नई दिल्ली, 14 नवंबर: सुप्रीम कोर्ट ने पारिवारिक संपत्ति विवादों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में गुरुवार को बड़ा फैसला सुनाया, जिससे लाखों परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है। जस्टिस बी.आर. गवई और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि कोई परिवार सदस्य अपनी संपत्ति में अपना हिस्सा छोड़ने का लिखित दस्तावेज साइन करता है, तो वह दस्तावेज साइन होते ही तुरंत प्रभावी हो जाता है। इसके लिए किसी अतिरिक्त कानूनी कार्रवाई, रजिस्ट्री या कोर्ट की मंजूरी की जरूरत नहीं है। View this post on Instagram अदालत ने यह भी कहा कि पारिवारिक समझौता (फैमिली सेटलमेंट) भले ही रजिस्टर्ड न हो, फिर भी वह संपत्ति के बंटवारे को साबित करने के लिए पूरी तरह वैध और बाध्यकारी माना जाएगा, बशर्ते सभी पक्षकारों ने स्वेच्छा से सहमति दी हो और दस्तावेज में स्पष्ट इरादा जाहिर हो। मामला क्या था? यह फैसला एक पुराने पारिवारिक विवाद से जुड़ा था, जिसमें एक भाई ने संपत्ति में अपना हिस्सा छोड़ने का दस्तावेज साइन किया था, लेकिन बाद में उसकी कानूनी मान्यता पर सवाल उठाया गया। निचली अदालतों ने इसे रजिस्टर्ड न होने के कारण अमान्य माना था। सुप्रीम कोर्ट ने इस दृष्टिकोण को खारिज करते हुए कहा कि पारिवारिक समझौते का मूल उद्देश्य शांति और सुलह है, इसलिए इसे अनावश्यक कानूनी बाधाओं में नहीं बांधा जाना चाहिए। कानूनी आधार ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट, 1882 की धारा 122 और 126 के तहत, हिस्सा छोड़ने (रिलिंक्विशमेंट) का दस्तावेज साइन होते ही प्रभावी माना जाता है। रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1908 के तहत रजिस्ट्री अनिवार्य नहीं, अगर दस्तावेज में सभी पक्षों की सहमति और स्पष्ट इरादा हो। कोर्ट ने पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि पारिवारिक समझौते को बढ़ावा देना सार्वजनिक नीति का हिस्सा है। प्रभाव लाखों पुराने संपत्ति विवादों का तेजी से निपटारा संभव। रजिस्ट्री न होने की वजह से कोर्ट में अटके केस कम होंगे। परिवारों को महंगे मुकदमों से बचत। वकीलों का कहना है कि यह फैसला हिंदू उत्तराधिकार कानून के तहत भी मिसाल बनेगा। वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने इसे “पारिवारिक कानून में क्रांतिकारी कदम” बताया। सुप्रीम कोर्ट ने सभी निचली अदालतों को इस फैसले का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन इंदौर: लव जिहाद फंडिंग और दुष्कर्म मामले में गिरफ्तार आरोपी साहिल शेख को हाईकोर्ट से मिली जमानत जैश का ‘डॉक्टर मॉड्यूल’: तुर्की से सेशन ऐप तक, आतंक का नया नेटवर्क