नई दिल्ली, प्रदीप चौधरी ।। यूनिसेफ इंडिया ने किशोरों को सर्वाइकल कैंसर और सड़क दुर्घटनाओं से बचाने के लिए मीडिया की भूमिका को मजबूत बनाने हेतु दो दिवसीय राष्ट्रीय ‘ट्रेनर्स ऑफ ट्रेनर्स वर्कशॉप’ आयोजित की। इस कार्यशाला का उद्देश्य किशोर स्वास्थ्य से जुड़ी उभरती चुनौतियों पर तथ्य-आधारित और जिम्मेदार पत्रकारिता को बढ़ावा देना था। वर्कशॉप के उद्घाटन सत्र में यूनिसेफ इंडिया की कम्युनिकेशन प्रमुख जाफरिन चौधरी ने कहा, “युवा उन स्वास्थ्य मुद्दों पर सटीक जानकारी पाने के हकदार हैं जो उन्हें और समाज को प्रभावित करते हैं। गलत जानकारी से लड़ने का सबसे अच्छा तरीका वैज्ञानिक और चिकित्सीय जानकारी को मीडिया के जरिए जिम्मेदारी से पहुंचाना है।” उन्होंने जोर दिया कि ‘क्रिटिकल अप्रेजल स्किल्स’ यानी तथ्यों की गहराई से जांचने की क्षमता से सर्वाइकल कैंसर और सड़क सुरक्षा जैसे मुद्दों पर जागरूकता को और प्रभावी बनाया जा सकता है। यूनिसेफ इंडिया के स्वास्थ्य प्रमुख (कार्यकारी) डॉ. विवेक वीरेंद्र सिंह ने कहा, “सर्वाइकल कैंसर एकमात्र ऐसा कैंसर है जिसे वैक्सीन से रोका जा सकता है। जागरूकता ही इसका सबसे प्रभावी बचाव है। मीडिया झिझक और गलत धारणाओं को तोड़ने में अहम भूमिका निभा सकता है।” सड़क सुरक्षा पर उन्होंने कहा, “हर दुर्घटना रोकी जा सकती है। मीडिया को त्रासदी के बाद सहानुभूति के बजाय डेटा-आधारित जवाबदेही पर फोकस करना चाहिए।” कार्यशाला में देशभर से आए वरिष्ठ स्वास्थ्य संपादक, मीडिया एजुकेटर और सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने बताया कि 2022 में भारत में सर्वाइकल कैंसर के 79,103 नए मामले सामने आए और 34,805 महिलाओं की मौत हुई, जबकि यह पूरी तरह रोकी जा सकने वाली बीमारी है। वहीं हर साल 1.5 लाख से अधिक लोग सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाते हैं, जिनमें बच्चे-युवा सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। विशेष सत्रों में एम्स की प्रिवेंटिव ऑन्कोलॉजी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पल्लवी शुक्ला, निमहंस के डब्ल्यूएचओ सहयोग केंद्र के प्रमुख डॉ. गौतम एम. सुकुमार और मध्य प्रदेश में यूनिसेफ के चीफ ऑफ फील्ड ऑफिसर अनिल गुलाटी ने प्रतिभागियों को संबोधित किया। View this post on Instagram प्रतिभागियों ने छह संपादकीय समूहों में काम करते हुए न्यूजरूम रणनीतियां तैयार कीं। चर्चा हुई कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स डेटा विश्लेषण और तथ्य-जांच में कैसे मदद कर सकते हैं तथा वैज्ञानिक शोध को क्षेत्रीय-भाषाई मीडिया तक कैसे पहुंचाया जाए। यूनिसेफ की कम्युनिकेशन्स ऑफिसर सोनिया सरकार ने बताया कि यह वर्कशॉप ‘क्रिटिकल अप्रेजल स्किल्स’ फ्रेमवर्क के तहत आयोजित की गई, जिसकी शुरुआत 2014 में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन के साथ मिलकर हुई थी। प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर अब महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान और कर्नाटक में राज्य स्तरीय वर्कशॉप आयोजित करेंगे ताकि गलत सूचनाओं का मुकाबला हो और सर्वाइकल कैंसर व सड़क सुरक्षा पर जिम्मेदार, डेटा-आधारित रिपोर्टिंग को बढ़ावा मिले। यूनिसेफ की यह पहल निश्चय ही किशोर स्वास्थ्य की दो सबसे गंभीर लेकिन कम चर्चित चुनौतियों पर रोशनी डालने में मील का पत्थर साबित होगी। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन रीवा: गढ़ थाना क्षेत्र में अनियंत्रित स्कॉर्पियो ने मचाया कोहराम, 4 की मौत, 3 गंभीर रूप से घायल इंदौर ट्रैफिक पुलिस की सख्ती: 1500 मॉडिफाइड साइलेंसर रोड रोलर से कुचले, शहर हुआ “साइलेंट”