” अस्पताल के अंदर सफाई और सुरक्षा में आज भी देरी हुई। कई वार्डों में झाड़ू-पोंछा तक नहीं लगा, गेट पर कोई गार्ड नहीं था। मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। आने वाला है तीसरा और आखिरी नोटिस सूत्रों के मुताबिक डीएमई अब हाइट्स को तीसरी और अंतिम चेतावनी देने जा रहा है। इसके बाद ठेका रद्द करने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। एमवाई अस्पताल के इस नए विवाद ने एक बार फिर साबित कर दिया कि व्यवस्थाएं बदलने के बड़े-बड़े दावों के पीछे पुरानी गलतियां फिर दोहराई जा रही हैं।अब देखना यह है कि सरकार इस बार सख्ती दिखाती है या फिर ब्लैकलिस्टेड कंपनी को एक और मौका दे देती है। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन इंदौर में मिलावटखोरों पर प्रशासन की सख्तीबिना लाइसेंस मसाला फैक्ट्री सील, 2500 किलो मसाला जब्त इंदौर आरटीओ में खुलेआम गुंडागर्दी, आरोपी अभी भी पुलिस के लंबे हाथों से दूर…?